बंगाल की सियासत क्या 'माछ'यानी मछली के कांटे में फंसेगी या यह टीएमसी को पड़ेगा भारी
फ़रवरी 19, 2026
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी 'माटी' के नाम पर बवाल होता है, तो कभी 'मानुष' के नाम पर। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की सियासत 'माछ' यानी मछली के कांटे में फंस गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।विवाद की शुरुआत हुई ममता बनर्जी के उस बयान से, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी पर 'खान-पान की आजादी' छीनने का आरोप लगाया। बिहार का जिक्र कर ऐसी बात कह डाली, जिस पर बीजेपी गुस्से से लाल हो गई। यह सबकुछ ठीक उसी दिन हुआ , जिस दिन गृहमंत्री अमित शाह बंगाल के दौरे पर हैं।
बिहार सरकार ने रमजान से पहले मांस की खुली बिक्री पर रोक लगाई तो ममता को मौका मिल गया। उन्हें इसे बंगाल में मुद्दा बनाने की कोशिश की। ममता बनर्जी ने कहा, अगर आपने उन्हें (बीजेपी) चुना, तो वे बाजारों में मछली या मांस तक नहीं बेचने देंगे। मैं शाकाहारियों का सम्मान करती हूं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बंगाल में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। ममता का यह बयान सीधे तौर पर बंगाल के उस वोट बैंक को एड्रेस कर रहा है, जिसके लिए रविवार की दोपहर माछेर झोल यानी मछली की तरी के बिना अधूरी है। बंगाल में 80% से ज्यादा आबादी मांसाहारी है, ऐसे में ममता का यह दांव बीजेपी को बाहरी और कट्टर दिखाने की कोशिश है।
बीजेपी का पलटवार: गुजरात और आंध्र से मछली क्यों मंगा रहा बंगाल?: ममता के आरोपों पर बीजेपी के बंगाल यूनिट ने भी तीखा हमला बोला और इसे ममता की नाकामी बताया। कहा कि क्या कारण है कि बिहार और हिंदी भाषियों को टारगेट लगातार टीएमसी नेता और उनके समर्थक करते है।कभी इन्हें बाहरी, गुड्डा तो कभी कुछ और बोलकर अपमानित किया जाता है। बिहार में एनडीए की सरकार ने अल्पसंख्यकों के स्वास्थ्य का ध्यान रखकर ही पाक ए रमजान में खुले में मांस की बिक्री पर रोक लगाया है? यह सोचने की बात है कि कौन अल्पसंख्यकों का हितैषी है। बीजेपी ने 'एक्स' पर लिखा, नदियों और तालाबों से भरे राज्य में ममता बनर्जी की सरकार अपनी मांग तक पूरी नहीं कर पा रही है। बंगाल को ओडिशा, आंध्र प्रदेश और यहां तक कि गुजरात से मछली मंगानी पड़ रही है।ममता ध्यान दें, ये सभी बीजेपी-एनडीए शासित राज्य हैं। बीजेपी ने कहा- असम, त्रिपुरा और पूर्वोत्तर के राज्यों में जहां हमारी सरकारें हैं, वहां चिकन, मटन या मछली पर कभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया।बीजेपी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है।
मछली: इकोनॉमी और इमोशन का खेल
बंगाल में मछली सिर्फ भोजन नहीं है, बल्कि यह एक विशाल अर्थव्यवस्था है।बंगाल भारत का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक राज्य है. यहां लगभग 25 लाख टन मछली का उत्पादन होता है। बंगाल में करीब 32 लाख लोग सीधे तौर पर मछली पालन और बिक्री से अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। इसलिए इससे जुड़ा कोई भी मुद्दा सीधे वोट बैक से जुड़ जाता है। अब तक ये लोग ममता के साथ थे।
ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने याद दिलाया कि बंगाल में दुर्गा पूजा और काली पूजा जैसे पवित्र अनुष्ठानों में भी माछ और मांग्शो यानी मांस का भोग लगाया जाता है।पुराने जख्म और मुगल मानसिकता की तलवार: मछली पर यह कलह नई नहीं है. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने नवरात्रि में मांसाहार करने वाले विपक्षी नेताओं को मुगल मानसिकता का बताया था। तब तेजस्वी यादव के मछली खाने वाले वीडियो पर भारी बवाल हुआ था। बंगाल की सत्ताधारी पार्टी ने तब भी इसे बंगाली संस्कृति पर हमला करार दिया था। इसके अलावा दिल्ली के चितरंजन पार्क के मछली बाजार को बंद कराने की कथित कोशिशों पर भी महुआ मोइत्रा और बीजेपी के बीच तीखी नोकझोंक हो चुकी है। (बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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