- जमियत उलेमा-ए-हिन्द के राज्य अध्यक्ष हुए नाराज, कहा नमाज पर रोक ठीक नहीं
- एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार सुरक्षा कारणों से नमाज पर लगी है रोक
अशोक झा/ कोलकाता:
बंगाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के परिसर में स्थित 130 साल से ज्यादा पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद में मरम्मत कार्य की वजह से शनिवार (11 जुलाई, 2026) से लेकर अगले तीन दिनों के लिए नमाज अदा करने पर रोक लगा दी गई है। यह मस्जिद एयरपोर्ट के रनवे-2 से बस कुछ ही सौ मीटर की दूरी पर स्थित है, जिसे बांकड़ा मस्जिद के नाम से जाना जाता है। संबंधित अधिकारी ने बताया कि अगले दो से तीन दिनों तक मस्जिद में निर्माण कार्य चलेगा। इस वजह से वहां नमाज के लिए लोगों के आने पर रोक लगाई गई है।
एयरपोर्ट परिसर में मस्जिद होने को लेकर BJP विधायक ने जताई चिंता: बातचीत में राजधानी कोलकाता के दमदम उत्तर से बीजेपी के विधायक सौरव सिकदर ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एयरपोर्ट परिसर में मस्जिद होने की वजह से दोनों रनवे का पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है और तो और इससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी पैदा होती हैं। उन्होंने दावा किया कि नमाज के लिए आने वाले लोगों को एयरपोर्ट का पास या बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कराने की जरूरत नहीं होती। क्योंकि एयरपोर्ट एक बेहद सुरक्षित क्षेत्र होता है और यह मस्जिद सबसे उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र यानी लेवल-3 में स्थित है, ऐसे में वहां प्रवेश करने वाले हर शख्स के पास फोटो वाला बायोमेट्रिक पास होने बहुत जरूरी है।
सिकदर ने आगे कहा, 'इस एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे वीवीआईपी के अलावा हर महीने लाखों यात्रियों का आना-जाना होता है। मेरी पार्टी ने यह मुद्दा अधिकारियों के सामने उठाया है और दावा किया है कि मौजूदा व्यवस्था से सुरक्षा संबंधी खतरा हो सकता है।
जबकि दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा कि जब इस मुद्दे पर अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है, तो मस्जिद में नमाज पर रोक लगाने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा, 'यह मस्जिद 135 साल से अधिक पुरानी है और इस मुद्दे पर बातचीत जारी है। किसी भी सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए हम तैयार हैं. नमाज के लिए लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने की कोई जरूरत नहीं थी। दमदम के मध्य स्थित बाकड़ा मस्जिद का स्थानांतरण, टीएमसी सरकार में मंत्री रहे सिद्दीकुल्लाह चौधुरी ने शांति बनाए रखने की अपील की है। रविवार को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्थित दमदम एयरपोर्ट अथॉरिटी के मध्य स्थित बाकड़ा मस्जिद को स्थानांतरण करने की बात सामने आते ही सक्रिय हुआ जमियत उलेमा-ए-हिन्द नामक अल्पसंख्यक संगठन सक्रिय हो गई है। जमियत उलेमा-ए-हिन्द के राज्य अध्यक्ष एवं पश्चिम बंगाल के तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार में ग्रंथागार मंत्री रहे सिद्दीकुल्लाह चौधुरी ने एक ओर जहां दमदम एयरपोर्ट ऑथोरिटी पर बाकड़ा मस्जिद में नमाज बंद करने का आरोप लगाया। