- मुर्शिदाबाद से लेकर हावड़ा तक ममता बनर्जी के चहेते मुस्लिम विधायकों ने दीदी की पीठ में घोंपा छुरा, बगावत कर तोड़ी TMC, देखें बागियों की पूरी लिस्ट!
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अंदर गहरे संकट के बीच निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने खुले तौर पर बगावत का बिगुल फूंक दिया है।
पार्टी के अंदर मचे इस घमासान के बीच मामले के जानकार सूत्रों ने खुलासा किया है कि बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने टीएमसी के 59 विधायकों का मजबूत समर्थन प्राप्त होने का बड़ा दावा ठोक दिया है, जिसके चलते विधानसभा का पूरा नंबर गेम अचानक बदल गया है।इस बीच बागी विधायकों की ओर से स्पीकर को सौंपे गए पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि ममता बनर्जी TMC की पार्टी नेता हैं. नेता प्रतिपक्ष (LoP) ऋतब्रत बनर्जी हैं, जबकि उप नेता प्रतिपक्ष जावेद खान, सिउली साहा और संदीपान साहा हैं. पार्टी के चीफ व्हिप (Chief Whip) अखरुज्जमान हैं.
सूत्रों के अनुसार, बागी गुट ने विधायक दल के लिए नए नेतृत्व ढांचे का भी प्रस्ताव रखा जिसके तहत ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता और अखरुज्जमान को चीफ व्हिप बनाए जाने का सुझाव दिया गया। चंद्रनाथ सिन्हा और शिउली साहा समेत कई बागी विधायक ऋतब्रत और संदीपन साहा के साथ विधानसभा स्पीकर के कक्ष तक गए, जहां ये दस्तावेज सौंपे गए। सूत्रों ने बताया कि समर्थन पत्रों पर 58 विधायकों के हस्ताक्षर थे, जिनमें मध्यमग्राम के विधायक रथिन घोष भी शामिल हैं। जिन्होंने विधानसभा परिसर से रवाना होने से पहले ऋतब्रत के समर्थन में दस्तखत किए। पार्टी के भीतर मचे इस भयंकर घमासान ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की रातों की नींद उड़ा दी है. विधानसभा के भीतर का 'नौशाद अली कक्ष' इस समय बगावत का सबसे बड़ा हेडक्वार्टर बन चुका है. इसी कमरे में बैठकर बागी विधायकों ने टीएमसी की बर्बादी और दीदी के राजनीतिक अंत की पूरी स्क्रिप्ट लिख डाली है, जिससे पूरी पार्टी में हड़कंप मच गया है.
दीदी को लगा 59 विधायकों का झटका: रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी बुधवार की सुबह करीब 59 नाराज विधायकों के समर्थन पत्र के साथ सीधे विधानसभा पहुंच गए. देखते ही देखते अरूप रॉय, शिउली साहा, अखरुज्जमान, सबीना यास्मीन और चंद्रनाथ सिंह जैसे दिग्गज नेता भी वहां जुटने लगे। इन सभी नेताओं ने ममता और अभिषेक की नाक के नीचे बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। बागी गुट के विधायक संदीपन साहा ने तो खुलेआम मीडिया के सामने दावा कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई से अधिक विधायक उनके साथ आ चुके हैं. इस बड़े झटके ने ममता बनर्जी को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है।
नौशाद अली कक्ष बना बगावत का केंद्र:
विधानसभा के भीतर बने 'नौशाद अली कक्ष' में इन बागी विधायकों ने एक बेहद गोपनीय और रणनीतिक बैठक की. इसी कमरे के अंदर तृणमूल कांग्रेस को दो फाड़ करने का पूरा कानूनी खाका तैयार किया गया। बैठक के बाद कमरे से बाहर निकलीं महिला विधायक सबीना यास्मीन ने साफ-साफ कहा, "हम सब यहां विधानसभा में अपना नया नेता यानी विपक्ष का नेता चुनने के लिए आए हैं." वहीं चंद्रनाथ सिंह ने खुलेआम कह दिया कि उन्होंने ऋतब्रतबनर्जी को अपना असली नेता स्वीकार कर लिया है. साफ है कि इसी कमरे के भीतर दीदी की सत्ता और संगठन को खत्म करने का पूरा गेम प्लान फाइनल हुआ है.
