अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने रविवार (24 मई) को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने केंद्र को राज्य आतंकवाद करार दिया। उन्होंने कहा कि वह संविधान की रक्षा के लिए अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी और किसी भी प्रकार की दमनकारी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगी। फेसबुक लाइव के जरिए सीधे जनता से मुखातिब होते हुए ममता बनर्जी ने इस हार को अपनी स्वाभाविक शिकस्त मानने के बजाय एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक साजिश करार दिया है. उन्होंने सूबे के नए भाजपा मुख्यमंत्री और अपने पूर्व सहयोगी सुवेंदु अधिकारी पर 'जबरन हराने' का सीधा आरोप लगाते हुए इस चुनावी परिणाम के खिलाफ अदालत में लंबी जंग लड़ने का खुला ऐलान कर दिया है।
भवानीपुर की हार पर दीदी का बड़ा कानूनी दांव: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट के चुनावी नतीजों को आसानी से छोड़ने वाली नहीं हैं. साल 2011 से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली दीदी ने कहा कि उन्हें हराने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया गया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह बहुत जल्द इस पूरे मामले और वोटों की गिनती में हुई हेरफेर को लेकर देश की न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाएंगी, ताकि लोकतंत्र के साथ हुआ यह खिलवाड़ सबके सामने आ सके।
शुभेंदु अधिकारी पर लगा जबरन हराने का गंभीर आरोप:
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार बनाने वाले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर बेहद तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि भवानीपुर में कोई निष्पक्ष चुनाव नहीं हुआ, बल्कि उन्हें सोची-समझी रणनीति के तहत जबरन हराया गया है। दीदी ने सीधे शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देते हुए कहा, "अगर आपके भीतर जरा भी सच्चाई और हिम्मत बची है, तो सामने आइए। हम अदालत में इस पर बात करेंगे. जनता का वोट हमारा था, लेकिन नतीजों को जबरन बदल दिया गया। ईवीएम मशीनों के फॉरेंसिक टेस्ट की खुली चुनौती
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम मशीनों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि वह सिर्फ कोर्ट नहीं जा रही हैं, बल्कि अदालत से मांग करेंगी कि भवानीपुर सीट पर इस्तेमाल हुई सभी ईवीएम मशीनों का फॉरेंसिक टेस्ट कराया जाए. उन्होंने कहा कि मशीनों के साथ जो भी छेड़छाड़ की गई है, वह फॉरेंसिक जांच में पूरी तरह बेनकाब हो जाएगी और भाजपा का असली चेहरा देश की जनता के सामने आ जाएगा।
चुनाव आयोग के दिल्ली दफ्तर से साजिश का दावा
ममता बनर्जी के निशाने पर सिर्फ राज्य के नेता ही नहीं, बल्कि केंद्रीय चुनाव आयोग भी रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि भवानीपुर में जो भी रिगिंग और चुनावी धांधली हुई, उसका पूरा ताना-बाना सीधे चुनाव आयोग के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से बुना गया था. दीदी ने आरोप लगाया कि दिल्ली के बड़े अफसरों और भाजपा के रणनीतिकारों ने मिलकर स्थानीय स्तर पर नतीजों को प्रभावित किया, जिसे वह अदालत में सबूतों के साथ साबित करेंगी।
काउंटिंग सेंटर्स से टीएमसी एजेंटों को बाहर खदेड़ा
वोटों की गिनती के दिन का जिक्र करते हुए टीएमसी प्रमुख ने कहा कि उनके पोलिंग और काउंटिंग एजेंटों के साथ मतगणना केंद्रों के भीतर बेहद बुरा बर्ताव किया गया. उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के कई एजेंटों को तो काउंटिंग रूम में बैठने तक नहीं दिया गया और उन्हें जबरन बाहर निकाल दिया गया. ममता बनर्जी के मुताबिक, जब उनके अपने लोग वहां मौजूद ही नहीं थे, तब बंद कमरों में वोटों के आंकड़ों के साथ जमकर खिलवाड़ किया गया.
वर्दी में भाजपा कार्यकर्ताओं के होने का सनसनीखेज आरोप
ममता बनर्जी ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर उंगली उठाई. उन्होंने फेसबुक लाइव में कहा कि चुनाव और काउंटिंग के दौरान जो लोग सीआरपीएफ (CRPF) की वर्दी पहनकर सुरक्षा का जिम्मा संभाले हुए थे, उनमें से कई लोग असल में सुरक्षाकर्मी थे ही नहीं. दीदी ने दावा किया कि भाजपा के आईटी सेल के लोग डेटा सेंटर के अंदर अवैध रूप से जमे हुए थे और सीआरपीएफ की वर्दी में असल में भाजपा के अपने कार्यकर्ता और बाहरी गुंडे घूम रहे थे, जिन्होंने पूरी चुनावी प्रक्रिया को हाईजैक कर लिया।
विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के साथ जून में महामंथन
अपनी इस सियासी और कानूनी लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का संकेत देते हुए ममता बनर्जी ने विपक्ष की एकजुटता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि देश में चल रही इस तानाशाही के खिलाफ वह चुप नहीं बैठेंगी. दीदी ने एलान किया कि आगामी जून महीने में विपक्षी दलों के 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक की एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है. इस बैठक में सभी सहयोगी दल एक साथ बैठेंगे और भाजपा की इस मनमानी तथा सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के खिलाफ एक साझा और बेहद आक्रामक राष्ट्रीय रणनीति तैयार करेंगे।
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