- राष्ट्रवाद की भावना का विकास नहीं होगा तब तक देश का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता
- इसको समझने के लिए राष्ट्र, राष्ट्र की सीमाएं, समस्याएं और कारणों को जानना जरूरी
चिकन नेक और घुसपैठ को समझने और समझाने की हिम्मत सीमांचल के राजनीतिक भीष्मपितामह भाई ताराचंद धानुका और उनके जदयू विधायक पुत्र गोपाल अग्रवाल ने दिखाई है। यह आने वाले दिनों में चिकन नेक में एक मिल का पत्थर साबित होगा। यह तब इतिहास बनेगा जब एक एक घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाएगा। चिकन नेक की फूल प्रूफ सुरक्षा सुदर्शन चक्र से किया जाएगा। जब तक हर व्यक्ति के दिल में राष्ट्रवाद की भावना का विकास नहीं होगा तब तक देश का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता है। भारत में सांस्कृतिक एकता होते हुए भी राजनीतिक एकता का अभाव है। आज अक्सर नेता सम्पूर्ण क्रांति की बातें करते है क्या आपको पता है जिसमे सात क्रांतियाँ शामिल हैं, राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति। अगर इसको लेकर कोई आवाज उठाता है तो वह सांप्रदायिक विरोधी तो कभी समाज विरोधी बन जाता है। कुछ ऐसा ही सीमांचल "चिकन नेक" के राजनीतिक पुरोधा कहे या सीमांचल के गांधी भाई ताराचंद और उनके जदयू विधायक पुत्र गोपाल अग्रवाल के साथ हो रहा है। मेरी काफी लंबी पत्रकारिता का अनुभव तो यही बताता है कि भाई ताराचंद की जीवन की अमूल्य संग्रहित पुस्तक "चिकन नेक" और विधायक गोपाल अग्रवाल द्वारा विधानसभा में सरकारी जमीन पर अवैध घुसपैठ के मामले को उठाया । पुस्तक और मामले को उठाने के बाद उसके और उनके परिवार पर लगातार आरोपों के हमले हो रहे है। यह हमला वह कर रहा है जिन्हें इस सरजमीं या भारत माता से कभी प्यार ना हो? यह वह लोग है जो देश का खाकर विदेश का गुणगान करते है। अपने क्षेत्र को अशांत कर पड़ोसी मुल्क से गुहार लगाकर धन संग्रह करते है। ऐसे लोगों को समर्थन देने वाले की चल अचल संपत्ति की गहराई से जांच होनी चाहिए। क्यों कि ऐसे लोग वतन परस्त नहीं बल्कि फिरकापरस्त हो सकते है। ऐसे लोगों के लिए इतना ही कहना है कि सच कहना अगर बगावत है तो समझ लो हम भी बागी है। कुछ ऐसा ही जज्बा सुरजापुरी के राजनीतिक पुरोधा भाई ताराचंद और उनके परिवार का है।चलिए मुझे इन बातों में नहीं उलझना है। हमे नहीं भूलना चाहिए 1990 में कश्मीर में क्या हुआ था। वह भी भारतीय थे लेकिन वतन परस्त नहीं होने के कारण अपने ही भाई मानने वाले कश्मीरी पंडितों के साथ क्या क्या नहीं किया। इसे पढ़ने वाले ज्यादातर लोग जरूर ही होशो हवास में होंगे। नहीं तो इसको जाने और समझे!
