मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद नई सरकार का गठन किया गया था लेकिन एक बार फिर वहां हालात तनावपूर्ण हो गए है। उखरुल जिले के लिटान के आसपास के गांवों में उग्रवादियों ने रात भर में कई घरों में आग लगा दी।
लोग नींद से जागे तो चारों तरफ डर और अफरातफरी का माहौल था। कई घंटों तक लगातार फायरिंग की आवाजें सुनाई देती रहीं। ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे थे। देखते ही देखते कई घरों में आग लगा दी गई. धुएं के गुबार आसमान में उठने लगे। पूरा इलाका युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आने लगा. लोग अपने परिवार और जरूरी सामान लेकर सुरक्षित जगहों की तरफ भागने लगे। हालात ने एक बार फिर मणिपुर की नाजुक स्थिति को उजागर कर दिया है।प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, लेकिन काफी हद तक इसे नियंत्रण में कर लिया गया है। तत्काल सुरक्षा उपायों के समन्वय के लिए लिटान पुलिस स्टेशन में एक संयुक्त नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है और वरिष्ठ अधिकारी जमीनी स्थिति पर कड़ी नजर रखने के लिए क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं।
पुलिस ने आगे कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य बनी रही। सुरक्षा बलों ने जिलों के सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में तलाशी अभियान और क्षेत्र पर नियंत्रण जारी रखा और हथियार, गोला-बारूद बरामद हुए। बता दें कि एक दिन पहले, सुरक्षा बलों ने इम्फाल पूर्वी जिले के लामलाई पुलिस स्टेशन के अंतर्गत नोंगडैम गांव के पास नगारौ चेंगजेल पहाड़ी श्रृंखला से एक 303 राइफल, एक मैगज़ीन, दो 12-बोर सिंगल-बैरल बंदूकें, चार 9 मिमी पिस्तौलें और 36 हथगोले बरामद किए थे। जबरन वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए खुफिया जानकारी पर आधारित व्यापक तलाशी अभियान, घेराबंदी और खोज अभियान चलाए जा रहे हैं।मणिपुर के इम्फाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई पुलिस स्टेशन के अंतर्गत लिलोंग चाजिंग इलाके में हुए बम विस्फोट के मामले में मणिपुर पुलिस ने इम्फाल पश्चिम और इम्फाल पूर्व जिलों के कई स्थानों से केसीपी (अपुनबा) के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान लैशराम बुलू सिंह (39), पुयामाचा डेविड (22) और निंगथौजम चालम्बा सिंह (29) के रूप में हई है। पुलिस ने उनके कब्जे से एक चार पहिया वाहन, एक 45 पिस्टल जिसमें एक मैगजीन और 17 राउंड गोला-बारूद था, तीन मोबाइल फोन, नकदी और आधार कार्ड से भरा एक बटुआ और अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद की। लिटन गांव में हुई यह घटना राज्य में जारी जातीय तनाव को और गहरा करने वाली साबित हो रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक सोमवार शाम तक करीब 21 घर जलाए जाने की खबर थी। लेकिन रात और सुबह के दौरान हुई नई हिंसा के बाद यह संख्या बढ़कर 30 से ज्यादा पहुंच गई। हालांकि प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की है। इस घटना ने स्थानीय लोगों के मन में भय पैदा कर दिया है। कई परिवार बेघर हो गए हैं। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। लोगों का कहना है कि लगातार हो रही हिंसा के कारण सामान्य जीवन पूरी तरह ठप हो चुका है। गांव में हालात बिगड़ते देख सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। सेना और पुलिस ने इलाके को घेर लिया है और हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। इसके बावजूद बीच-बीच में फायरिंग की खबरें सामने आ रही हैं। प्रशासन का कहना है कि स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और लगातार निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम भी जारी है। हालांकि लोगों में अभी भी डर का माहौल बना हुआ है। इस बीच मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने सोमवार को शांति बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने दोनों समुदायों के लोगों से संयम बरतने को कहा। हालात को देखते हुए एक आपात बैठक भी बुलाई गई थी। इस बैठक में डिप्टी सीएम लोसी डिखो, विधायक राम मुइवाह और किमनेओ हाओकिप समेत कई अधिकारी मौजूद थे। बैठक में हिंसा रोकने और समाधान निकालने पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. प्रशासन का कहना है कि फिलहाल किसी के घायल या मारे जाने की खबर नहीं है, जो राहत की बात है।
इलाके में बढ़ता तनाव और प्रशासन की चुनौती: लिटन गांव की घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि मणिपुर में जातीय तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद हिंसा की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों समुदायों के बीच भरोसा बहाल करना और लोगों को सुरक्षित महसूस कराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। इस घटना की शुरुआत अचानक हुई फायरिंग से बताई जा रही है। मंगलवार सुबह कई राउंड गोलियां चलने की आवाजें सुनी गईं। इसके बाद अराजक तत्वों ने कई घरों में आग लगा दी। हालांकि हिंसा के पीछे की सटीक वजह अभी जांच का विषय है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार सोमवार शाम तक 21 घर जलाए जाने की पुष्टि हुई थी। लेकिन रात और सुबह हुई नई घटनाओं के बाद यह संख्या बढ़कर 30 से ज्यादा हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक नुकसान का आकलन अभी किया जा रहा है और आधिकारिक आंकड़े जल्द जारी किए जाएंगे। सरकार ने इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किए हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और हिंसा रोकने के लिए बातचीत और अन्य उपायों पर काम कर रहा है। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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