- कहा दूध से घी बनाने का आ गया समय
-जरूरत है आप सभी को सचेतन बनने का
- संसाधनों से नहीं संस्कारों से चलती है दुनिया
बंगाल में चुनाव दस्तक दे रही है। इस बीच सिलीगुड़ी में सचेतन मंच द्वारा आहूत परिचर्चा में पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर बतौर मुख्य वक्ता संबोधित किया। मंच पर शहर के चिकित्सक अमिताभ मिश्रा, सुनील शाह, कमल पुगलिया मौजूद रहे। हितेश शंकर ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का ताला वोट-संख्या की चाबी से खुलता है। इसीलिए कुर्सी की दौड़ लगाती राजनीति जनता को खंड-खंड देखने लगती है ताकि लोगों को जात-पात, धर्म-संप्रदाय, भाषाई-क्षेत्रीय पहचान के आधार पर टुकड़ों में बांटकर उनके विशिष्ट हितों का औजार की तरह इस्तेमाल करके अपना उल्लू सीधा किया जा सके। लेकिन ऐसी सियासत से विभाजक रेखाएं गहराती हैं और देश-समाज के लिए खतरे पैदा हो जाते हैं। सीमा पार से आए घुसपैठियों को वोटबैंक' बना देना इसका सबसे खतरनाक उदाहरण है। उन्होंने समझाया कि अक्षर से शब्द बनते हैं, शब्दों से विचार, विचारों से विमर्श और विमर्श से समाज की व्यवस्था बनती है। यानी समाज की पूरी संरचना विचारों और संवाद पर आधारित होती है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम सही विचारों को अपनाएं और स्वस्थ विमर्श को आगे बढ़ाएं। आज बंगाल ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां परिवर्तन होना तय है। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि दूध से दही, फिर उसका मक्खन और फिर उससे घी निकलता है। अब घी बनाने का समय आ गया है। जरूरत है सचेतन होने का। आपको जाना कहा है लक्ष्य जरूर पता होना चाहिए। यह यात्रा मैराथन है।सनातन के भाषा में संस्कार है। रूसी में पंखा नहीं है। घी जैसा शब्द अंग्रेजी में नहीं है। परिवर्तन होगा। टीके रहना होगा तो परिवर्तन होगा। सृष्टि का नियम है। 1947 श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तुष्टिकरण होने से स्थिति बदल रही है।जो यह यह अतीत नहीं वर्तमान की बात है। संसाधनों से नहीं संस्कारों से दुनिया चलती है। बंगाल अति विपरीत स्थिति में है इसलिए जीत का मार्ग बताती है। मां माटी मानुष क्या है? बंगाल में मां के साथ राम की बात हो रही है। राम वही होता है जो पुरुषोत्तम बनता है। बंगाल उन मूल्यों की धरती है। 1950 में बंगाल से देश का 27 फीसदी हिस्सा विकास का भागीदारी था। आज यह घटकर मात्र 4 प्रतिशत हो गया है। 1955 में 70 फीसदी दवा देशभर में जाता था।अब इसकी संख्या 10 फीसदी रह गई है। नक्सलवाद और जंगल महल की अवधारणा थी अब राजकता पर अंतिम प्रहार आपको करना है। गुजरात ने विकास का मॉडल दिया बंगाल ने क्या मॉडल दिया है। कोलकोता हाथ रिक्शा मिल जाएगा। जो मानवता विकास पर गहरी चोट है।सिंगुर में उद्योग के नाम पर वामपंथी शासन को पलट दिया लेकिन वह आज सिंडिकेट राज्य का काम कर रहा है। सभ्यताओं संस्कृति से टकराव का नतीजा था फ्रांस खत्म हो रहा है। फ्रांस अफगानिस्तान हो रहा है। सभ्यताओं के संघर्ष को जानना जरूरी है। राज्य में घोटालों को सुपारी लेने का काम बंगाल ने लिया। शिक्षा तंत्र को खत्म कर दिया है। यह पीढ़ियों को गिराने का काम किया। 18 से 20 नहीं 30 हजार करोड़ का घोटाला जो जिससे 25 लाख मकान बन सकता है। पुरखो परंपराओं की जमीन को बचाना है। अधिकार के साथ कर्तव्य निभाने का समय आ हुई है। एक गलती से पांच साल बर्बाद होगा। संघीय व्यवस्था को बर्बाद करते है। सबको बता झुके कदम से यह लड़ाई लड़नी होगी।
उनके पहले स्वागत भाषण अमिताभ मिश्रा बंगाल की स्थिति, रामकृष परमहंस, साहित्य का पतन का कारण, रक्त रंजीत इतिहास को बताया। युवा प्रतिनिधि इंद्रनील बनर्जी ने प्रस्तावना में इस चुनाव को धर्मयुद्ध बताया। कहा कि बंगाल को पश्चिम बांग्लादेश बनाने की साजिश चल रही है। मेडिकल कॉलेज की युवती सुरक्षित नहीं, स्कूल कॉलेज , 8000 स्कूल कॉलेज बंद की स्थिति में है। मछली मांस को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। चिकित्सा व्यवस्था हावी है। बंगाल में राम को बाहरी बताया जा रहा है। कमल पुगलिया ने भी अपनी बातें रखी। सुशील रामपुरिया ने धन्यवाद देते हुए कहा कि आप सभी को आज की बातें उनलोगों तक लेकर जानी है जो यहां नहीं पहुंच पाए है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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