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम सम्प्रदाय के लोगों को भी शांति बनाए रखने एवं सड़क पर न उतरने की अपील की। सिद्दीकुल्लाह चौधुरी का कहना है कि 130 साल पुराने इस गौरीपुर जमा मस्जिद में हम सदियों से नमाज अदा करते आ रहे है, परन्तु एयरपोर्ट अथॉरिटी अचानक एयरपोर्ट के अंदर स्थित मस्जिद जाने के रास्ते को बंद कर दिया। सिद्दीकुल्लाह चौधुरी ने कहा कि इस तरह न तो मस्जिद हटाए जाता है और न ही मस्जिद में नमाज अदा करने पर रोक लगाया जाता है। कुछ भी करने से पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी को हमसे बातचीत करनी चाहिए थी। हमें सूचना देने चाहिए थी। परन्तु बिना किसी पूर्व सूचना के मुस्लिम सम्प्रदाय के लोगों में प्रतिक्रिया उत्पन्न होना स्वाभाविक है। सिद्दीकुल्लाह चौधुरी ने कहा कि हम एयरपोर्ट अथाॅरिटी से दुआं करेंगे कि वह गेट खोल दे और आलोचना के रास्ते पर आए। यह मस्जिद 1962 साल की है। अगर जोरकर मस्जिद लेंगे तो ले लेंगे किन्तु आवाम कहेगी नरेंद्र मोदी की सरकार और राज्य में शुभेंदु अधिकारी की सरकार मस्जिद तोड़ी है। ऐसा उन्होंने किया है यह मैं ऐसा नहीं कह सकता। इस बारे में सिद्दीकुल्लाह चौधुरी ने जिलाशासक, गवर्नर को पत्र भी दिया है। वहीं दूसरी ओर एयरपोर्ट अथॉरिटी का कहना है कि सुरक्षा कारणों एवं रन-वे के विस्तार में आ रही बाधाओं को देखते हुए मस्जिद में प्रवेश के लिए दिए जाने वाले पास को रद्द कर दिया गया है और नमाज पढ़ने पर भी रोक लगा दी गयी है। मस्जिद के लिए विकल्प जगह पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। मस्जिद स्थानांतरण के साथ बड़ी मस्जिद बनाने का प्रस्ताव भी रखा है।यह छोटी सी मस्जिद एयरपोर्ट के दूसरे (सेकेंडरी) रनवे से सिर्फ 165 मीटर उत्तर में और एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल से सिर्फ 150 मीटर अंदर है। जबकि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, रनवे और किसी भी इमारत के बीच कम से कम 240 मीटर की दूरी होनी चाहिए। यहां इस नियम का साफ तौर पर उल्लंघन हो रहा है।पहले भी केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने मस्जिद को शिफ्ट करने की कई कोशिशें की थीं। लेकिन तब की ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य (CPM) और ममता बनर्जी (TMC) की सरकारों ने राजनीतिक वजहों से इन कोशिशों को खारिज कर दिया था। हालांकि, सोर्स स्टोरी के मुताबिक, अब केंद्र और पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार होने और मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस मामले में दिलचस्पी दिखाने से अधिकारी इस बार मस्जिद के शिफ्ट होने को लेकर काफी उम्मीद में हैं। शुभेंदु अधिकारी ने हाल के दिनों में एयरपोर्ट की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए मस्जिद को तुरंत हटाने की बात कही है।
बड़े विमान नहीं उतर पाते; इमरजेंसी लैंडिंग में भी मुश्किल!: मस्जिद ठीक उस रास्ते (एप्रोच पाथ) के बीच में है, जहां से विमान लैंड करते हैं। सुरक्षा के लिए सेकेंडरी रनवे के टचडाउन पॉइंट (जहां विमान का पहिया सबसे पहले जमीन छूता है) को 88 मीटर आगे खिसका दिया गया है। इस वजह से रनवे की कुल लंबाई घटकर सिर्फ 2,832 मीटर रह गई है। यह लंबाई एयरबस A320 और बोइंग 737 जैसे छोटे विमानों के लिए तो काफी है। लेकिन, बोइंग 787 (B787) और एयरबस A330 (A330) जैसे बड़े यानी वाइड-बॉडी विमानों के ऑपरेशन के लिए यह रनवे छोटा पड़ जाता है। इमरजेंसी लैंडिंग के वक्त यह मस्जिद एक बड़ा खतरा बन जाती है।
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