सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल और सीमांत क्षेत्रों में हनुमान जयंती बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।आज शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी जबकि कल जगह जगह रामदूत हनुमान की पूजा अर्चना की जाएगी। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस अवसर पर भक्त हनुमान जी की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं, मंदिरों और घरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित भी कराए जाते हैं। इस दिन भक्ति-संगीत तथा कीर्तन का आयोजन किया जाता है। इस दिन लोग व्रत रखने, हनुमान चालीसा का पाठ करने और उनकी कथा सुनने का भी विशेष महत्व है।
हनुमान जी को कलियुग का जागृत देवता कहा जाता है क्योंकि वे आज भी जीवित हैं। धर्म-शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी को अमरता का वरदान मिला था और वे आज भी धरती पर निवास करते हैं। भगवान शिव के अवतार हनुमान को चिरंजीवी कहा जाता है। वे हर युग में धरती पर रहते हैं। कलियुग में तो हनुमान जी की पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी गई है क्योंकि उनकी आराधना करने से शीघ्र फल मिलता है। माना जाता है कि बजरंगली की पूजा-अर्चना करने वाले भक्त की मदद करने के लिए वे दौड़े चले आते हैं और सारे संकट दूर करते हैं। जानिए आखिर धरती का वो गुप्त स्थान कौन-सा है और कहां हैं, जहां हनुमान जी वास करते हैं। वैदिक ज्योतिष सप्ताह में 7 दिन होते हैं और हर दिन पर किसी न किसी ग्रह और देवता का आधिपत्य होता है। जैसे शनिवार का संबंध शनि देव से माना जाता है। वहीं यहां हम बात करने जा रहे हैं मंगलवार के बारे में, जिसका संबंध मंगल ग्रह और हनुमान जी से माना जाता है। इसलिए मंगलवार को हनुमान जी की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है। यहां हम आपको ऐसे स्त्रोत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका पाठ करने से हनुमान जी की कृपा आप पर बरस सकती है। साथ ही भय और शत्रुओं पर विजय मिलती है। हनुमान जी शक्ति, भक्ति, ज्ञान और निस्वार्थ सेवा के सर्वोच्च प्रतीक हैं। वे भगवान शिव के अंशावतार, अष्ट सिद्धि और नवनिधि के दाता, तथा श्री राम के अनन्य भक्त हैं। उनकी प्रमुख विशेषताओं में अपार बल (पर्वताकार), बुद्धि, विनम्रता, ब्रह्मचर्य और संकटमोचन (कष्ट दूर करने वाला) रूप शामिल है, जो उन्हें चिरंजीवी और संकटों से रक्षा करने वाला बनाता है।
हनुमान जी की प्रमुख विशेषताएं : अनन्य भक्त और सेवक: हनुमान जी रामचरितमानस में राम के प्रति अटूट निष्ठा और समर्पण के प्रतीक हैं। उन्होंने निस्वार्थ भाव से राम काज किया और कभी अपने पराक्रम का अहंकार नहीं किया।
अतुलनीय बल और पराक्रम: उन्हें 'महाबली' कहा जाता है। उन्होंने लंका दहन किया, समुद्र लांघा और संजीवनी बूटी के लिए पर्वत उठा लाए। वे असुरों का संहार करने वाले और निर्भीक योद्धा हैं। बुद्धिमान और ज्ञानी: वे न केवल शारीरिक रूप से मजबूत हैं, बल्कि अत्यंत बुद्धिमान और चतुर भी हैं। उन्हें नीतिशास्त्र, व्याकरण और वेदों का ज्ञान था।
विनम्रता और निस्वार्थता: इतना शक्तिशाली होने के बावजूद, वे अत्यंत विनम्र हैं। लंका में सीता जी से मिलने के बाद, उन्होंने खुद को सिर्फ "राम का दूत" कहा, न कि वीर योद्धा।
संकटमोचन: हनुमान जी की पूजा जीवन के हर तरह के कष्टों, डर और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए की जाती है। वे दुष्टों का नाश और भक्तों की रक्षा करते हैं।
पंचमुखी रूप: वे ज्ञान और शक्ति के प्रतीक के रूप में पांच मुखी (नरसिंह, गरुड़, अश्व, वानर, वराह) रूप में भी पूजे जाते हैं, जो सभी दिशाओं से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
अजर-अमर (चिरंजीवी): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वे अमर हैं और आज भी धरती पर सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं।
हनुमान जी का जीवन साहस, धैर्य, सेवा और समर्पण का संदेश देता है।
( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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