- अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट, बढ़ाई गई चौकसी
बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है।23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है।इसके तहत अलीपुर द्वार जिले के जयगांव स्थित भूटान गेट को सोमवार (20 अप्रैल) शाम से अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। वही नेपाल से सटे पानीटंकी को भी बंद कर दिया गया है। नेपाल के झापा जिला के प्रमुख जिला अधिकारी शिवराम गेलाल ने बताया कि बंगाल के दार्जिलिंग जिले से सटे झापा के काकरभिट्टा और भद्रपुर तथा इलाम के पशुपतिनगर नाकों को 72 घंटे के लिए सील किया जाएगा। चुनाव अवधि के दौरान सुरक्षा संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के सुरक्षा निकायों के समन्वय में सीमा सील की जा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय जिला प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन सीमा के दोनों ओर होने वाले चुनाव के दौरान सीमा सील करने की परंपरा रही है, जिसे इस बार भी जारी रखा गया है।2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नेपाल और भूटान की सीमाओं पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि इन पड़ोसी देशों से जुड़ी सीमाएं राज्य के उत्तर बंगाल क्षेत्र के लिए संवेदनशील मानी जाती हैं।नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट: बंगाल चुनाव के चलते भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। डीआईजी और एसपी ने सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर सुरक्षा का जायजा लिया है। घुसपैठ की चिंता: खुफिया एजेंसियों को सतर्क किया गया है, ताकि चुनाव के दौरान अवैध घुसपैठ को रोका जा सके।खुली सीमा: नक्सलबाड़ी सहित भारत-नेपाल के खुले बॉर्डर से आवाजाही की ग्राउंड रिपोर्ट्स ने अवैध पारगमन को लेकर सवाल उठाए हैं। भूटान सीमा पर स्थिति :बॉर्डर सील: अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी से सटे भारत-भूटान सीमा को चुनाव के चलते 20 अप्रैल (शाम 5 बजे) से 23 अप्रैल (शाम 6 बजे) तक सील किया गया है।
गेट बंद: भूटान के गृह मंत्रालय के अनुसार, फुंटशोलिंग, समत्से और लामोइझांखा जैसे प्रमुख प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए हैं, जिससे नागरिक और पर्यटक सीमा पार नहीं कर पाएंगे।
शांतिपूर्ण चुनाव: यह कदम दोनों देशों द्वारा चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए संयुक्त रूप से उठाया गया है। चुनाव संदर्भ:2026 का बंगाल चुनाव मुख्य रूप से बीजेपी और टीएमसी के बीच कड़े मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों की 36 सीटों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।प्रशासन ने साफ किया है कि यह कदम चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और किसी भी तरह की अवांछित गतिविधि को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है.आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पर्यटक और जरूरी सेवाओं को छोड़कर आम लोगों के लिए इस अंतरराष्ट्रीय सीमा मार्ग से आवाजाही पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. आगामी 23 अप्रैल को राज्य में पहले चरण का मतदान होना है, जिसे शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है. सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी भी पहले से कहीं अधिक बढ़ा दी गई है.
पहली बार इतने पहले नेपाल भूटान गेट को बंद करने का निर्णय
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस बार पहली बार इतने पहले भूटान गेट को बंद करने का निर्णय लागू किया गया है। इसका मकसद चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या बाहरी हस्तक्षेप को रोकना है. सुरक्षा बलों को भी अलर्ट पर रखा गया है और सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त जारी है. इस फैसले का असर सबसे ज्यादा उन पर पड़ा है जो रोज़गार के सिलसिले में भूटान गए हुए थे. सरकारी अधिसूचना जारी होते ही बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी मजदूर अपने देश लौटने लगे. सोमवार सुबह से ही जयगांव सीमा पर मजदूरों की भीड़ उमड़ पड़ी. कई किलोमीटर लंबी कतारें देखी गईं, जहां लोग अपने घर लौटने के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए.
