-आखिरी फोन कॉल से शूटआउट तक! सुवेंदु के सबसे करीबी चंद्रनाथ रथ के साथ कब-क्या हुआ?
-चाय, जश्न और आखिरी बातचीत से खुलेगा हत्याकांड से पर्दा
-सुवेंदु अधिकारी के मारे गए सहयोगी की माँ ने आरोपियों के लिए आजीवन कारावास की माँग की
पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद उनके करीबी दोस्त कासिम अली का बयान चर्चा में है। कासिम ने दावा किया कि घटना से कुछ घंटे पहले चंद्रनाथ ने उन्हें चाय और बातचीत के लिए बुलाया था। हत्या के बाद उन्होंने इसे साजिश बताते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और एनकाउंटर की मांग की है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस आखिरी फोन कॉल की हो रही है, जिसमें चंद्रनाथ रथ ने अपने दोस्त से कहा था, "निजाम पैलेस आ जाओ, चाय पिएंगे, बीजेपी की जीत का जश्न मनाएंगे।"चंद्रनाथ रथ को सुवेंदु अधिकारी का 'मिस्टर डिपेंडेबल' भी कहा जाता था। उन्होंने अपने दोस्त कासिम अली से बड़े उत्साह में कहा था, "निजाम पैलेस आ जाओ, चाय पिएंगे और जीत का जश्न मनाएंगे।" किसे पता था कि ये जश्न की दावत असल में एक आखिरी विदाई का बुलावा बन जाएगी। मध्यमग्राम की सड़कों पर जिस तरह से गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजी, उसने न सिर्फ एक पूर्व एयफोर्स जवान की जान ली, बल्कि बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है।चंद्रनाथ रथ के करीबी दोस्त कासिम अली ने जो कहानी सुनाई, उसने इस पूरे मामले को और ज्यादा भावुक और रहस्यमय बना दिया। कासिम के मुताबिक 06 मई शाम करीब 6 से 6:30 बजे चंद्रनाथ का फोन आया था। उन्होंने कहा था कि
"निजाम पैलेस आ जाओ, बैठेंगे, चाय पिएंगे, बीजेपी की जीत पर बात करेंगे।" लेकिन कासिम किसी काम में व्यस्त थे और उन्होंने अगले दिन मिलने की बात कह दी।।कासिम कहते हैं कि उस बातचीत में सबकुछ सामान्य लग रहा था। न डर, न घबराहट, न किसी खतरे का संकेत। लेकिन कुछ ही घंटों बाद खबर आई कि चंद्रनाथ रथ पर हमला हो गया है। कासिम ने किसी काम की वजह से कह दिया कि आज नहीं, कल मिलते हैं। वो 'कल' कभी आया ही नहीं।देर रात जब मध्यमग्राम इलाके में चंद्रनाथ की कार गुजर रही थी, तभी बाइक और कार सवार हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। हमला इतना सुनियोजित था कि चंद्रनाथ को संभलने तक का मौका नहीं मिला। ताबड़तोड़ फायरिंग हुई और शरीर गोलियों से छलनी कर दिया गया। अस्पताल ले जाते समय उनकी सांसें थम चुकी थीं। कासिम अली का दावा है कि यह हमला चंद्रनाथ पर नहीं, बल्कि सुवेंदु अधिकारी पर सीधा निशाना था, क्योंकि चंद्रनाथ उनके सबसे करीबी और राजदार थे। यही वजह है कि यह आखिरी बातचीत अब पूरे बंगाल में चर्चा का विषय बन गई है
देर रात कैसे हुआ हमला?: पुलिस के शुरुआती इनपुट के मुताबिक घटना उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके की है। देर रात चंद्रनाथ रथ अपनी कार से लौट रहे थे। इसी दौरान एक संदिग्ध कार और कुछ बाइक सवार लगातार उनकी गाड़ी का पीछा कर रहे थे।जैसे ही उनकी कार एक जगह धीमी हुई, हमलावरों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। गोलियां सीधे कार की खिड़कियों और ड्राइविंग साइड की तरफ दागी गईं। हमले में चंद्रनाथ रथ गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके ड्राइवर को भी गोली लगी। दोनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर चंद्रनाथ को बचा नहीं सके। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे और इसे राजनीतिक साजिश बताया। 41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। मूल रूप से पूर्व मेदिनीपुर के चांदीपुर के रहने वाले चंद्रनाथ एक बेहद अनुशासित बैकग्राउंड से आते थे। उन्होंने करीब 20 साल तक भारतीय वायु सेना (IAF) में देश की सेवा की। राहड़ा रामकृष्ण मिशन से पढ़ाई करने वाले चंद्रनाथ पर अध्यात्म का गहरा असर था। बताया जाता है कि एक समय वह संन्यास तक लेने का मन बना चुके थे, लेकिन किस्मत उन्हें राजनीति के अखाड़े में ले आई। वायु सेना से वॉलंटरी रिटायरमेंट (VRS) लेने के बाद, उन्होंने कुछ समय कॉर्पोरेट जगत में हाथ आजमाया, लेकिन जल्द ही वे सुवेंदु अधिकारी की टीम का हिस्सा बन गए। 2019 में जब सुवेंदु ममता सरकार में मंत्री थे, तब से चंद्रनाथ उनके साथ साये की तरह रहते थे। जब सुवेंदु ने बीजेपी का दामन थामा, तो चंद्रनाथ भी उनके साथ हो लिए।नंदीग्राम से भवानीपुर तक: पर्दे के पीछे के असली रणनीतिकार
