*दर्जनों मुहल्लों की स्थिति बहुत खराब है निवासियों को बदबूदार जलजमाव से होकर गुजरना पड़ता है
अजीत मिश्र
शहरों में बढ़ती आबादी के साथ, कुशल अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों की मांग अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई हैं। शहरी क्षेत्रों में जन स्वास्थ्य को बनाए रखने, जल संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की अहम भूमिका होती जा रहीं हैं। लेकिन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट क्या है?और शहरों को खासकर बिहार में सासाराम जैसे अविकसित और नाला निर्माण तथा अवशिष्ट के निष्पादन की समस्या के कारण इस तरह के ट्रीटमेंट प्लांट की अति आवश्यकता है।
यह जानना जरूरी है कि
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का उद्देश्य अपशिष्ट जल और घरेलू मल से दूषित पदार्थों को हटाना है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि उपचारित जल को सुरक्षित रूप से पर्यावरण में छोड़ा जा सके या सिंचाई और औद्योगिक अनुप्रयोगों जैसे गैर-पेय उद्देश्यों के लिए पुन: उपयोग किया जा सके। अपशिष्ट जल का प्रभावी प्रबंधन करके, एसटीपी स्वच्छ और स्वस्थ शहरी वातावरण में योगदान करते हैं।
स्थानीय शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट जल निकासी की समस्या और अति विकास जैसी अनूठी चुनौतियों का सामना करना दुष्कर होता जा रहा है।हास्यास्पद रूप से नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग से जलजमाव की समस्या हेतु सड़कों के किनारे सोख्ता के विकल्प चुने जा रहे हैं इससे आनेवाले दिनों में शहर में पेयजल की गुणवत्ता और खराब हो सकती है।गौरक्षणी के जागरूक निवासी शशांक शेखर का आरोप है कि जनता की समस्याओं के स्थायी निराकरण को लेकर सरकार के पास कोई संवेदनशील परिकल्पना नहीं है।शशांक की पीड़ा बताती है कि यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कितना जरूरी है।
प्रगतिशील युवानेता मनीष रजक इस बात को लेकर काफी आक्रोश में दिखते हैं कि इस इलाके में बाबू जगजीवनराम के बाद कोई नेता सम्यक विचार वाला नहीं हुआ।शहर में जलनिकासी की समस्या दिन प्रतिदिन गहराती जा रही है लेकिन इससे निजात दिलाने के लिए न नगर निगम और ना हीं जिला प्रशासन कोई योजना बना रहा है।निगम द्वारा लादे गये टैक्स से नगर की जनता कराह रही है लेकिन विकास को लेकर यह शहर लगातार पिछड़ता जा रहा है।
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/