शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने BNP की तरफ बढ़ाया दोस्ती का हाथ
बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव के बाद वोटों की गिनती जारी है। शुरुआती नतीजे के मुताबिक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 53 सीटें जीत ली हैं।वहीं जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के खाते में 38 सीटें आई हैं। BNP चीफ तारिक रहमान दोनों सीटों से जीत गए हैं। 208 सीटों के नतीजे अभी आना बांकी है। बहुमत के लिए 150 सीटें जरूरी हैं।
299 सीटों पर हुए चुनाव में दोपहर 2 बजे तक 36 हजार वोटिंग सेंटर्स पर 47.91% मतदान हुआ। अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस, BNP चीफ तारिक रहमान और छात्र नेता नाहिद इस्लाम वोट डालने पहुंचे।
इस दौरान यूनुस ने कहा कि आज नए बांग्लादेश का जन्म हुआ। दूसरी तरफ पूर्व PM शेख हसीना ने चुनाव को फर्जी बताते हुए रद्द करने की मांग की है। साथ ही यूनुस से इस्तीफा भी मांगा हैं।बांग्लादेश चुनाव नतीजे घोषित होने से कुछ घंटे पहले ही शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने BNP की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है।उन्होंने मान लिया है कि बांग्लादेश में इस वक्त तारिक रहमान की पार्टी सबसे ज्यादा पावरफुल है और जनता का भरोसा जीत चुकी है। जॉय ने कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ एकजुट होने की बात कही है। कुछ देर पहले ही शेख हसीना ने बांग्लादेश चुनावों को फर्जी बताते हुए इसे रद्द करने की मांग उठाई थी।बांग्लादेश में ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’ वाली रणनीति : शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है।ऐसे में जॉय ने और पार्टी अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त’ वाली रणनीति अपनाई है। उन्होंने खुलासा किया है कि उनकी पार्टी जल्द ही तारिक रहमान के साथ संपर्क साध सकती है।वाजेद का यह कदम जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है।क्या है आवामी लीग की वापसी की प्लानिंग? सजीब वाजेद ने कहा कि वे जल्द ही BNP से संपर्क करेंगे। उनका यह बयान अवामी लीग की पुरानी रणनीति में एक बड़ा बदलाव है, जो दशकों से BNP को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानती रही है। वाजेद ने चेतावनी दी कि अगर जमात सत्ता में आती है या संसद में प्रभाव बढ़ाती है, तो बांग्लादेश में आतंकवाद का दौर फिर से शुरू हो जाएगा. उन्होंने दावा किया कि जमात के पास जनसमर्थन बहुत कम है और उसे केवल इसलिए बढ़त मिल रही है क्योंकि प्रगतिशील दलों को प्रचार नहीं करने दिया गया। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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