उत्तर बंगाल के अहम ‘बंकिम घाट पुल’ धमाके के साथ गिर गया। यह घटना सुबह नहीं बल्कि दोपहर के भीड़ भरे बाज़ार में एक भयानक हादसा हुआ। फालाकाटा ब्लॉक में जटेश्वर और पंचमेल को जोड़ने वाला मुजनई नदी पर बना अहम ‘बंकिम घाट पुल’ धमाके के साथ गिर गया। सवाल उठ रहा है कि क्या बंगाल के पुलों पर सफर करना खतरा से खाली है क्या? पिछले वर्ष खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणासकी थी कि सभी पुलों की जांच कराकर लोगों का आवागमन सुरक्षित कराया जाएगा। घटना क्रम में बताया गया कि रविवार शाम 5 बजे तक पुल का बीच का हिस्सा, रेत से लदा एक डंपर समेत, नदी में गिर गया। इस घटना से इलाके में काफी सनसनी फैल गई है।वहां लोगों की काफी भीड़ थी। उस समय जटेश्वर से रेत से लदा एक डंपर पुल पार करके देवगांव की ओर जा रहा था। जैसे ही डंपर पुल के बीच में पहुंचा, पुल का एक हिस्सा तेज आवाज के साथ गिर गया। हादसे की तीव्रता से आस-पास का इलाका दहल गया। हालांकि तेज हवाओं के कारण डंपर ड्राइवर को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन गाड़ी पुल के टूटे हुए हिस्से में खतरनाक तरीके से फंस गई। हादसे की खबर फैलते ही हजारों लोग नदी के किनारे जमा हो गए। जटेश्वर चौकी और फालाकाटा थाने से भारी पुलिस फोर्स हालात को काबू करने के लिए मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस कंक्रीट पुल की हालत काफी समय से खराब थी। इसके बावजूद, भारी गाड़ियों की आवाजाही पर कंट्रोल न होने की वजह से यह भयानक हादसा हुआ। हालांकि रश आवर में हुए इस हादसे में बड़ी जान जाने की आशंका थी, लेकिन चमत्कारिक रूप से कोई घायल नहीं हुआ। इस पुल के गिरने से जटेश्वर और पंचमेल के बीच सीधा सड़क संपर्क पूरी तरह से कट गया है। इस वजह से आम लोगों और रोज़ाना आने-जाने वालों को बहुत परेशानी हुई है। पुलिस और प्रशासन डंपर को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और आगे की कार्रवाई के लिए स्थिति का रिव्यू किया जा रहा है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
फिर उत्तर बंगाल में भरभराकर गिरा पुल, लोगों में दहशत का माहौल
Author -
roamingjournalist
फ़रवरी 09, 2026
0
roamingjournalist
दो दशक से ज्यादा हो गया पत्रकारिता में हूं। नाम है दिनेश चंद्र मिश्र। देश के कई राज्यों व शहरों में काम करने का मौका मिलने के बाद दोस्तों ने मोहब्बत में नाम दिया रोमिंग जर्नलिस्ट तो इसको रखने के साथ इस नाम से ब्लॉग बना लिया। पत्रकारिता की पगडंडी से लेकर पिच तक पर कलम से की-बोर्ड तक के सफर का साक्षी हूं। दैनिक जागरण,हिंदुस्तान,अमर उजाला के बाद आजकल नवभारत टाइम्स नईदिल्ली में हूं। आपातकाल से लेकर देश-दुनिया की तमाम घटनाओं का साक्षी रहा हूं। दुनियाभर में घूमने के बाद खबरों के आगे-पीेछे की कहानी आप संग शेयर करने के लिए यह ब्लॉग बनाया हूं
दुनियाभर के घुमक्कड़ पत्रकारों का एक मंच है,आप विश्व की तमाम घटनाओं को कवरेज करने वाले खबरनवीसों के अनुभव को पढ़ सकेंगे
https://www.roamingjournalist.com/