बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा:
बांग्लादेश और भारत के बीच दुनिया का पांचवां सबसे लंबा बॉर्डर है, इसका काफी बड़ा हिस्सा ऐसा है जहां अभी भी फेंसिंग नहीं हुई। घुसपैठिए इसी का फायदा उठाते हैं। बंगाल में धरपकड़ शुरू होने के बाद अवैध तरीके से भारत में एंट्री करने वाले बांग्लादेशियों में हड़कंप मचा है। बंगाल में घुसपैठियों की धरपकड़ की जा रही है। नए सीएम सुवेंदु अधिकारी के आदेश के बाद होल्डिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं, जहां घुसपैठियों को रखकर उन्हें उनके मूल देश वापस भेजा जाना है।
भय के माहौल में घुसपैठिए बिहार के किशनगंज, कटिहार, अररिया, पूर्णिया समेत अन्य जिलों में सुरक्षित ठिकाना ढूंढ रहे है।
सीमा पर BSF की चौकसी है, फिर भी सवाल ये है कि आखिर घुसपैठिए कैसे घुस आते हैं। बांग्लादेश और भारत के बीच दुनिया का पांचवां सबसे लंबा बॉर्डर है।इसकी लंबाई तकरीबन 4096 किलोमीटर है। यह अकेली पश्चिम बंगाल से नहीं, बल्कि असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा से हेकर गुजरती है। इसकी सुरक्षा का जिम्मा बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी BSF संभालती है। जो कई चरणों में बॉर्डर की सुरक्षा करती है।
कैसे होती है बॉर्डर की निगरानी?
कंटीले तार और बॉर्डर आउटपोस्ट : बांग्लादेश बॉर्डर पर घुसपैठियों को रोकने के लिए बाड़बंदी की गई है, केंद्र सरकार के मुताबिक इसमें से 3232 किमी से ज्यादा पर बाड़बंद हो चुकी है, बाकी के लिए काम चल रहा है. कुछ इलाका ऐसा है जहां पर बाड़ लगाना संभव नहीं, वहां पर अन्य इंतजाम किए जा रहे हैं।जहां बाड़ हैं वहां पर बीएसएफ ने बॉर्डर आउटपोस्ट बना रखे हैं, जहां बाड़ नहीं हैं वहां पर बीएसएफ के जवान दिन रात गश्त करते हैं, खासतौर से नदी के किनारों और बॉर्डर से सटे गांवों में. घुसपैठियों ही नहीं बल्कि तस्करों को रोकने की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है।। स्मार्ट तकनीक: बॉर्डर के जिन इलाकों पर फेंसिंग नहीं लग सकती है वहां स्मार्ट तकनीक से सुरक्षा की जाती है. जैसे असम के धुबरी में कुछ इलाकों में BOLD-QIT यानी बॉर्डर इलेक्ट्रॉनिकली डॉमिनेटेड QRT इंटरसेप्शन टेक्नीक लागू की गई है। इसमें नदी किनारे और संवेदनशील जगहों पर थर्मल नाइटविजन कैमरे लगाए गए हैं, इसके अलावा रडार और मोशन सेंसर्स भी लगे हैं. खास तौर से ब्रह्मपुत्र रिवर और उसकी सहायक नदियों के आसपास नाव या पानी के रास्ते में घुसपैठ रोकने के लिए इससे निगरानी की जाती है. कंट्रोल रूम से लाइव मॉनीटरिंग होती है और हलचल दिखते हुए तुरंत QRT टीम मौके पर पहुंचती है। स्पीड बोट और तैरते बॉर्डर आउटपोस्ट : नदियों से होने वाली घुसपैठ पर नजर रखने के लिए बीएसएफ स्पीड बोट से पेट्रोलिंग करती है, इसके अलावा नदियों में नाव पर आउटपोस्ट भी बनाए गए हैं. बांग्लादेश बॉर्डर का सबसे कठिन इलाका सुंदरबन के घने मैंग्रोव जंगलों को माना जाता है, जहां से बड़े पैमाने पर घुसपैठ और तस्करी की आशंका जताई जाती है, वहां पर बीएसएफ एक मरीन बटालियन स्थापित कर रही है. यहां पहले से भी एक तैरता बॉर्डर आउटपोस्ट है। ड्रोन : लंबी दूरी की निगरानी के लिए बीएसएफ ड्रोन का भी प्रयोग करती है, अब दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के लिए ऑल टेरेन व्हीकल की भी योजना बनाई जा रही है।