- स्वतंत्रता सेनानियों- सतीश सामंतो, सुशील धारा और अजय मुखर्जी से प्रेरित हो लिया अविवाहित रहने का फैसला
बंगाल की सियासत में यह सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक दौर के अंत और नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। आज जब वे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, तो सिर्फ उनका राजनीतिक सफर ही चर्चा में नहीं है, बल्कि उनका निजी जीवन भी लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बना है।लोग जानना चाहते हैं कि सुवेंदु के परिवार में उनके अलावा और कौन-कौन हैं और वो क्या करते हैं?
सुवेंदु ने विवाह नहीं किया, वो अविवाहित हैं। उन्होंने इसके बारे में खुद बताया था कि उन्होंने विवाह क्यों नहीं किया। राजनीतिक परिवार से आने वाले सुवेंदु के पिता शिशिर अधिकारी भी बंगाल की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं। परिवार का पूर्वी मिदनापुर में लंबे समय से मजबूत प्रभाव रहा है, जिसने सुवेंदु की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत बनाया। बीते दो चुनावों में सुवेंदु अधिकारी ने जिस तरह से ममता बनर्जी को शिकस्त दी है उससे उनकी रणनीति, संगठन पर पकड़ और आक्रामक प्रचार का पता चलता है। सुवेंदु ने बीजेपी को बंगाल में मजबूत आधार दिलाया. यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में उन्हें अब 'जॉयंट किलर' का नया नाम दे दिया गया है।
खुले मंच से सुवेंदु ने बताई थी अविवाहित रहने की वजह
पश्चिम बंगाल की राजनीति में अक्सर अपने आक्रामक तेवरों और तीखे बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले सुवेंदु अधिकारी की निजी जिंदगी भी लोगों के बीच हमेशा जिज्ञासा का विषय रही है। खासकर एक सवाल बार-बार पूछा जाता है कि आखिर 55 साल की उम्र तक उन्होंने शादी क्यों नहीं की? इस सवाल का जवाब खुद सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि लोग अक्सर उनसे पूछते हैं कि उनके भाई शादीशुदा हैं, फिर उन्होंने विवाह क्यों नहीं किया। इस पर उन्होंने कहा, 'कई लोग पूछते हैं, सुवेंदु, तुम अविवाहित क्यों हो? तुम्हारे भाई तो विवाहित हैं। मैं उनसे कहता हूं कि आज के दौर की राजनीति में मैं खुद को अविवाहित नहीं मानता।
इन तीन फ्रीडम फाइटर्स से प्रेरित होकर लिया निर्णय
सुवेंदु अधिकारी ने बताया था कि उनका जुड़ाव छात्र राजनीति से 1987 में ही हो गया था। धीरे-धीरे राजनीति उनके जीवन का केंद्र बनती चली गई और फिर उन्होंने खुद को पूरी तरह सार्वजनिक जीवन के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने इलाके के तीन बड़े स्वतंत्रता सेनानियों- सतीश सामंतो, सुशील धारा और अजय मुखर्जी का खास तौर पर जिक्र किया. सुवेंदु के मुताबिक, इन तीनों नेताओं का जीवन उन्हें हमेशा प्रेरित करता रहा है।उन्होंने बताया कि ये तीनों स्वतंत्रता सेनानी अविवाहित रहे और अपना पूरा जीवन समाज और देश की सेवा में लगा दिया। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उन्हीं से प्रेरणा लेकर उन्होंने भी अविवाहित रहकर राजनीति और जनता की सेवा का रास्ता चुना। उनके शब्दों में, मैं 'इन तीनों को फॉलो करते हुए अनमैरिड रहकर काम कर रहा हूं। इस बयान के जरिए सुवेंदु ने यह दिखाने की कोशिश की कि उनकी राजनीति सिर्फ सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इसे एक मिशन और जनसेवा के रूप में देखते हैं।
पूरे बंगाली समाज को बताया अपना परिवार: उन्होंने आगे कहा कि उनका परिवार सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा बंगाली समाज ही उनका परिवार है। सुवेंदु के मुताबिक, समाज और जनता की सेवा के लिए कई व्यक्तिगत इच्छाओं और सुखों का त्याग करना पड़ता है।अपने राजनीतिक और वैचारिक प्रेरणास्रोतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी सतीश सामंता तथा सुशील धारा हमेशा समाज के लिए समर्पण की बात करते थे
उन्हीं के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने जीवनभर अविवाहित रहने का फैसला लिया सुवेंदु अधिकारी का यह बयान उस समय काफी चर्चा में रहा था।
कभी ममता के सबसे भरोसेमंद नेता हुआ करते थे सुवेंदु
नंदीग्राम से अपनी पहचान बनाने वाले सुवेंदु कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। लेकिन टीएमसी छोड़कर बीजेपी में आने के बाद उन्होंने खुद को बंगाल में पार्टी के सबसे बड़े चेहरे के रूप में स्थापित कर लिया।खास बात यह रही कि उन्होंने सिर्फ विपक्ष की राजनीति नहीं की, बल्कि ममता सरकार के खिलाफ जमीन पर लगातार माहौल भी बनाया. अपने शांत लेकिन आक्रामक राजनीतिक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले सुवेंदु अधिकारी ने हमेशा खुद को जमीनी नेता के तौर पर पेश किया. चाहे किसान आंदोलन हो, नंदीग्राम का संघर्ष या फिर बंगाल में बीजेपी का विस्तार, हर दौर में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. अब सबकी नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सुवेंदु अधिकारी बंगाल की राजनीति और प्रशासन को किस दिशा में ले जाते हैं. बीजेपी इसे 'नए बंगाल' की शुरुआत बता रही है, जबकि विपक्ष के लिए यह आने वाले दिनों की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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