अशोक झा/ कोलका
केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने पाकिस्तान लिंक्ड आतंकी साजिश मामले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र में 12 स्थानों पर छापेमारी की। पाकिस्तानी ऑपरेटिव जसवीर चौधरी और उसके भारत में सक्रिय गुर्गों ने ड्रोन के जरिए भारत-पाकिस्तान सीमा से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और IED मंगाए थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार को देश के चार राज्यों में एक साथ कार्रवाई करते हुए 12 ठिकानों पर छापेमारी की। इसी अभियान के तहत बिहार के किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड स्थित मिर्जापुर गांव में भी टीम ने दबिश दी। केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने पाकिस्तान लिंक्ड आतंकी साजिश मामले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र में 12 स्थानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसियों को इनपुट मिले थे कि आरोपी भारत-पाकिस्तान सीमा के जरिए ड्रोन की मदद से हथियार, गोला-बारूद और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) की खेप भारत में मंगवा रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, इस आतंकी नेटवर्क की साजिश पंजाब, दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में विस्फोट कर बड़े नुकसान की थी। एजेंसियों का मानना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो जानमाल की भारी क्षति हो सकती थी।
एनआईए ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के पांच, राजस्थान के दो, बिहार के दो और महाराष्ट्र के तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। बिहार में भी दो संदिग्ध ठिकानों पर एजेंसी की टीम ने तलाशी अभियान चलाया। हालांकि, फिलहाल एजेंसी की ओर से इन स्थानों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। पाकिस्तानी ऑपरेटिव जसवीर चौधरी और उसके भारत में सक्रिय गुर्गों ने ड्रोन के जरिए भारत-पाकिस्तान सीमा से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और IED मंगाए थे। इनका मकसद पंजाब, दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में ब्लास्ट का था। हालांकि, उसकी साजिश सफल होती उससे पहले भी एनआईए ने एक्शन तेज कर दिया।अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार को एक साथ चार राज्यों के 12 ठिकानों पर छापेमारी अभियान चलाया। इसमें एक पाकिस्तानी एजेंट और सीमा पार से रची गई कथित आतंकी साजिश का मामला सामने आ रहा है। यह तलाशी अभियान उत्तर प्रदेश में पांच ठिकानों पर चला। इसके अलावा राजस्थान, बिहार में दो-दो जगहों पर और महाराष्ट्र में तीन जगह पर छापेमारी की गई। ये कार्रवाई उन लोगों को निशाना बनाकर की गई, जिन पर इस मामले से जुड़े होने का शक है। किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड के मिर्जापुर गांव में हुई इस कार्रवाई के दौरान कई घंटों तक सघन तलाशी अभियान चलाया गया। एनआईए, एटीएस, एनएसजी और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई के दौरान पूरे गांव को सुरक्षा घेरे में तब्दील कर दिया गया।
शुक्रवार सुबह करीब तीन बजे एनआईए की टीम भारी सुरक्षा बलों के साथ मिर्जापुर गांव पहुंची। केंद्रीय एजेंसियों के साथ स्थानीय पुलिस बल भी मौके पर मौजूद था। सुरक्षा एजेंसियों ने गांव के एक घर को चारों ओर से घेर लिया और तलाशी अभियान शुरू किया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा कारणों से किसी भी बाहरी व्यक्ति को घटनास्थल के आसपास जाने की अनुमति नहीं दी गई। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को इनपुट मिला था कि संदिग्ध का संबंध किसी विदेशी संगठन से हो सकता है। एनआईए को एक संदिग्ध ऑडियो क्लिप भी मिली थी, जिसमें कुछ आपत्तिजनक बातचीत होने की आशंका जताई जा रही है। इसी इनपुट के आधार पर एजेंसी ने छापेमारी की कार्रवाई की। हालांकि, अब तक एनआईए की ओर से मामले को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। तलाशी अभियान के दौरान जांच एजेंसियों ने संदिग्ध के घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। जांच टीम ने डिजिटल डाटा की भी गहन जांच की। अधिकारियों का कहना है कि एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संदिग्ध किन लोगों के संपर्क में था, उसकी गतिविधियां कितने समय से निगरानी में थीं और क्या उसके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह अचानक बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के पहुंचने से गांव में दहशत का माहौल बन गया। लोगों की नींद तब खुली जब गांव में सुरक्षा वाहनों की आवाजाही शुरू हुई। ग्रामीणों ने बताया कि कई घंटों तक पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा रहा और किसी को भी घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।
कार्रवाई पूरी होने के बाद एनआईए की टीम मनोज रविदास को अपने साथ लेकर रवाना हो गई। संभावना जताई जा रही है कि उसे आगे की पूछताछ के लिए किशनगंज सर्किट हाउस या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। जांच एजेंसियां उससे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ कर सकती हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संदिग्ध के खिलाफ किस विशेष मामले में जांच चल रही है और कथित विदेशी संगठन से उसके संबंध किस प्रकार के हैं। स्थानीय प्रशासन भी इस पूरे मामले पर फिलहाल कुछ भी कहने से बच रहा है। हालांकि, घटना के बाद जिले में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है। जांच एजेंसियां इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं के मद्देनजर बेहद गंभीरता से देख रही हैं। आने वाले दिनों में डिजिटल जांच, पूछताछ और जब्त दस्तावेजों की जांच के बाद कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।दिल्ली और पंजाब समेत कई राज्यों के भीड़भाड़ वाले इलाके थे निशाने पर
जांच अधिकारियों के मुताबिक, अगर समय रहते सुरक्षा एजेंसियों को यह खुफिया इनपुट नहीं मिलता, तो देश में एक बार फिर सिलसिलेवार बम धमाकों की गूंज सुनाई दे सकती थी। आतंकी नेटवर्क की योजना पंजाब, देश की राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों के भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों में समन्वित (Coordinated) आईईडी ब्लास्ट करने की थी, ताकि देश में बड़े पैमाने पर दहशत और अराजकता का माहौल पैदा किया जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बनी ‘ड्रोन स्मगलिंग’, फंडिंग रूट की जांच तेज
NIA के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि सीमा पार से पारंपरिक तरीकों के बजाय ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करके हथियार और बारूद भारतीय सीमा में भेजना सुरक्षा बलों के लिए एक नई और बड़ी चुनौती बन चुका है। बहरहाल, एनआईए अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे मौजूद फंडिंग चैनल यानी हवाला रूट, पाकिस्तान से होने वाले डिजिटल कम्युनिकेशन (सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स) और यूपी-पंजाब में फैले इसके स्थानीय मॉड्यूल्स की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। सूत्रों का दावा है कि आज की छापेमारी से मिले सुरागों के आधार पर आने वाले दिनों में देश के कई अन्य राज्यों में भी गिरफ्तारियां और छापेमारी का दौर देखने को मिल सकता है।
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