बिहार बंगाल नेपाल सीमांत यानि चिकननेक। इसे अवैध धंधेबाज , घुसपैठियों और तस्करों का स्वर्ग कहा जाता है। इसकी सुरक्षा को लेकर केंद्र से लेकर राज्य तक माथामारी करते देखा गया। खुद गृहमंत्री अमित शाह ने तीन दिनों तक हाई लेवल मीटिंग की। पर कहावत है कि सैया भई कोतबाल अब डर काहे का। इसी कहावत को चरितार्थ किया है सस्पेंड चर्चित SDPO गौतम कुमार ने। सिस्टम को दीमक की तरह चाटकर 80 करोड़ से अधिक की संपत्ति अर्जित कर अय्याशी के खेल में जुटे इसके कर राजदार है। इनकी काली कमाई का तो धीरे धीरे उजागर हो रहा है पर इसे कितने गौतम कुमार सीमांचल के सिस्टम को चाट रहे है इसकी जानकारी सरकार की है या नहीं?
केंद्रीय एजेंसियों को राज्य सरकार के साथ मिलकर सभी विभागों के अधिकारियों की चल अचल संपत्ति की जांच करनी होगी। आखिर क्या कारण है कि फटेहाल अवस्था में सीमांचल में आने वाले अधिकारी कुछ ही दिनों में धन्नासेठ बन जाते है। इनसे जुड़े अवैध कारोबारियों पर भी शिकंजा कसना चाहिए।
गौतम कुमार का अबतक का सच: 2005 का वह दौर जब सस्पेंड चर्चित SDPO गौतम कुमार पूर्णिया के सहायक खजांची थाने के थानाध्यक्ष थे. तभी शहर के प्रसिद्ध कपड़ा व्यवसाई के बेटे मुदित का अपहरण हो गया था। गौतम कुमार के थाना क्षेत्र से हुए अपहरण के बाद तत्कालीन SP सुधांशु कुमार ने मुदित की सकुशल बरामदगी का जिम्मा गौतम कुमार को सौंपा. गौतम कुमार ने सदर थानाध्यक्ष अरविंद कुमार, कसबा थानाध्यक्ष राजकुमार तिवारी और STF प्रभारी सिंधु शेखर सिंह को साथ लेकर एक टीम बनाई और महज 9 दिन में मुदित को सकुशल बरामद कर लिया. इस दौरान पुलिस और अपहरणकर्ताओं के बीच लुका छुपी के खेल में 6 आरोपियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया.
‘गैलेंट्री अवार्ड’ तक पा चुके गौतम कुमार: इस घटना के बाद गौतम कुमार का खौफ सीमांचल में अपराधियों के बीच छा गया. इस काम के लिए उन्हें ‘गैलेंट्री अवार्ड’ से सम्मानित किया गया. फिर बाद में उन्हें प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर बनाया गया. इस दौरान अररिया, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज जिले में उनकी तैनाती रही. अपने खौफ का फायदा गौतम ने पैसे कमाने में किया. उसी समय पूर्णिया में ‘टाइगर मोबाइल दस्ता’ का गठन हुआ. टाइगर मोबाइल दस्ते में तैनाती होने के साथ ही गलत तरीके से पैसे कमाने का भी चस्का उन्हें लग गया।
अपराध को खत्म करने के लिए बने टाइगर मोबाइल दस्ते में काम कम ज्यादातर गौतम व्यवसाइयों के गोदाम तक पहुंच जाते थे। यही वजह रही कि पूर्णिया में तैनाती के समय कई बार सस्पेंड हो चुके थे। वहीं बिहार का किशनगंज का इलाका इंट्री माफिया के लिए बदनाम रहा। किशनगंज में मोबाइल दस्ते में तैनाती होते ही पहले गौतम कुमार ने इंट्री माफियाओं के नाक में दम कर दिया. फिर धीरे-धीरे वे भी बहती गंगा में हाथ धोने लगे. एक होटल संचालक उनका सहयोगी बना।
होटल संचालक बना राजदार: इंट्री माफिया, अवैध बालू खनन, शराब, लकड़ी, पशु व कोयला तस्करी के पैसे या अन्य अवैध कमाई के पैसे गौतम कुमार इसी होटल संचालक के पास जमा करने लगे। किशनगंज के NH किनारे बने इस होटल में अक्सर गौतम कुमार की महिला मित्र ठहरती थी। करोड़ों की संपति गौतम कुमार ने अपने पत्नी, सास, साली, ससुर के नाम खरीदी।कुछ जमीन को अपने रिश्तेदार के नाम खरीदकर फिर अपने बेटे के नाम दान करवा ली, जिसमें पूर्णिया, मधुबनी स्थित रिश्तेदार ने अहम भूमिका निभाई।
