- भारत सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन
-विकसित पूर्वोत्तर के विजन को साकार करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि
अशोक झा/सिलीगुड़ी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार, 11 जून को भारत सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) को पूर्वोत्तर भारत के विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।इस समझौते के जरिए दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित तेल और प्राकृतिक गैस संसाधनों के दोहन से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है।
दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक या आर्थिक समझौता नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समृद्ध और विकसित पूर्वोत्तर के विजन को साकार करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि है।
'आज ऐतिहासिक क्षण के साक्षी हैं हम'
समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान अमित शाह ने कहा कि आज का दिन पूर्वोत्तर भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखेगा। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित कई जटिल मुद्दों को बातचीत और सहयोग के माध्यम से हल करने का प्रयास किया गया है और यह समझौता उसी का परिणाम है। गृह मंत्री ने कहा कि इस पहल से तेल और प्राकृतिक गैस की खोज एवं उत्पादन की संभावनाओं को नई गति मिलेगी। साथ ही, इससे भविष्य में खनिज संसाधनों के दोहन और खनन गतिविधियों के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे।'
तेल और गैस संसाधनों पर 50-50 साझेदारी का फार्मूला
अमित शाह ने बताया कि दोनों राज्यों ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए तेल और गैस संसाधनों के उपयोग को लेकर 50-50 हिस्सेदारी के मॉडल पर सहमति बनाई है। उन्होंने कहा कि असम और नागालैंड दोनों ने यह समझा कि सीमावर्ती विवादों या अन्य प्रशासनिक चुनौतियों को देश की प्राकृतिक संपदा के उपयोग में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। इसी सोच के तहत दोनों राज्यों ने साझा लाभ के सिद्धांत को अपनाया। गृह मंत्री के अनुसार, यह केवल आर्थिक समझौता नहीं बल्कि राष्ट्र प्रथम की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।
नागालैंड में व्यापक स्तर पर तेल अन्वेषण की तैयारी
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने नागालैंड के मुख्यमंत्री का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने केवल छह तेल क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय पूरे नागालैंड में तेल और गैस अन्वेषण के लिए सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि नागालैंड सरकार की यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित कर सकती है। गृह मंत्री ने इसके लिए नागालैंड के मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका सहयोग और दूरदर्शिता इस समझौते को सफल बनाने में महत्वपूर्ण रही है।
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रोजगार और निवेश के नए अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऊर्जा क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। तेल और प्राकृतिक गैस की खोज और उत्पादन बढ़ने से न केवल राज्यों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके अलावा, तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़ी आधारभूत संरचना, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र में भी निवेश बढ़ने की संभावना है।ऐतिहासिक समझौते से बढ़ी उम्मीदें
भारत सरकार, असम और नागालैंड के बीच हुए इस त्रिपक्षीय समझौते को पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। केंद्र सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विकास की नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। गृह मंत्री अमित शाह ने विश्वास जताया कि यह समझौता आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत को आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
क्या है यह पूरा प्रोजेक्ट?
जिन क्षेत्रों में भूमि के मालिकाना हक को लेकर अभी भी पूरी तरह अस्पष्टता है, वहां से होने वाली कमाई को एक 'एस्क्रो अकाउंट' में सुरक्षित रखा जाएगा, जब तक कि उसका अंतिम कानूनी समाधान नहीं हो जाता। असम और नागालैंड के बीच लगभग 434 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है। इस सीमा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विवादित क्षेत्र बेल्ट में हाइड्रोकार्बन और कच्चे तेल का भारी भंडार मौजूद है। लेकिन छह दशकों से अधिक पुराने सीमा विवाद और अदालती मामलों के कारण इस प्राकृतिक संपदा का दोहन नहीं हो पा रहा था।
समझौते के तहत तय किया गया है कि विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों से जो भी तेल और प्राकृतिक गैस निकाली जाएगी, उससे मिलने वाली रॉयल्टी और राजस्व को असम और नागालैंड के बीच आधा-आधा (50-50 प्रतिशत) बांटा जाएगा। इस प्रोजेक्ट के जरिए ओएनजीसी (ONGC) और अन्य तेल कंपनियों को फिर से काम शुरू करने की अनुमति मिलेगी। आधुनिक तकनीकों (जैसे Open Acreage Licensing Policy - OALP) के तहत छोटे ब्लॉक बनाकर टेंडर जारी किए जाएंगे।
इस समझौते को नागालैंड के विशेष संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 371-A) और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों को प्रभावित किए बिना एक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर लागू किया जा रहा है, ताकि क्षेत्र को बिना समय गंवाए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
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