- नागा पीपुल्स यूनियन इम्फाल और ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन मणिपुर ने निकाला मोमबत्ती जुलूस
पूर्वोत्तर भारत से अशोक झा: मणिपुर में हाल के दिनों में हुई दो दर्दनाक घटनाओं ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। इन घटनाओं के बाद लोगों में गुस्सा और दुख दोनों देखा जा रहा है। जगह-जगह लोग सड़कों पर उतरकर शांति और न्याय की मांग कर रहे हैं। पहली घटना 7 अप्रैल को बिशनुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी इलाके में हुई, जहां एक बम धमाके में दो छोटे बच्चों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव फैला दिया। जैसे ही यह खबर इम्फाल पहुंची, बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर आ गए। लोगों ने हाथों में मशाल लेकर शांतिपूर्ण रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने 'शांति चाहिए' और 'दोषियों को सजा दो' जैसे नारे लगाए। कई जगहों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई और प्रदर्शनकारियों व सुरक्षा बलों के बीच हल्की झड़प भी हुई, जिसके बाद आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इसके बावजूद लोग लगातार न्याय की मांग करते रहे। दूसरी घटना 18 अप्रैल को इम्फाल-उखरुल रोड पर हुई, जहां दो नागा नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना से नागा समुदाय में गहरा आक्रोश और शोक फैल गया। इसके विरोध में नागा पीपुल्स यूनियन इम्फाल और ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन मणिपुर ने मिलकर शोक सभा और मोमबत्ती मार्च निकाला। दिन में रास्ते रोक रही महिलाएं, पुलिस को भी जाने की नहीं इजाजत: ये महिलाएं दिन में रास्ते रोक रही हैं, धरना दे रही हैं. वहां से न पुलिस निकल सकती है, न कोई और. वहीं, रात में मशाल रैलियों से इलाकों की पहरेदारी भी कर रही हैं. एक प्रदर्शनकारी महिला ने बताया- घर संभालना, आंदोलन में जाना और रोजी-रोटी की चिंता, तीनों को साथ लेकर चलना चुनौतीपूर्ण है. इसके बावजूद यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है और मैं हर चीज संतुलित कर रही हूं।
बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी: लगातार बंद के कारण आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है. ख्वैरामबंद इमा मार्केट में कुछ महिला विक्रेता दुकानें खोलने को मजबूर हुई हैं. अनीता लौरेंबम ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि वे आंदोलन के खिलाफ हैं. वे इस काम के बाद आंदोलन में शामिल होंगी. नागरिक संगठन 'कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी' ने 25 अप्रैल को बड़े स्तर पर आंदोलन की घोषणा की है
क्या है मेइरा पाईबी समुदाय: मेइरा पाईबी संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मानवाधिकारों की रक्षा करने में भूमिका निभाती हैं. शराबखोरी और मादक पदार्थ की समस्या से निपटने के लिए 80 के दशक में ये आंदोलन बना. उस वक्त भी मशाल से गश्त की जाती थी. इसका उद्देश्य सामुदायिक भावना को बढ़ावा देना है, जिससे मुद्दे सुलझाने के लिए लोग मिलकर काम करें. इस आंदोलन ने मानवाधिकारों के हनन और अफस्पा के तहत की जाने वाली कार्रवाई के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है. इरोम शर्मिला इस आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण चेहरा रही हैं. उनके आंदोलन ने ही दुनियाभर का ध्यान मणिपुर की ओर खींचा है।
जानें क्या है पूरा मामला: दरअसल, छह अप्रैल को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में देर रात उग्रवादियों ने एक घर में रॉकेट लॉन्चर से हमला कर दिया था. हमले में पांच साल के एक लड़के और छह महीने की एक बच्ची की मौत हो गई थी. पुलिस ने मामले की जांच की और उसके बाद उन्होंने बताया कि जब घर में रॉकेट फटा तो उस वक्त दोनों बच्चे बेडरूम में अपीन मां के साथ सो रहे थे. इस घटना में बच्चों की मां की भी मौत हो गई थी।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/