- लगातार दो बार से हर बार खड़ा कर दिया वोटो के पहाड़ , राजवंशी समुदाय में खुशी की लहर
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए 294 में से 207 सीटों पर कब्जा जमाया, वहीं दूसरी ओर एक ऐसी जीत सामने आई है जिसने सबको चौंका दिया। जी हां हम बता रहे है उस क्षेत्र के विधायक बारे में जहां नक्सल आंदोलन का जन्म हुआ था। यह विधानसभा क्षेत्र है माटीगाड़ा - नक्सलबाड़ी क्षेत्र के विधायक आनंदमय बर्मन के संबंध में। ये जीत है माटीगाड़ा -नक्सलबाड़ी सीट से BJP उम्मीदवार आनंदमय बर्मन की, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से बड़े-बड़े राजनीतिक दिग्गजों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।
यह वही क्षेत्र है जहां गृहमंत्री अमित शाह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी का दौरा 25 अप्रैल 2017 को किया था। इस दौरान उन्होंने सिलीगुड़ी के एक छोटे से गाँव में बूथ कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था और गीता मोहाली नामक एक स्थानीय महिला के घर पर दोपहर का भोजन किया था। यह उनके राज्य के दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करना और नक्सलबाड़ी में बूथ स्तर को मजबूत करना था। यही से वह नक्सलबाद को खत्म करने का संकल्प लिया था। इसी विधानसभा से आनंदमय बर्मन की जीत केवल एक सीट जीतने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने जीत के अंतर के मामले में नया इतिहास भी रच दिया है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को 1,04,265 वोटों के भारी अंतर से हराया, जो इस चुनाव की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है. इतना ही नहीं, इस जीत की तुलना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से होने लगी है, जो अपने बड़े जीत अंतर के लिए जाने जाते हैं।
कांग्रेस नेता से था मुकाबला:
माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर इस बार कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन असली मुकाबला BJP के आनंदमय बर्मन और तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार शंकर मालाकार के बीच माना जा रहा था। शुरुआती राउंड से ही बर्मन ने बढ़त बना ली थी, जो हर राउंड के साथ और मजबूत होती चली गई। जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ी, अंतर बढ़ता गया और अंत में यह जीत रिकॉर्ड बन गई।
आंकड़ों के मुताबिक, आनंदमय बर्मन को कुल 1,66,905 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी को मात्र 62,640 वोटों से संतोष करना पड़ा। इस तरह दोनों के बीच का अंतर 1 लाख से अधिक हो गया. इस विशाल जीत ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को झकझोर दिया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई। अगर तुलना की जाए, तो 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर सीट से करीब 1,03,390 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। ऐसे में आनंदमय बर्मन की जीत का अंतर उनसे भी लगभग 875 वोट ज्यादा है।यही वजह है कि इस जीत को 'सुपर रिकॉर्ड' के तौर पर देखा जा रहा है. इस ऐतिहासिक जीत के बाद आनंदमय बर्मन का नाम अचानक राष्ट्रीय राजनीति में उभरकर सामने आया है। आने वाले समय में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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