असम दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी डिब्रूगढ़ के चाय बागान में जाकर वहां काम करने वाली महिलाओं से बातचीत करना उनके लिए बेहद यादगार अनुभव रहा। पीएम ने यह भी बताया कि चाय की पत्तियां तोड़ने के बाद महिलाओं ने अपनी संस्कृति और परंपराओं के बारे में उनसे चर्चा की। उन्होंने चाय बागान से जुड़े परिवारों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि इन्हीं लोगों की बदौलत असम की प्रतिष्ठा देश-दुनिया में और मजबूत हुई है। इस दौरान पीएम ने चाय बागान में काम कर रहीं महिला कामगारों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ीं, उनसे बातचीत की, सेल्फी खिंचवाई और असम की चाय के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला. वह कल रात डिब्रूगढ़ पहुंचे। पीएम मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए, चाय को 'असम की आत्मा' बताया और कहा कि राज्य की चाय ने पूरी दुनिया में अपनी अलग और खास पहचान बनाई है।अपने इस दौरे को 'यादगार अनुभव' बताते हुए, पीएम मोदी ने कामगारों के साथ बातचीत की, जिनमें से कई लोग चाय उद्योग की रीढ़ हैं. पीएम ने चाय उद्योग से जुड़े उनके योगदान की सराहना भी की।
बागान से जुड़े परिवार की कोशिशों पर गर्वः PM मोदी
अपने एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, 'हमें चाय बागान के हर एक परिवार की कोशिशों पर बहुत ही गर्व है. उनकी कड़ी मेहनत और लगन ने असम का मान बढ़ाया है.' इस दौरे की कई तस्वीरों को साझा करते हुए PM मोदी ने कहा, 'चाय की पत्तियां तोड़ने के बाद, महिलाओं ने अपनी संस्कृति के बारे में बात की और, फिर सेल्फी भी ली। PM मोदी असम में अपनी चुनावी रैलियों को संबोधित करने के इतर चाय बागान का दौरा किया. वह आज ही कई चुनावी रैली को संबोधित करने वाले हैं।
चाय बागान के कामगारों के साथ पीएम मोदी की यह बातचीत चाय के साथ उनके लंबे समय से चले आ रहे निजी जुड़ाव को भी दर्शाती है. PM अक्सर अपने शुरुआती जीवन में संघर्ष के दौर के बारे में बात करते रहे हैं कि वे गुजरात के एक रेलवे स्टेशन पर अपने पिता के साथ चाय बेचा करते थे. शुरुआती संघर्ष से आगे बढ़ते हुए मोदी देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में कामयाब रहे।सबसे बड़े चाय उत्पादक क्षेत्रों में से एक असम : असम, दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक क्षेत्रों में से एक गिना जाता है. भारत के चाय निर्यात के मामले में असम अहम भूमिका निभाता है. इस उद्योग में लाखों कामगारों को रोजगार मिला हुआ है; डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और जोरहाट जैसे जिलों के चाय बागानों में काम करने वालों में महिलाओं की संख्या काफी अधिक है।PM मोदी का चाय बागान जाना और वहां की कामगार महिलाओं से मिलना, प्रतीकात्मक और रणनीतिक, दोनों ही नजरिए से देखा जा रहा है। यह दौरा असम के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में चाय समुदाय के महत्व को रेखांकित भी करता है. माना जा रहा है कि चाय बागान के कामगारों से मुलाकात इस उद्योग से जुड़े लाखों वोटर्स के एक बड़े वर्ग को प्रभावित कर सकती है। ( असम से अशोक झा की रिपोर्ट )
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