शाम 6 बजे के बाद भूटान गेट पूरी तरह से बंद
जानकारी के मुताबिक, नेपाल, भूटान इस अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार से अब तक लाखों मजदूर भारत लौट चुके हैं और अपने-अपने घरों की ओर रवाना हो गए हैं।भूटान में कार्यरत मजदूर व कुचबिहार निवासी रफीक आलम ने बताया, "हमें भारत सरकार की ओर से निर्देश मिला था कि सोमवार तक देश लौट आएं. इसलिए चुनाव से पहले ही वापस आ गए। सोमवार (20 अप्रैल) शाम 6 बजे के बाद भूटान गेट पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, जिसके बाद केवल विशेष परिस्थितियों में ही आवागमन की अनुमति दी जाएगी।प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और अनावश्यक रूप से सीमा क्षेत्र में भीड़ न लगाएं. चुनाव के मद्देनजर उठाए गए इस कदम से जहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, वहीं प्रवासी मजदूरों की घर वापसी का यह दृश्य भी चुनावी माहौल की गंभीरता को दर्शाता है।
[21/04, 12:05] Slg Ashok Jha: ममता दीदी के जाने का समय आ गया है- अमित शाह
- कहा,बंगाल में भाजपा के शपथ ग्रहण के छह माह के अंदर होगा गोरखाओ की समस्या का स्थाई समाधान
- ममता शासन के सभी राजनीतिक मुकदमों से गोरखाओ को मिलेगी मुक्ति
- पूरा बंगाल तय कर बैठा है, दीदी को हटाने का समय आ गया',सुकना की रैली में बोले शाह
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: सुकना हाई स्कूल स्पोर्ट्स ग्राउंड में आयोजित विजय संकल्प सभा में उन्होंने दार्जिलिंग, तराई और डुआर्स के लोगों को संबोधित किया और भाजपा की जीत का दावा किया। इस रैली में उन्होंने दार्जिलिंग हिल्स, तराई और डुआर्स क्षेत्र के लिए भाजपा का विज़न, गोरखालैंड मुद्दे का स्थायी समाधान, और क्षेत्र में विकास का रोडमैप पेश किया। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल तेज हो चुका है और दार्जिलिंग में आयोजित जनसभा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य की राजनीतिक स्थिति पर तीखा बयान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राज्य में बदलाव की मांग अब तेज हो रही है और जनता परिवर्तन की दिशा में सोच रही है। अमित शाह ने गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो गोरखा बहनों और भाइयों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।अमित शाह ने अपने संबोधन में दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद छह महीनों के भीतर गोरखा समुदाय से जुड़ी पुरानी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे लोगों के जीवन में संतोष और स्थिरता आ सके।दीदी को हटाने का समय आ गया- अमित शाह
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) दोनों पर गोरखा समुदाय और दार्जिलिंग क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप रहा है। शाह के अनुसार, इन समस्याओं का समाधान भाजपा अपनी सरकार बनने के बाद तय समयसीमा में करने का प्रयास करेगी। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने उत्तर बंगाल के लोगों से अपील की कि एक बार फिर भाजपा को अवसर दिया जाए, ताकि विकास और समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा 'उत्तर बंगाल वालों, एक बार भाजपा सरकार बना दीजिए। तीन चुनावों से दार्जिलिंग तो कमल फूल पर वोट कर ही रहा है, लेकिन इस बार पूरा बंगाल तय कर बैठा है कि दीदी को हटाने का समय आ गया है।'यह रैली उत्तरी बंगाल में पार्टी के चुनावी अभियान को गति देने के लिए महत्वपूर्ण थी। कहा होगा गोरखा मुद्दा का समाधान : अमित शाह ने आश्वासन दिया कि भाजपा सरकार बनने पर गोरखा मुद्दों का स्थायी समाधान किया जाएगा और गोरखा नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे।विकास का क्षेत्रीय विकास: उन्होंने उत्तर बंगाल में AIIMS की स्थापना और क्षेत्र के विकास के लिए रोडमैप का वादा किया।राजनीतिक संदेश: इस रैली का उद्देश्य टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए 'गुंडा राज' और सिंडिकेट सिस्टम को खत्म करने का भरोसा दिलाना था। यह रैली खराब मौसम के कारण पहले रद्द की गई लेबोंग यात्रा के बाद, अमित शाह का सुकना (सिलीगुड़ी) में एक प्रमुख कार्यक्रम था। तीन और जगहों पर होंगी रैलियां: इसके बाद वे दोपहर 12:45 बजे पश्चिम बर्धमान के कुल्टी विधानसभा क्षेत्र में बाल्टोरिया के गणेश पूजा मैदान में लोगों को संबोधित करेंगे। इसके बाद कार्यक्रम का रुख मेदिनीपुर की ओर होगा। तीसरी सभा दोपहर 2:15 बजे पश्चिम मेदिनीपुर के सालबोनी में बिल्ला स्टेडियम मैदान में आयोजित की जाएगी। दिन की आखिरी रैली पूर्व मेदिनीपुर के चांदीपुर में शाम 3:45 बजे बिनॉय स्मृति फुटबॉल मैदान में होगी। ( हिंदुस्तान की सरहद से अशोक झा की रिपोर्ट )
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