आप सब सीधी भाषा में इसे समझे :आज सीमांचल के चिकनेक और घुसपैठ को लेकर चिंता की जा रही है आखिर क्यों? ऐसे समझे कि आपके पिता के पास 6 बीघा जमीन है आप दो भाई है। जमीन का हिस्सा बांटने पर दोनों के हिस्से में तीन तीन बीघा आयेगा।लेकिन अगर आपके पैतृक संपत्ति पर कोई गैर आधे पर कब्जा कर लिया तो आपने हिस्से में कितना आयेगा। पहले से आधा जी हां। कुछ यही स्थिति है अवैध घुसपैठ की। आपको मालूम है कि सीमांचल चिकननेक में प्रतिदिन 6 लाख से अधिक रोजी रोजगार पर घुसपैठिए डाका डाल रहे है। 60 लाख परिवार आपके हिस्से का राशन भी ढकार लेते है। इससे भी ज्यादा चिंता की बात है कि घुसपैठ आज राष्ट्र के सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई है।
भारत की मुख्यभूमि को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाली जीवनरेखा है "चिकन नेक" : चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर... यह वह इलाका है जो केवल 60 किलोमीटर लंबा और लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा है। लेकिन इसके साथ जुड़ी है वह नस, जिसे भारत की मुख्यभूमि को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाली जीवनरेखा यानि लाइफ लाइन कहा जाता है। इस क्षेत्र पर सबकी नजर इसलिए रहती है, क्योंकि माना जाता है कि यदि इस दुखती रग पर किसी ने दबाव डाल दिया, तो भारत को गंभीर परेशानी हो सकती है। यह सीमांचल का "चिकन नेक"गलियारा एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग है। इसके साथ ही दक्षिण पूर्व एशिया का एक मुख्य प्रवेश द्वार भी है। यह गलियारा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय, पारगमन और व्यापार के लिए बेहद खास है।।इस गलियारे से 10 लाख वाहन डेली आते-जाते हैं।इस रास्ते सें ट्रक, बस, एसयूवी, निजी कार, दोपहिया वाहनों का आवागमन होता है। हरेक दिन इस गलियारे से 2,400 मीट्रिक टन माल का परिवहन होता है। इस परिवहन मार्ग से 142 करोड़ का राजस्व मिलता है। यहां से कई तेल और गैस पाइपलाइनें और बिजली ग्रिड गुजरते हैं। असम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश से 95 फीसदी निर्यात इसी सड़क मार्ग के गलियारे से ही होता है। बाकी 5 फीसदी रेल पर निर्भर करता है। अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से, यह गलियारा पूर्वोत्तर राज्यों और बाकी भारत के व्यापार के लिए बेहद खास है। यहां यहां यही एकमात्र रेलवे माल ढुलाई लाइन भी रखता है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास सड़क मार्ग और रेलमार्ग सिलीगुड़ी गलियारे से जुड़े हुए हैं।
भू-राजनीतिक चुनौती: यह इलाका चीन, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल से घिरा है, जो इसे भारत के लिए सुरक्षात्मक रूप से 'अति संवेदनशील' बनाता है।सैन्य सुरक्षा: भारत सरकार ने इस गलियारे को सुरक्षित करने के लिए यहाँ राफेल लड़ाकू विमान, एस-400 मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात की गई हैं। वैकल्पिक मार्ग: सरकार इस क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए बांग्लादेश के माध्यम से जलमार्ग और म्यांमार के रास्ते वैकल्पिक रास्तों को मजबूत कर रही है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा, "यह रेलवे लाइन उत्तर दिनाजपुर ज़िले के तीन माइल हाट से शुरू होगी और सिलीगुड़ी के क़रीब स्थित रंगापानी होकर बागडोगरा तक जाएगी। कुल 35.76 किलोमीटर लंबी इस भूमिगत रेलवे लाइन के लिए दो अलग-अलग सुरंगें बनाई जाएंगी। यहां इस बात का ज़िक्र प्रासंगिक है कि भारतीय सेना बांग्लादेश सीमा के पास जिन तीन इलाक़ों में नया सैन्य बेस बना रही है, प्रस्तावित लाइन उनमें से दो इलाक़ों के काफ़ी क़रीब से होकर गुजरेगी। इनमें से एक है बिहार का किशनगंज और दूसरा पश्चिम बंगाल का चोपड़ा. तीसरा सैन्य बेस असम के धुबड़ी में बन रहा है। ( नार्थ ईस्ट से अशोक झा की रिपोर्ट )
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