पश्चिम बंगाल की नवगठित 18 वीं विधानसभा ने शुक्रवार को एक नया इतिहास रच दिया। भारतीय जनता पार्टी के विधायक रथीद्र बोस को निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष चुना गया। आजादी के बाद यह पहली बार है जब उत्तर बंगाल के किसी विधायक को विधानसभा अध्यक्ष जैसे अहम और प्रतिष्ठित पद की जिम्मेदारी मिली है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रतिंद्र बोसे के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर तापस रॉय ने ध्वनि मत के माध्यम से प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। सदन में मौजूद सभी 207 भाजपा विधायकों ने एकमत होकर बोस के पक्ष में समर्थन दिया।विपक्ष की भूमिका में बैठी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पद के लिए अपना कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था, जिससे बोस के निर्वाचन का मार्ग पूरी तरह साफ हो गया और वे निर्विरोध चुन लिए गए।
विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए रतिंद्र बोस ने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वे पूरी ईमानदारी से निभाएंगे और जरूरत पड़ने पर अनुभवी विधायकों से मार्गदर्शन लेंगे। स्पीकर की कुर्सी संभालने से पहले उन्होंने कहा, "अगर मैं चुना जाता हूं तो मैं 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना के साथ अपनी जिम्मेदारियों को निभाऊंगा।"
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में हालिया चुनावों में मिली भारी जीत के बाद भाजपा के पास 207 विधायकों का प्रचंड बहुमत है। ऐसे में रतिंद्र बोस का चयन महज एक औपचारिकता माना जा रहा था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को ही कूचबिहार दक्षिण से विधायक बोस के नाम की घोषणा पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कर दी थी।उत्तर बंगाल को बड़ा राजनीतिक संदेश: रथीद्र बोस का अध्यक्ष चुना जाना केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। वह उत्तर बंगाल के पहले ऐसे विधायक हैं जो विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी संभालेंगे। पिछले एक दशक में उत्तर बंगाल भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ के रूप में उभरा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नियुक्ति के जरिए भाजपा सरकार ने इस क्षेत्र के मतदाताओं और नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का एक रणनीतिक संदेश दिया है।
( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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