कैसे होती है घुसपैठ? बीएसएफ की कड़ी निगरानी और सुरक्षा के बावजूद घुसपैठ नहीं रुकती. ज्यादातर बॉर्डर पर ही पकड़े जाते हैं, मगर कुछ बीएसएफ की नजर बचाकर निकलने में सफल भी हो जाते हैं। ये लोग ज्यादातर नदी और बिना फेंसिंग वाले इलाके का इस्तेमाल करते हैं। खासकर उन इलाकों का, जहां पर नदियों पर टापू हैं। बीएसएफ के मुताबिक सबसे ज्यादा घुसपैठ की घटनाएं मानसून के समय होती हैं, जब नदियां उफान पर होती हैं, धारा बदल देती हैं और बाड़ के नीचे पानी भर जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक बॉर्डर पर कई दलाल भी सक्रिय हैं जो लोगों को सीमा पार कराते हैं और पैसे लेकर उन्हें जाली दस्तावेज बनवाते हैं. हाल ही में कूचबिहार में बीएसएफ ने एक ऑपरेशन में सात बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया था, जिसमें साथ एक भारतीय दलाल भी पकड़ा गया था। बॉर्डर से सटे गांव भी इसका कारण है, बांग्लादेशी घुसपैठिए सीमा पार कर इन गांवों में छिप जाते हैं और फिर जाली दस्तावेजों की मदद से आसानी से भीड़ में घुल मिल जाते हैं। यह आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र तक हासिल कर लेते हैं।भाषा एक होने की वजह से इससे इनकी पहचान मुश्किल हो जाती है। बॉर्डर पर घुसपैठियों ने सुरंग ओर बंकर भी बना रखे हैं। हाल ही में बीएसएफ को पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा क्षेत्र में 80 फुट लंबी सुरंग मिली थी। इसे सीमा पर पशु तस्करी के लिए बनाया गया था। इसके अलावा 15 फुट गहरे ईंट की दीवारों वाले बंकर भी मिले हैं, जिनमें हजारों फेंसेडिल की बोतलें छुपाई गईं थींबॉर्डर पर सिर्फ घुसपैठ ही नहीं होती, बल्कि नशे का अवैध व्यापार, मानव तस्करी, नकली मुद्रा और पशु तस्करी भी होती है। गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 2024 में इस सीमा पर सीमा पार अपराधों से जुड़ी 32.46 लाख घटनाएँ दर्ज की गईं थीं। अगर सिर्फ घुसपैठ की बात करें तो पिछले साल तकरीबन 1200 मामले पकड़ में आए।हाईटेक सुरक्षा : हाल ही में 22 मई को बीएसएफ के संस्थापक निदेशक KF रुस्तमजी की स्मृति में आयोजित व्याख्यान में गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ी घोषणा की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाओं पर हाई-टेक कैमरे, रडार, सेंसर, निगरानी उपकरण और रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म के साथ उन्नत बुनियादी ढाँचा तैयार किया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य इसी वर्ष दोनों सीमाओं पर बड़े पैमाने पर स्मार्ट फेंसिंग और इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम लागू करना है।मेघालय में भी अलर्ट: पश्चिम बंगाल ही नहीं मेघालय की भी 443 किमीलंबी सीमा में बॉर्डर के 49 किमी हिस्से पर अभी फेंसिंग नहीं है. BSF के मेघालय फ्रंटियर के IG ने कहा है कि 2026 तक पूरी सीमा को सील करने की कोशिश है. बांग्लादेश में कट्टरवाद के उभार के चलते BSF हाई अलर्ट पर है।
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