-तीन मई 2021 में ऑक्सीजन के अभाव में कोरोना से पति की जान गयी, पिछले चार साल से 11 फरवरी को श्रद्धांजलि देने के पीछे छिपा हजारों होम बायर्स का दर्द
-सुपीमकोर्ट के चीफ जस्टिस की तरफ से सुपरटेक के अधूरे प्रोजेक्ट को एनबीसीसी से पूरा कराने के आदेश के बाद इनकी गीली आंखों में फिर चमका एक छत का सपना
ग्रेटर नोएडा में बुधवार को सुपरटेक ईकोविलेज-2 के सालों से अधूरे पड़े प्रोजेक्ट पर एक वायरस को एक मां अपने मासूम बेटी संग दोपहर में श्रद्धांंजलि देने पहुंची। जिस वायरस को श्रद्धांजलि दी गई वह साधारण वायरस नहीं बल्कि COVID-19 था। इसके पीछे कारण पति देबार्घ्य बनर्जी जो एक निजी विदेशी विमान कंपनी में एरोनाटिकल इंजिनियर पद पर थे इस वायरस ने 3 मई 2021 को निगल लिया था फिर श्रद्धांजलि 11 फरवरी को देने के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण संग एनसीआर के हजारों होम बायर्स का दर्द भी छिपा है।देश में कोरोना के गाल में जो लोग समा गए,उसमें बड़ी संख्या में एनसीआर के होम बायर्स भी हैं। बिना छत पाए ईएमआई संग किराए के मकान में रह रहे सैकड़ों ऐसे लोगों के परिजनों की पीड़ा की मां-बेटी के श्रद्धांजलि वाली तस्वीर के पीछे छिपी है। ग्रेटर नोएडा में पति को बचाने के लिए ऑक्सीजन के लिए भटकती रही परोमिता बनर्जी के साथ मासूम बेटी श्रेया को जो दर्द इस वायरस ने दिया, इसके दुनिया में दुबारा न आने के लिए यह अनूठी श्रद्धांजलि दी गयी। पिछले चार साल से यह मां-बेटी सुपरटेक के अधूरे प्रोजेक्ट पर जाकर 11 फरवरी को जो श्रद्धांजलि देते हैं,उसके पीछे दर्द का वह सागर छिपा है जो सालों से छत के लिए भटक रहे हजारों होम बायर्स के दिल,दिमाग व देह को दर्द दे रहा है। परोमिता ने पति की पुण्यतिथि की तारीख की जगह दुनिया में जिस दिन कोरोना वायरस घोषित हुआ था उस दिन श्रद्धांजलि दे रही है। घर के लिए भटक रहे हजारों होम बायर्स की पीड़ा की गवाही श्रद्धांंजलि देते हुए मां-बेटी के तस्वीर में छिपा है। इसके पहले कक्षा छह में पढ़ने वाली बेटी श्रेया बनर्जी ने फादर्स डे 15 जून को राष्ट्रपति को अपने स्कूल नोटबुक में खत लिखकर मां का सुपरबेक बिल्डर के खिलाफ संघर्ष के साथ पापा की ऑक्सीजन के अभाव में मौत की पीड़ा को बयां करते हुए न्याय मांगा था।सालों से घर के लिए संघर्ष कर रहे सुपरटेक के हजारों बायर्स को छत मिलने की आस सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस के एक फैसले से जगी है। परोमिता बनर्जी ने पिछले दिनों चीफ जस्टिस के सामने अपनी पीड़ा बया करते हुए कहा था पिछले 15 वर्ष में होमबॉयर्स अपनी छत के लिए तरस रहे हैं। कोई हीं इस देश में जो होमबॉयर्स का दर्द समझे, आप हैं प्रभु, सिर्फ हम सबके लिए आप न्याय कीजिए। सीजेआई के जवाब थे हम यहां सबसे पहले होमबॉयर्स के लिए हैं आपके साथ जरूर न्याय होगा। सीजेआई ने होमबायर्स के दर्द को सुनने के बाद 15 दिन के बाद 51 हजार परिवार को न्याय दिया है। सुपरटेक के अधूरे प्रोजेक्ट को एनबीसीसी से पूरा कराने का जो आदेश हुआ उसके बाद हजारों होम बायर्स के आंखों में एक छत का सपना फिर चमकने लगा है। उम्मीद है एनबीसीसी इनके अधूरे प्रोजेक्ट पूरा करके छत दिलाने का काम करेगा।
11 फरवरी को डब्ल्यूएचओ ने वायरस का नाम रखा COVID-19
गौरतलब है चीन के वुहान में 2019 में पहला ज्ञात मामला सामने आने के कुछ महीनों बाद और अमेरिका में पहला मामला सामने आने के लगभग तीन सप्ताह बाद, 11 फरवरी, 2020 को, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आधिकारिक तौर पर उस बीमारी का नाम "कोरोनावायरस रोग 2019" रखा, जो आगे चलकर एक महामारी का कारण बनी, जिसे संक्षेप में COVID-19 कहा जाता है। ( श्रेया बनर्जी की कलम से )
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