इसके अलावा पूर्णिया के डगरुआ में पोस्टेड गौतम कुमार के शिक्षक साले ने डगरुआ में करोड़ों की जमीन खरीदवाई, जो गौतम कुमार ने अपनी गर्लफ्रैंड शगुफ्ता के नाम पर खरीदी। पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, पटना, गुरुग्राम और नोएडा में करोड़ों की जमीन और फ्लैट खरीदे। जब भारत-नेपाल सीमा के जोगबनी बॉर्डर पर गौतम कुमार की पोस्टिंग हुई तो वहां एक नेता का भाई इनका राजदार बना। बताया जाता है कि गौतम कुमार के कार्यकाल में जोगबनी बॉर्डर स्मगलिंग के लिए बदनाम रहा।
महिला मित्र तक को घर बनवाकर दिया:
नेपाल में भी गौतम की कई महिला मित्र रहीं, जिनको इन्होंने घर बनवाकर दिया. अक्सर यहां आते-जाते रहते थे। अपनी नौकरी के 25 वर्षों तक सीमांचल में रहने के दौरान गौतम कुमार ने रिश्तेदारों को भी करोड़पति बनवा दिया।।गौतम के पास इतना पैसा हो गया कि अब वह अपनी नौकरानी के नाम पर जमीन खरीदने लगे, जिसे बाद में अपने बेटों के नाम पर गिफ्ट करवाने का प्लान था। बेटे के लिए नौकरानी के नाम पर बुलेट और थार गाड़ी लेकर दी था। गौतम कुमार के 3 बेटे हैं। दूसरे बेटे को भी थार गिफ्ट की थी। यह गाड़ी किशनगंज के होटल संचालक के ड्राइवर प्रकाश रॉय के नाम पर रजिस्टर्ड है।
वहीं पूर्णिया स्थित उनकी कथित प्रेमिका पारो के घर पर EOU की DSP माधुरी के नेतृत्व में की गई छापेमारी में करीब 60 लाख रुपए की ज्वेलरी बरामद हुई थी। इसके अलावा, 7 जमीन के डीड और SDPO के नाम से जुड़े लेन-देन सहित ज्वेलरी के कागजात सहित अन्य अहम दस्तावेज बरामद किए गए। रिटारमेंट के बाद गौतम कुमार पूर्णिया स्थित हाउसिंग बोर्ड एरिया में ही रहने का प्लान बना रहे थे, जहां 4 मंजिला घर का निर्माण हो रहा था, जिसकी कीमत 4 करोड़ है।
बंगाल से नेपाल तक खाक छान रही EOU: वहीं जब गौतम कुमार प्रमोट होकर DSP बने तो एक बार फिर किशनगंज आ गए। पुरानी कमाई को किशनगंज में देख चुके गौतम कुमार फिर उसी रफ्तार से पैसे कमाने लगे. इस दौरान सिल्लीगुड़ी में सात माह पूर्व ही नार्थ बंगाल कॉलेज के पास चार करोड़ का एक बंगला खरीद दिया। इसके अलावा गंगटोक में एक होटल भी इनका है। सिलीगुड़ी के पास ही चाय बागान की तलाश EOU की टीम कर रही है। करीब 7 दिनों से टीम बंगाल से लेकर नेपाल तक खाक छान रही है।
गौतम की एक-एक प्रॉपर्टी का पता लगा रही EOU
अब तक 21 भूखंडों का पता EOU लगा चुकी है। पटना में EOU के सामने मिले भू-खंड के बारे में गौतम कुमार से लगातार पूछताछ चल रही है, जिसका वे जवाब नहीं दे रहे हैं। गौतम कुमार के पास 80 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति होने का अनुमान लगाया जा रहा। EOU थाने में गौतम कुमार के खिलाफ कांड संख्या 3/26 दर्ज हैं। इन पर आय से 61% अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।मगर, यह बात भी सही है कि गौतम कुमार जहां-जहां जिस भी थाने में गए, वहां क्राइम कम हुआ है। इसी डर को उन्होंने अपना हथियार बनाया और जमकर कमाई भी की। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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