- भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह चौकस,ट्रंप का शांति प्रस्ताव और पाकिस्तान का डबल गेम का देगा जवाब
- आतंकी संगठन तैयार कर रहा है यहां अपना वैचारिक और 'लॉजिस्टिकल बेस'
बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा: खुरासान प्रांत के बीच बढ़ता तालमेल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की रणनीतिक साजिश को दर्शाता है।
हालिया घटनाक्रम में इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत के समन्वयक मीर शफीक मंगल द्वारा लश्कर-ए-तैयबा के नेता राना मोहम्मद अशफाक को हथियार भेंट करना इस साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है, जो आईएसआई की निगरानी में जिहादी सांप्रदायिक गुटों को एक मंच पर ला रही है। दुनिया भर में गाजा युद्ध की चर्चा है मगर पाकिस्तान में एक नया खतरा पनप रहा है।अमेरिका की एक रिपोर्ट ने सनसनीखेज खुलासा किया है। कहा गया है कि आईएसआई से जुड़े इस नेटवर्क में लश्कर-ए-तैयबा की शहरी लॉजिस्टिक्स ऑपरेटिव क्षमताओं को जैश-ए-मोहम्मद की आत्मघाती हमलों की क्षमता के साथ जोड़ा गया है, जिसे हमास से मिलने वाले सामरिक सहयोग से मजबूती मिली है। इस गठजोड़ का उद्देश्य भारत के खिलाफ लंबे समय तक हिंसा की रणनीति को आगे बढ़ाना है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अब हमास के लिए नया ठिकाना बन रहा है। खासकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हमास अपने पैर पसार रहा है। इसके माध्यम से वह बांग्लादेश सीमांत तक फैलेगा। आतंकी संगठन यहां अपना वैचारिक और 'लॉजिस्टिकल बेस' तैयार कर रहा है।यह पश्चिमी देशों के लिए खतरे की घंटी है। एक तरफ अमेरिका गाजा में शांति चाहता है। वहीं पाकिस्तान हमास के नेताओं को खुली छूट दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गठजोड़ दुनिया के लिए भारी पड़ सकता है। अगर इसे नहीं रोका गया तो अंजाम बुरा होगा. पाकिस्तान का यह रवैया उसे कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर सकता है।
ट्रंप का शांति प्रस्ताव और पाकिस्तान का डबल गेम:
अमेरिका ने 15 जनवरी 2026 को 'बोर्ड ऑफ पीस' बनाया है।।इसका मकसद गाजा में शांति लाना और वहां भरोसेमंद सरकार बनाना है। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को भी न्योता दिया। मगर पाकिस्तान का असली चेहरा कुछ और ही है। रिपोर्ट कहती है कि वहां हमास के नेता खुलेआम घूम रहे हैं। वे रैलियां कर रहे हैं और जहर उगल रहे हैं।।यह अमेरिका की कोशिशों पर पानी फेरने जैसा है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान अब भी अमेरिका का 'मेजर नॉन-नाटो एली' रहने लायक है।
लश्कर और जैश के साथ हमास का खतरनाक गठजोड़: 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद पाकिस्तान में हमास एक्टिव हो गया है। हमास नेता खालिद मशाल का खास आदमी नाजी जहीर वहां सक्रिय है।वह लगातार इजरायल विरोधी रैलियों में चीफ गेस्ट बन रहा है।
सबसे डराने वाली बात उसका कनेक्शन है। जहीर उन लोगों के साथ मंच साझा कर रहा है जो लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं। यह 'टेरर सिंडिकेट' भारत और दुनिया के लिए सिरदर्द बन सकता है।
वह हमास के लिए वहां से समर्थन और वैधता जुटा रहा है।
PoK में सेना और जिहादियों के साथ हमास की बैठक
रिपोर्ट में पीओके को लेकर बड़ा दावा किया गया है। 5 फरवरी 2025 को वहां 'कश्मीर एकजुटता दिवस' मनाया गया था। इसमें पाकिस्तानी सेना और सरकार के लोग शामिल थे। हैरानी की बात यह है कि वहां हमास के नेताओं ने भी भाषण दिया। जिहादी कमांडरों के साथ उनकी मौजूदगी बहुत कुछ कहती है. खालिद कद्दूमी तेहरान से आकर रैलियों में शामिल हुआ। पाकिस्तानी राजदूतों से भी मिल रहे हैं जिहादी प्रतिनिधि। इस्लामाबाद हमास के एजेंडे को चुपचाप सपोर्ट कर रहा है। यह साफ दिखाता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ सीरियस नहीं है।वॉशिंगटन के लिए यह बहुत बड़ी चिंता का विषय है।
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