बीजेपी के गलियारों में चंद्रनाथ रथ को 'लो-प्रोफाइल' रहने वाला शख्स माना जाता था। वे कभी कैमरों के सामने नहीं आते थे, लेकिन सुवेंदु अधिकारी की हर चुनावी जीत के पीछे उनकी सटीक प्लानिंग होती थी। चाहे नंदीग्राम का हाई-प्रोफाइल चुनाव हो या भवानीपुर की बिसात, चंद्रनाथ लॉजिस्टिक्स, बूथ मैनेजमेंट और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बिठाने में माहिर थे। पार्टी के अंदर चर्चा थी कि अगर सुवेंदु अधिकारी को राज्य में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलती है, तो चंद्रनाथ रथ को प्रशासन में कोई बहुत बड़ा पद दिया जा सकता था। वह सुवेंदु के इतने भरोसेमंद थे कि उनके चाय-बिस्कुट से लेकर विधानसभा के दस्तावेजों तक की जिम्मेदारी चंद्रनाथ ही संभालते थे। बीजेपी विधायक अग्निमित्रा पॉल और श्रीरूपा मित्रा चौधरी ने उन्हें एक ऐसा दोस्त बताया जो राजनीति से परे बेहद शालीन इंसान था।एयरफोर्स छोड़ने के बाद कैसे जुड़े सुवेंदु से?:
एयरफोर्स से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने के बाद चंद्रनाथ ने कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया। इसके बाद धीरे-धीरे उनका जुड़ाव राजनीतिक संगठनात्मक कामों से बढ़ने लगा।
उनका परिवार पहले से ही राजनीति से जुड़ा हुआ था। उनकी मां हासी रथ तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान स्थानीय पंचायत राजनीति में सक्रिय रही थीं। बाद में जब सुवेंदु अधिकारी बीजेपी में आए तो रथ परिवार भी उनके साथ भाजपा में शामिल हो गया। दरअसल चंद्रनाथ रथ और सुवेंदु अधिकारी का संबंध नया नहीं था। दोनों परिवारों की पहचान दो दशक से ज्यादा पुरानी बताई जाती है। करीब 2019 में चंद्रनाथ आधिकारिक तौर पर सुवेंदु अधिकारी की टीम का हिस्सा बने। उस समय सुवेंदु ममता सरकार में मंत्री थे। बाद में जब उन्होंने बीजेपी जॉइन की, तब भी चंद्रनाथ उनके साथ बने रहे।
टारगेट चंद्रनाथ नहीं, सुवेंदु थे: इस हत्या के बाद सबसे बड़ा दावा कासिम अली ने किया। उनका कहना है कि असली निशाना चंद्रनाथ रथ नहीं बल्कि सुवेंदु अधिकारी थे। कासिम के मुताबिक चंद्रनाथ रथ सुवेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद लोगों में शामिल थे और लंबे समय से उनकी राजनीतिक और चुनावी रणनीतियों का हिस्सा थे।उन्होंने दावा किया कि कई दिनों से रेकी की जा रही थी। हमलावरों को चंद्रनाथ की दिनचर्या, रास्ते और मूवमेंट की पूरी जानकारी थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक इन दावों की पुष्टि नहीं की है। लेकिन जिस तरह से हमला हुआ, उसने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या यह सिर्फ सड़क पर हुई वारदात थी या फिर पहले से प्लान की गई हत्या?हत्या या सुनियोजित राजनीतिक साजिश?
चंद्रनाथ रथ की हत्या का तरीका बताता है कि इसके पीछे पेशेवर अपराधी थे। चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावरों की बाइक पर नंबर प्लेट नहीं थी। पुलिस को मौके से Glock पिस्टल (ऑस्ट्रिया निर्मित) के खोखे मिले हैं, जो आमतौर पर पेशेवर गैंगस्टर्स या उच्च स्तरीय हमलों में इस्तेमाल होती है। कार की खिड़कियों पर गोलियों के निशान गवाह हैं कि निशाना सिर्फ डराना नहीं, बल्कि खत्म करना था।
इस घटना के बाद बंगाल का सियासी पारा चढ़ गया है। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने इसे 'कोल्ड ब्लडेड मर्डर' करार दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 3-4 दिनों से चंद्रनाथ की रेकी की जा रही थी। हालांकि, उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन कासिम अली जैसे करीबियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। कासिम का कहना है कि वे न्याय के लिए 'एनकाउंटर' जैसी सख्त कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।ममता और अभिषेक पर लगे आरोप:
कासिम अली ने बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि भवानीपुर चुनाव के बाद कुछ लोग चंद्रनाथ की बढ़ती अहमियत से परेशान थे।
हालांकि टीएमसी की तरफ से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सुवेंदु अधिकारी ने भी बयान दिया कि यह "ठंडे दिमाग से की गई प्लान्ड मर्डर" लगती है। हालांकि उन्होंने अपने समर्थकों से कानून हाथ में न लेने की अपील भी की।
बंगाल की राजनीति पर क्या होगा असर?:
यह हत्याकांड ऐसे समय में हुआ है जब बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आए कुछ ही दिन हुए हैं। बीजेपी जहां 207 सीटें जीतकर जश्न में डूबी थी, वहीं इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। टीएमसी ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है ताकि सच सामने आ सके। पुलिस फिलहाल सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और ड्राइवर के बयान का इंतजार कर रही है, जो अभी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।
चंद्रनाथ रथ का जाना सिर्फ एक PA का जाना नहीं है, बल्कि सुवेंदु अधिकारी के उस 'किले' में सेंध लगना है जिसे चंद्रनाथ ने अपनी मेहनत और वफादारी से सींचा था। अब देखना यह है कि बंगाल की कानून व्यवस्था इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने में कितनी तेजी दिखाती है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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