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1. आप, एक काले आदमी, लंदन में रहकर बिना किसी परेशानी के गोरो के साथ पढ़ते हैं, होस्टल में एक ही कमरे में गोरों के साथ रहते हैं, एक ही मेस में खाते हैं फिर अचानक ट्रेन में एक साथ सफर करने में फेंक दिए जाते है?
क्यूँ? ये बात कतई हजम नहीं हुई।
2. फिर आपको, उसी काले भारतीय को, उन्हीं गोरों की सेना में सार्जेंट मेजर बना दिया जाता हैं और दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश बोर वार में आपकी तैनाती एम्बुलेंस यूनिट में होती है जहां आप लड़ाई में गोरों का कालों के विरुद्ध साथ देते हैं। मिलिट्री यूनिफॉर्म में आपकी फोटो पूरे इंटरनेट उपलब्ध है। सार्जेंट मेजर गांधी लिखकर कोई भी सर्च कर सकता है। यह बात भी कुछ हजम नहीं हो रही।
3. आप में 1915 में अचानक 46 वर्ष की उम्र में देशप्रेम जागा और मिलिट्री यूनिफार्म उतारकर आपको बैरिस्टर घोषित कर दिया गया। मैं ऐसा इसलिए बोल रहा क्योंकि रानी लक्ष्मी बाई, खुदीराम बोस, बिस्मिल, भगतसिंह और आजाद जैसे अनेकों देशभक्तों की 25 की उम्र आते आते तक शहादत हो गई थी।
4. इसके बाद आपको महात्मा बुद्ध की तरह शांति अहिंसा का दूत बनाकर दक्षिण अफ्रीका से सीधे चंपारण भेज दिया जाता है जहाँ नील उगाने वाले किसानों के आंदोलन को आप हैक कर लेते हैं। हिंसक होते आंदोलन को अहिंसा शांति के फुस्स आंदोलन में बदल देते हैं। आखिर क्यूँ?
5. आप महात्मा बुद्ध की तरह दिन में एक धोती लपेट कर शांति अहिंसा के नाम पर भारतीयों के आजादी के लिये होने वाले हर उग्र आंदोलन की हवा निकाल कर उसे बिना किसी परिणाम के अचानक समाप्त कर देते हैं और अंग्रेज चैन की सांस लेते रहते हैं। आखिर क्यूँ?
6. नंगा फकीर बनकर अपने साथ अपनी बेटी भतीजी के अलावा अनेक औरतों के साथ खुद पर परीक्षण करने के लिये नंगे सोते हैं और अपने सेल्फ़-कंट्रोल को टेस्ट करते हैं। कौनसा महात्मा ऐसा करता है?आपने अपनी पुस्तक "सत्य के साथ मेरे प्रयोग" में आपने खुद स्वीकार किया है।
7. आप अहिंसा के पुजारी कहलाते हैं पर प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों का खुला साथ देते हैं अपने अहिंसा के सिध्दांतों को दरकिनार करके भारतीयों को कहते हैं सेना में भर्ती हो जाओ और युद्ध करो ताकि ब्रिटिश राज बचा रहे। तब आपकी अहिंसा आड़े नहीं आयी?
8. इसी अहिंसा की ख़ातिर नेताजी का कांग्रेस से इस्तीफ़ा दिला दिया? जब अंग्रेजों की तरफ से लड़ना अहिंसा है तो अपने देश के लिये लड़ना क्यों बुरा था?
9. दिल्ली के मंदिर में कुरान पढ़ने की जिद पूरी करने के लिए आप पुलिस बुला लेते हैं पर कभी मस्जिद में गीता या रामायण पढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। पाकिस्तान को 55 करोड़ और आज के बांग्लादेश जाने 15 KM चौड़ा कॉरिडोर जिसके दोनों तरफ 10 KM तक केवल मुस्लिम ही जमीन खरीद सके उसकी जिद पकड़कर अनशन करने की धमकी देकर सरकार को ब्लैकमेल करते हैं। यही अनशन आपने पाकिस्तान ना बनने के लिए क्यूँ नहीं किया?
बापूजी सत्य यह है कि आपके अहिंसा के पाठ सिर्फ़ हिंदुओ के ही लिए थे जिन्होंने हिंदुओ को नपुंसक बना दिया। वहाँ पंजाब, सिंध, केरल में हिंदू मरते रहे, भगत सिंह सूली चढ गया मगर आपने अनशन नहीं किये।
शुक्र है कि आप इजराइल नहीं गए और वहाँ अपने अहिंसा के भजन नहीं गाए, नहीं तो वहाँ के यहूदियों का अब तक अस्तित्व ख़त्म हो गया होता और वो बॉम्ब की जगह चरखे फेंक रहे होते। लिखने को तो बहुत कुछ है। अब सबको पता चल चुका है कि आपकी फकीरी कितनी महंगी थी। आप कैसे अंग्रेजों की लक्जरी कार में सवार होकर उनके ही विरूद्ध आंदोलन करने जाते थे। आगा खां पैलेस आपके जेल में रहने की कहानी खूब बयां करते हैं और देश यह भी जान गया है कि शांति प्रिय समुदाय को खुश करने के लिए गाय या भैंस की जगह आपने बकरी क्यूं पाली थी??
जब आपके लिए राष्ट्रपिता का संबोधन सुनता हूं तो मन वितृष्णा से भर उठता है। आप राष्ट्र पिता जरूर थे मगर पाकिस्तान के। देश का बेटा होता है, पिता नहीं। भारत का नये देश के रूप में तो जन्म हुआ नहीं था कि आप राष्ट्र पिता बन गये??आपका क्या विचार है??🙏🏼
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