बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए ने क्लीन स्वीप कर लिया। एनडीए के सभी पांच उम्मीदवारों को जीत मिल गई, जबकि महागठबंधन को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा है। एनडीए को कुल 202 वोट मिले, जबकि महागठबंधन को सिर्फ 37 वोट ही मिल सके। जीत के लिए एक उम्मीदवार को 41 वोट चाहिए था। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर को प्रथम वरीयता के 41 वोट हासिल हुए। इससे इनकी जीत हो गई। दूसरी ओर, भाजपा के दूसरे प्रत्याशी शिवेश राम को प्रथम वरीयता के 39 वोट हासिल हुए तो उनके प्रतिद्वंद्वी अमरेन्द्रधारी सिंह को पहली वरीयता के केवल 37 वोट मिले। राज्यसभा चुनाव में 243 विधायकों को मतदान करना था। लेकिन राजद के एक और कांग्रेस के तीन विधायक मतदान से गायब रहे। लिहाजा कुल 239 विधायकों ने ही वोट डाला। काउंटिंग शुरू होते ही सारे वोटों की जांच की गई। विधानसभा सचिवालय के मुताबिक सारे 239 वोट वैद्य पाए गए। इस चुनाव में एनडीए ने मुख्यमंत्री सह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, केंद्रीय मंत्री राम नाथ ठाकुर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा के शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया था। सभी पांचों उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे। मतदान के दौरान महागठबंधन को झटका लगा। चार विधायक वोट डालने के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे। इनमें कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक शामिल हैं। जिन चार विधायकों ने मतदान में भाग नहीं लिया, उनमें मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद, फारबिसगंज के विधायक मनोज विश्वास, वाल्मीकि नगर के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा और ढाका से राजद विधायक फैसल रहमान शामिल हैं। कांग्रेस के तीनों विधायक महागठबंधन के हिस्सा हैं और उनका वोट गठबंधन उम्मीदवार के लिए जरूरी माना जा रहा था। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजद विधायक की गैरहाजिरी से महागठबंधन के भीतर रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि उनके पीए ने बताया है कि उनकी मां की तबीयत खराब है। वे दिल्ली गए हैं। मतदान के दिन इन विधायकों की गैरहाजिरी ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू कर दी हैं। खासकर पांचवीं सीट पर चल रही कड़ी टक्कर के बीच इस घटनाक्रम को काफी अहम माना जा रहा था। राज्यसभा चुनाव में पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे। ऐसे में हर एक वोट की अहमियत बढ़ गई थी। महागठबंधन की ओर से राजद के उम्मीदवार के रूप में अमरेन्द्रधारी सिंह(एडी सिंह) मैदान में थे। उन्हें समर्थन के लिए गठबंधन के हर विधायक का वोट जरूरी माना जा रहा था। हालांकि एनडीए में भी उस वक्त खलबली मच गई थी, जब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी और समधन ने अपना वोट डालने से पहले महागठबंधन उम्मीदवार एडी सिंह और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी। इसके बाद वे महागठबंधन के कुछ विधायकों के साथ वोट डालने पहुंची थी। इससे एनडीए में क्रॉस वोटिंग की बात कही जा रही थी। हालांकि इस मामले में हम के अध्यक्ष और मंत्री संतोष सुमन ने सफाई देते हुए क्रॉस वोटिंग की सारी खबरों को नकार दिया था। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी एनडीए के पांचों उम्मीदवारों की जीत का दावा किया था। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के चार विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे थे, तो वे कैसे जीतते। उधर, जदयू ने सफाई दी थी कि मांझी की बहू और समधन गलती से तेजस्वी यादव के कमरे में पहुंच गई थीं, लेकिन उन्होंने जैसे ही वहां महागठबंधन के लोगों को देखा तो तुरंत बाहर आ गईं। बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं और इस बार राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव हुआ था। हालांकि चुनाव में कुल 6 उम्मीदवार मैदान में थे, इसलिए नतीजों पर सभी की नजर बनी हुई थी। विधानसभा में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जबकि महागठबंधन के पास लगभग 35 विधायक हैं। इसी मजबूत गणित के चलते एनडीए ने राज्यसभा चुनाव में सभी सीटों पर जीत हासिल कर ली।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले राजद नेता तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के 35 विधायकों की संख्या को बढ़ाने के लिए एक दिन पहले एआईएमआईएम के साथ इफ्तार पार्टी में हिस्सा लिया था, जहां अख्तरुल ईमान ने ऐलान किया था कि उनकी पार्टी के विधायक राज्यसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी अमरेन्द्रधारी सिंह को वोट देंगे।
तेजस्वी यादव ने एआईएमआईएम को तो मना लिया, लेकिन वे अपने विधायकों को इस बाबत संतुष्ट नहीं कर पाए। यही कारण है कि उनके अपने विधायक के साथ ही कांग्रेस के 3 विधायकों ने महागठबंधन को बड़ा झटका दे दिया। राज्यसभा चुनाव से पहले एनडीए और महागठबंधन से पहले दावे और प्रतिदावे किए जा रहे थे। 3 विधायकों के सपर्क में न होने के बारे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि हमारे विधायकों को भाजपा ने चोरी कर लिया। 13 तारीख की रात तक सभी विधायक कंफर्टेबल थे और उनसे बात हो रही थी।
राजेश राम ने पूछा कि आखिर ऐसी कौन सी बात हो गई कि 13 तारीख के बाद से हमारे तीन विधायक अनरीच हो गए। उन्होंने कहा कि भाजपा जहां भी जाती है, वोट चोरी करके सरकार बनाती है। हमारे जीते हुए जनप्रतिनिधियों को चुराती है। उन्होंने दावा किया कि हमारे विधायकों को हाउस अरेस्ट किया गया है और घर के बाहर पुलिस का पहरा कर दिया गया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं से राय विचार कर हम कार्रवाई करेंगे। यह माफ करने वाली बात नहीं है।
इस बीच उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राजद और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राजद अपने ही विधायकों को होटल में बंधुआ मजदूर की तरह रखती है। उन्होंने कहा कि यह तरीका राजद और कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक संस्कृति रही है। लोगों को मजदूरों की तरह बुलाकर होटल में रोक कर रखना इनकी आदत बन चुकी है। विजय सिन्हा ने कहा कि ऐसा सिर्फ भौकाल बनाने के लिए किया जाता है। उनके मुताबिक इससे डर का माहौल बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि अपने ही साथियों को डरा-धमकाकर नियंत्रित रखना महागठबंधन की राजनीति का हिस्सा बन गया है। ( बिहार से अशोक झा की रिपोर्ट )
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