पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल को राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। पश्चिम बंगाल कैडर के 1990 बैच के आईएएस अधिकारी अग्रवाल ने विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में चुनाव आयोग द्वारा अनिवार्य एसआईआर प्रक्रिया का नेतृत्व किया था, जिसमें लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
कौन हैं मनोज अग्रवाल?:
मनोज कुमार अग्रवाल 1990 बैच के IAS अधिकारी हैं और पश्चिम बंगाल कैडर से जुड़े रहे हैं. उन्होंने राज्य सरकार के कई अहम विभागों में काम किया है। प्रशासनिक सुधार, खाद्य विभाग, वन विभाग और फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज जैसे विभागों में उन्होंने जिम्मेदारी संभाली थी। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान वो राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) थे। चुनाव कराने, वोटर लिस्ट संशोधन और मतदान प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी। इसी वजह से उनका नाम चुनावी विवादों के केंद्र में भी रहा। दरअसल, चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा यानी SIR प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। आरोप लगे थे कि लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। मनोज अग्रवाल ने उस समय कहा था कि हटाए गए नाम डुप्लीकेट, मृत, शिफ्ट हो चुके या गलत एंट्री वाले लोगों के थे. उन्होंने दावा किया था कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से की गई। इस नियुक्ति के बाद तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। तृणमूल नेता साकेत गोखले ने इस कदम को बेशर्मी की हद करार दिया और पार्टी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने मजाकिया लहजे में इसे संयोग बताया।साकेत गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल, जिन्होंने चुनाव आयोग के लिए पश्चिम बंगाल चुनाव का संचालन किया था, उन्हें नई बीजेपी सरकार द्वारा बंगाल का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। बीजेपी और चुनाव आयोग अब चुनाव चुराने के मामले में खुलकर सामने आ गए हैं। क्या अदालतें ‘अंधी’ हैं या फिर इस साजिश में ‘शामिल’ हैं? यह तो बेशर्मी की भी हद है।”
न्यूट्रल अंपायर को नवाजा गया- सागरिका घोष: वहीं टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी बीजेपी पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, “बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल अब बंगाल के मुख्य सचिव होंगे। इस तथाकथित “न्यूट्रल अंपायर” को बंगाल में बीजेपी सरकार के शीर्ष नौकरशाह के पद से नवाजा गया है। क्या अब भी कोई सचमुच यह मानता है कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 निष्पक्ष और स्वतंत्र थे? यह बेहद शर्मनाक और बेशर्मी भरा कदम है।”पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने कहा, “बंगाल में खुला खेल फर्रुखाबादी चल रहा है, जो चुनाव कराया उसे मुख्य सचिव बनाया, जो चुनाव आयोग का बंगाल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी थे, जिनकी विशिष्ट कृपा से वहां बीजेपी की सरकार बनी, उस मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव बना
बीजेपी ने संदेश दिया लाज शर्म छोड़ो, कुर्सी हथियाओ लूटो मौज करो।बीजेपी ने दिया जवाब: विपक्ष के आरोपों का भारतीय जनता पार्टी ने जवाब दिया है। पार्टी ने कहा, “ममता बनर्जी के विपरीत, जिन्होंने IAS से जुड़े नियमों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए, दर्जनों अधिकारियों को दरकिनार करके नौकरशाही को कमजोर कर दिया था, पश्चिम बंगाल की BJP सरकार ने, देश के कानूनों की गरिमा को बहाल करने के अपने वादे के अनुरूप, राज्य में कार्यरत सबसे वरिष्ठ IAS अधिकारी श्री मनोज अग्रवाल को पश्चिम बंगाल का मुख्य सचिव नियुक्त किया है।”मनोज कुमार अग्रवाल कौन हैं?
मनोज कुमार अग्रवाल पश्चिम बंगाल कैडर के 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने राज्य सरकार में कई अहम पदों पर काम किया है। इसमें कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार, खाद्य, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा और वन विभाग में वरिष्ठ पद शामिल हैं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) और 2026 के विधानसभा चुनावों के दौरान वे पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत थे।बंगाल चुनाव नतीजों पर पड़ा SIR का असर: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के परिणाम और मतदाता सूचियों के एसआईआर में 90.8 लाख हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई। इसमें ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी द्वारा आरोप लगाया गया कि इस एसआईआर के कारण ही जिन 31 सीटों पर पार्टी को पिछली बार जीत मिली थी, वहां इस बार बीजेपी जीत गई है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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