- जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) बिल से निकल आया है और पाकिस्तान के साथ मिलकर रच रहा साजिश
बांग्लादेश में तारिक रहमान की बीएनपी ने बहुमत हासिल करके पीएम की कुर्सी पर बैठ गए है। इस पार्टी ने तो ‘भारत के साथ रिश्ते मजबूत’ करने को लेकर अपने रुख साफ कर दिया है। हालांकि, अभी भी भारत के लिए चिंता कम नहीं हुई है क्योंकि चिकन नेक पर खतरा बना हुआ है। शेख हसीना के जाने के बाद से बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें और भी खूंखार बनकर उभरी हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शेख हसीना के राज में जो आतंकी ढांचा कुचला गया था, वो जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) बिल से निकल आया है और पाकिस्तान के साथ मिलकर साजिश रच सकता है।जमात ने पश्चिम बंगाल से सटे सीमावर्ती इलाकों में जीत हासिल की है. इन इलाकों में जमात की पकड़ मजबूत होने से कट्टरपंथ तेजी से फैलेगा, जो सीधे तौर पर भारत की नेशनल सिक्योरिटी के लिए चुनौती है।जमात ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जीती 51 सीटें: निलफामारी (4), रंगपुर (6), कुरीग्राम (4), गैबांधा (4), चपैनवाबगंज (3), नागांव (1), राजशाही (2), कुश्तिया (3), चुआडांगा (2), झेनैदा (3), जेसोर (4), खुलना (2), सतखीरा (4), मेहरपुर (2), शेरपुर (1), मैमनसिंग (2), सिलहट (1), नोआखली (1) और चटगांव (2) में वोटों की गिनती से पता चलता है कि इन बॉर्डर जिलों में जमात की पकड़ काफी मजबूत हुई है। नॉर्थ ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सुरक्षा विश्लेषक फिलहाल जमात को मिली सीटों का विश्लेषण कर रहे हैं और स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन चिंताजनक बात ये है कि पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के सामने बांग्लादेश के बॉर्डर जिलों में कट्टरपंथी इस्लामी ग्रुप और संगठन कुछ समय से राजनीतिक पैठ बना रहे हैं। सबसे गंभीर तस्वीर पश्चिम बंगाल के करीब वाले बांग्लादेशी जिलों (सतखीरा, झेनैदाह, जेसोर, चपैनवाबगंज, कुरीग्राम, गैबांधा, कुश्तिया और राजशाही) में उभरती है, जहां मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना, सिलीगुड़ी और कोच बिहार जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी में काफी मुखर और हिंसक राजनीति का ट्रेंड काफी बढ़ गया है। ढाका के राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन है कि सरहदी क्षेत्रों में जमात की जीत की एक बड़ी वजह ये है कि उन क्षेत्रों में बंटवारे के बाद भारत से आने वाले मुसलमान हैं। उनके वंशज जमात को वोट कर रहे हैं और उनकी आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है।उत्तर-पूर्व भारत को देश के शेष हिस्से से जोड़ने वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में बुधवार सुबह व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। शहर के प्रमुख संपर्क स्थल महानंदा ब्रिज और उसके आसपास सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने सघन जांच की। इस दौरान वाहनों को रोककर दस्तावेजों की जांच की गई तथा संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी गई। ब्रिज के नीचे और आसपास के इलाकों में भी तलाशी अभियान चलाया गया।सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, सिलीगुड़ी कॉरिडोर रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही संकरा भूभाग उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के मुख्य भूभाग से जोड़ता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की घुसपैठ, तस्करी या आतंकी गतिविधि की आशंका को देखते हुए निगरानी और चौकसी बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में इस तरह के अभियान समय-समय पर चलाए जाते रहेंगे। सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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