अशोक झा/ कोलकाता: राज्य में टीएमसी के करारी हार के पीछे बांग्ला पक्ष नामक संगठन भी कही ना कही बड़ा जिम्मेवार है।यह संगठन बंगला भाषा के नाम पर राज्य के बाहर से रोजी रितिक लिए आने वाले हिंदीभाषी लोगों को निशाना बनाती थी। संगठन के अध्यक्ष गर्ग चटर्जी ने चुनाव में मतगणना के दौरान हेराफेरी का दावा किया था। चुनाव आयोग ने उन पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया था। गर्ग चटर्जी पर पुलिस का बड़ा एक्शन शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना के दौरान ईवीएम में हेराफेरी का आरोपल लगाने वाले ‘बांग्ला पक्ष’ के संस्थापक और महासचिव गर्ग चटर्जी को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया है। चुनाव आयोग ने चटर्जी के खिलाफ खिलाफ सोशल मीडिया पर झूठी जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की थी।बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के लिए 4 मई को मतगणना हुई थी। इस दौरान जब गर्ग चटर्जी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि मतगणना के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की अदला-बदली की गई थी। चुनाव अधिकारी ने दर्ज कराया था केस: कोलकाता पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, गर्ग चटर्जी की यह गिरफ्तारी उत्तरी कोलकाता की जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) स्मिता पांडे द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर की गई थी। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने इससे पहले चटर्जी पर मतगणना प्रक्रिया के संबंध में सोशल मीडिया पर झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया था।
चुनाव आयोग की शिकायत के आधार पर कोलकाता पुलिस ने मंगलवार सुबह देशप्रिय पार्क इलाके से उसे हिरासत में ले लिया। यह विवाद तब शुरू हुआ जब गर्ग ने मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और ईवीएम से जुड़ी अनियमितताओं का आरोप लगाया।
चुनाव आयोग ने तुरंत खारिज किए थे।
गर्ग चटर्जी द्वारा ईवीएम को लेकर किए गए दावों को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया था। इसके तुरंत बाद ही चुनावी प्रक्रिया के मामले में जनता में भ्रम पैदा करने वाली गलत जानकारी फैलाने के गंभीर आरोप में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
पुलिस अब इस मामले की जांच भी कर रही है कि उन्हें सुरक्षा कैसे मिल रही है। क्योंकि उनके पास सरकार द्वारा नियुक्त पीएसओ था या फिर निजी सुरक्षाकर्मी था। इसको लेकर भी पुलिस केस की परतें खंगाल रही है।
कौन हैं गर्ग चटर्जी?
गर्ग चटर्जी के बारे में बता दें कि वे बंगाल की राजनीति और सामाजिक-सांस्कृतिक हलकों में बांग्ला पोक्खो के संस्थापक के रूप में व्यापक रूप से जाने जाते हैं यह एक ऐसा संगठन है जिसे उन्होंने 7 जनवरी, 2018 को शुरू किया था। यह संगठन खुद को बंगाली भाषा, संस्कृति और स्थानीय अधिकारों की रक्षा की वकालत करने वाले एक मंच के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
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