अभिषेक बनर्जी का दांव पूरी तरह फेल
इस पूरी बगावत के बीच भतीजे अभिषेक बनर्जी का एक बड़ा दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया. न्यूज़18 बांग्ला के मुताबिक, टीएमसी के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्रनाथ बसु को एक पत्र लिखकर वरिष्ठ नेता शोभंदेव चटर्जी को विपक्ष का नेता घोषित करने की मांग की थी. लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और स्पीकर के कोलकाता में न होने की वजह से यह पत्र समय पर नहीं पहुंच पाया. इसी का फायदा उठाकर बागी गुट ने समर मुखर्जी के जरिए 59 विधायकों के दस्तखत वाली चिट्ठी स्पीकर को सौंपकर असली विपक्षी दल का दर्जा मांग लिया.
बागियों का फूटा दर्द, कहा नहीं सहेंगे अपमान
नौशाद अली कक्ष में हुई इस बैठक के अंदर का माहौल बेहद गर्म और गुस्से से भरा हुआ था. सूत्रों के हवाले से खबर है कि कई वरिष्ठ विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अपना पुराना दर्द बयां किया. उन्होंने कहा, "हम सब विपरीत परिस्थितियों में लड़कर चुनाव जीते हैं और सम्मान के हकदार हैं. हमें बेईमान या चोर कहा जा रहा है, लेकिन हम ऐसा अपमान अब चुपचाप सहन नहीं करेंगे." विधायकों का यह साफ और कड़ा रुख दिखाता है कि ममता बनर्जी के तानाशाही रवैये और अपमानजनक भाषा से तंग आकर ही इन नेताओं ने बगावत का रास्ता चुना है.
क्या विपक्ष की कुर्सी भी खो देंगी ममता?
अब सबसे बड़ा कानूनी और राजनीतिक सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या ममता बनर्जी की पार्टी विपक्ष में बैठने के लायक भी बचेगी? अगर स्पीकर ऋतब्रता बनर्जी के गुट के 59 विधायकों के दावों और हस्ताक्षरों को सही मान लेते हैं, तो तकनीकी रूप से यह बागी गुट ही बंगाल विधानसभा में असली विपक्षी दल बन जाएगा. ऐसी हालत में मूल तृणमूल कांग्रेस संख्या बल के मामले में बहुत पीछे छूट जाएगी और ममता बनर्जी के हाथ से विपक्ष के नेता का आधिकारिक पद, रुतबा और सुविधाएं भी हमेशा के लिए छिन जाएंगी, जो उनके राजनीतिक वजूद के लिए आखिरी कील साबित हो सकती है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 59 विधायकों के बागी रुख अख्तियार कर लेने के बाद अब आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के पास सिर्फ 21 विधायक बचे हैं. विधायकों का ये नंबर गेम बताता है कि टीएमसी इस वक्त पूरी तरह से मुश्किलों में घिरी हुई.
बताया जा रहा है कि टीएमसी के ये बागी विधायक विधानसभा पहुंच गए हैं, जहां वह विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात करेंगे. इसके लिए स्पीकर भी सदन पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि स्पीकर से मुलाकात के दौरान ऋतब्रत नेता प्रतिपक्ष के लिए अपनी बात रखेंगे.
क्या है बागी विधायकों की मांग
टीएमसी के इन बागी विधायकों की मांग है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय के बजाय पार्टी के किसी अन्य बेहद वरिष्ठ नेता को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (लीडर ऑफ अपोजिशन) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए, जिसके लिए उन्होंने ये कड़ा रुख अपनाया है।उधर, टीएमसी के बागी विधायकों में शामिल मुस्तफिजुर रहमान ने कहा कि टीएमसी के 59 विधायकों ने हस्ताक्षर किया है. हम सभी ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है, लेकिन हम चाहते हैं कि किसी वरिष्ठ नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए।विधानसभा के मौजूदा समीकरणों को देखें तो इस अभूतपूर्व बगावत के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के पास अब केवल 21 वफादार विधायक ही बचे हैं, जिससे पार्टी के पूरी तरह विभाजित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।आपको बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 208 सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर टीएमसी को सत्ता से बेदखल कर दिया।
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