- चुनाव पूर्व के सर्वेक्षणों की बात की जाए तो सर्वे बीएनपी के 200 से ज्यादा सीटों पर जीत का दे रहे संकेत
बांग्लादेश में 12 फरवरी को वोटिंग होगी। मंगलवार सुबह 7.30 बजे चुनाव प्रचार खत्म हो गया। अब राजनीतिक दल और उम्मीदवार किसी भी तरह की प्रचार गतिविधि नहीं कर सकते हैं। चुनाव के बाद बांग्लादेश को नया प्रधानमंत्री मिलने की उम्मीद है। शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने की वजह से पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की बीएनपी और घोर दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला है। चुनाव पूर्व के सर्वेक्षणों की बात की जाए तो सर्वे बीएनपी के 200 से ज्यादा सीटों पर जीत का संकेत दे रहे हैं। यानी तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं।इस सर्वे में बड़ा मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी समेत बाकी दलों के बीच बताया गया है. सर्वे के मुताबिक, बीएनपी इस समय सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. अगर अभी चुनाव होते हैं, तो बीएनपी और उसके सहयोगी दलों को संसद में बहुमत मिलने की संभावना जताई गई है.
जमात-ए-इस्लामी को लेकर क्या है राय?
बीएनपी लंबे समय से सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है और इस बार जनता के बीच उसकी पकड़ पहले से बेहतर बताई जा रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का बड़ा दावेदार माना जा रहा है. वहीं दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी और उससे जुड़े दलों को लेकर कहा जा रहा है कि उनका असर सीमित रह सकता है. इन्हें अक्सर भारत-विरोधी सोच से जोड़कर देखा जाता है. सर्वे में बताया गया है कि आम मतदाता इस बार ज्यादा ध्यान महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और देश की अर्थव्यवस्था पर दे रहा है, ना कि कट्टर विचारधाराओं पर. इसी वजह से भारत-विरोधी एजेंडे वाले समूहों को व्यापक समर्थन मिलने की संभावना कम दिखाई गई है। युवा मतदाताओं का खास रोल: सर्वे में ये भी सामने आया है कि युवा मतदाता इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं. युवा वर्ग रोजगार के अवसर, बेहतर भविष्य और राजनीतिक स्थिरता चाहता है।कई युवा मतदाता पारंपरिक राजनीति से हटकर व्यावहारिक मुद्दों पर वोट देने की बात कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव का असर सिर्फ बांग्लादेश की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा. इसका प्रभाव भारत-बांग्लादेश संबंधों और पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर, चुनाव से पहले आया ये सर्वे बताता है कि सत्ता की दौड़ में बीएनपी आगे है और भारत-विरोधी समूहों की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही है। बांग्लादेशी अखबार प्रथोमोलो ने देश के 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव को लेकर एमिनेंस एसोसिएट्स फॉर सोशल डेवलपमेंट (EASD) के जनमत सर्वेक्षण के नतीजों को जारी किया है। सर्वेक्षण के नतीजे कहते हैं कि 12 फरवरी के चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिल सकता है। वहीं शफीकुर्रहमान के नेतृत्व वाली भारत विरोधी जमात की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। BNP को मिल सकता है बहुमत: देश भर में 41,500 लोगों पर किए गए इस सर्वे के अनुसार, BNP के नेतृत्व वाला गठबंधन चुनाव में 208 सीटें जीत सकता है। सर्वे में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 46 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। जातीय पार्टी तीन सीटें जीत सकती है। सर्वे में अन्य राजनीतिक दलों को चार और निर्दलीय उम्मीदवार 17 सीटें मिलने का अनुमान है। जातीय संसद (बांग्लादेश की संसद) में कुल 350 चुने हुए सदस्य होते हैं। इनमें से 300 सदस्यों को लोग अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से चुनते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा वोट पाने वाला एक सदस्य चुनाव जीतता है। वहीं 50 संसय सदस्यों को सीधे चुना जाता है। बांग्लादेश में सांसद का कार्यकाल पांच साल के लिए होता है।
बीएनपी बनी पहली पसंद: सर्वे के नतीजे सोमवार को ढाका में जारी किए गए। EASD सर्वे के अनुसार, बांग्लादेश के वोटर ने राजनीतिक पसंद के मामले में BNP को तरजीह दी है। 66.3 प्रतिशत वोटरों ने BNP को पहली पसंद कहा।जमात-ए-इस्लामी 11.9 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर है। NCP को 1.7 प्रतिशत समर्थन मिला। जातीय पार्टी को 4 प्रतिशत और आजाद उम्मीदवारों को 2.6 प्रतिशत ने पसंद किया। सर्वे के नतीजों में बताया गया कि BNP महिला वोटरों के बीच ज्यादा लोकप्रिय है। इमें 71.1 प्रतिशत महिलाओं ने पार्टी को समर्थन दिया। BNP के नेतृत्व वाले गठबंधन को चटोग्राम (76.8 प्रतिशत) और सिलहट (75.6 प्रतिशत) में सबसे ज्यादा समर्थन है। जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बरिशाल (17.8 प्रतिशत) और खुलना (18.6 प्रतिशत) में मजबूत स्थिति दिखाई है। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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