भारत के इतिहास में पहली बार देश का आम बजट रविवार के दिन पेश हो रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को संसद के चल रहे बजट सत्र के हिस्से के रूप में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं।सरकार ने इस बजट में किसी को हाईस्पीड रेल नेटवर्क तो किसी को वाटर वे का सौगात दिया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने समुद्र तट से सटे राज्यों ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में विशेष कॉरिडोर बनाने का एलान किया है।
तमिलनाडु का खास ख्याल: वित्त मंत्री ने बजट में चुनावी राज्य तामिलनाडु का खास ख्याल रखा है। इस राज्य को कई सौगात दिए गए हैं। वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए एलान किया कि सरकार इस साल तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से लेकर तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के बीच हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण करेगी। इसके साथ ही चेन्नई-बेंगलुरु तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच हाई-स्पीड लिंक बनाया जाएगा। इतना ही नहीं वित्त मंत्री ने ये भी बताया कि तमिलनाडु में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के लिए विशेष कॉरिडोर स्थापित किया जाएगा। किसे क्या मिला?: बजट में ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश में डेडिकेटेड मिनरल पार्क बनाए जाने का ऐलान किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने वाराणसी से सिलीगुड़ी तक रेल कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा है। केरल और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने का भी बजट में प्रस्ताव रखा गया है। वित्त मंत्री ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे मिनरल से भरपूर राज्यों को माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने में मदद करने का प्रस्ताव रखा है।
बंगाल को भी तोहफा: चुनावी राज्य बंगाल को भी रेल कॉरिडोर का तोहफा दिया गया है। वित्त मंत्री ने दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण का ऐलान किया है। इससे प्रमुख तौर पर बंगास से राजधानी दिल्ली तक सफर करने वाले यात्रियों को लाभ होगा और वह कम समय में एक शहर से दूसरे शहर यात्रा कर सकेंगे।वहीं, विकसित भारत के लक्ष्य को भी बजट में ध्यान में रखा गया है। अब बजट पर प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिकिया आई है। उन्होंने कहा, ये बजट भारत की वैश्विक भूमिका को नए सिरे से सशक्त करता है।
बजट 2026 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'ये बजट भारत की वैश्विक भूमिका को नए सिरे से सशक्त करता है। भारत के 140 करोड़ नागरिक सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर ही संतुष्ट नहीं हैं। हम जल्द से जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं। ये करोड़ों देशवासियों का संकल्प है।'
बजट वर्तमान के सपनों के साकार-PM मोदी
बजट 2026 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "ये बजट वर्तमान के सपनों को साकार करता है और भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव को सशक्त करता है। ये बजट 2047 के विकसित भारत की हमारी ऊंची उड़ान का मजबूत आधार है। आज भारत जिस रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, इस बजट से उसे नई ऊर्जा, नई गति मिलेगी। जो पाथ ब्रेकिंग रिफॉर्म किए गए हैं, वो आकांक्षा से भरे हुए भारत के साहसिक, प्रतिभाशाली युवाओं को उड़ने के लिए खुला आसमान देते हैं।"वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो कुल बजट का 14.68 प्रतिशत है और पिछले वर्ष के बजट से 15 प्रतिशत अधिक है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया, जिसमें रक्षा मंत्रालय को सबसे अधिक 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि मंत्रालय को मिली यह राशि केंद्रीय बजट का 14.68 प्रतिशत है। इसका मुख्य उद्देश्य सैन्य तैयारियों को मजबूत करना, नवाचार को प्रोत्साहन देना और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को और सुदृढ़ करना है। मंत्रालय ने इसे प्रौद्योगिकी की दृष्टि से उन्नत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर एक निर्णायक कदम बताया है, जो 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के विजन से पूरी तरह मेल खाता है।इस बजट में आधुनिकीकरण, प्रौद्योगिकी नवाचार और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सरल एवं प्रभावी खरीद प्रक्रियाओं पर विशेष जोर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से रक्षा बजट में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले वर्षों के आंकड़े इस प्रकार हैं... वित्त वर्ष 2021-22: 4.84 लाख करोड़ रुपये
2022-23: 5.25 लाख करोड़ रुपये, 2023-24: 5.94 लाख करोड़ रुपये,2024-25: 6.2 लाख करोड़ रुपये
2025-26: 6.81 लाख करोड़ रुपये, वहीं, रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा रखरखाव, मरम्मत या समग्र आवश्यकताओं के लिए उपयोग किए जाने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण हेतु आयातित कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव है। यह कदम घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद करेगा।
( अशोक झा की रिपोर्ट )
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