- लापता लोगों के परिवार लगातार स्थानीय पुलिस स्टेशन और घटनास्थल के बीच लगा रहे चक्कर
कोलकाता के बाहरी इलाके नाजिराबाद में 26 जनवरी की सुबह वाव मोमो समेत दो गोदामों में आग लग गई थी। 25 जले हुए शरीर के अंगों और हड्डियों का डीएनए टेस्ट किया जा रहा है। सीएफएसएल इस मुश्किल काम में लगी हुई है, वहीं गणतंत्र दिवस पर लगी इस आग की घटना स्थल पर अभी भी पुनर्निर्माण का काम जारी है। फायर सर्विस और आपदा प्रबंधन टीमों ने मलबे को हटाने के लिए क्रेन और गैस कटर तैनात किए हैं, जबकि व्याकुल परिवार जिंदगी के किसी भी संकेत की तलाश में आसपास के क्षेत्र की छानबीन कर रहे हैं। हताशा बढ़ने के साथ ही भीड़ बढ़ती जा रही है, इसलिए पुलिस ने बड़े जमावड़ों को रोकने के लिए धारा 163 लागू कर दी है।
मैं किसी को दोष नहीं लगाना चाहता- राज्यपाल बोस
इस बीच, आग लगने के कारण और गोदामों में मौजूद फायर सेफ्टी मेकेनिज्म को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं। राज्यपाल बोस ने कहा, "मैं किसी पर दोष नहीं लगाना चाहता, लेकिन सच्चाई यही है कि संबंधित अधिकारियों की ओर से चूक हुई है, वरना इस तरह की घटनाएँ बार-बार नहीं होतीं। कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।"अधिकारियों का कहना है कि आग सुबह करीब 3 बजे लगी, हालांकि इसके सटीक कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। गोदामों में से एक पुष्पांजलि डेकोरेटर्स का है, जिसने इसे वाव मोमो को किराए पर दिया था। फायर डिपार्टमेंट के सूत्रों के मुताबिक, गोदाम में रखे ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग तेजी से फैली।
पश्चिम बंगाल के मंत्री सुजीत बोस ने मीडिया को बताया, "इस इलाके में कई कारखाने और गोदाम हैं। कुछ के पास लाइसेंस हैं, जबकि अन्य के पास नहीं हैं। हमने डेकोरेटर फर्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। हमें देखना होगा कि फायर सेफ्टी ऑडिट किया गया था या नहीं।" स्थानीय लोगों ने बताया कि यह इलाका पहले दलदली भूमि हुआ करता था और यहां गोदाम पिछले एक दशक में ही बने हैं। वाउ मोमो ने एक बयान में कहा कि मृतकों में उसके तीन कर्मचारी शामिल थे। इससे संकेत मिलता है कि बाकी लोग दूसरे गोदाम में थे।
पुलिस ने कितने लोगों को गिरफ्तार किया:
पुलिस ने इस मामले में अभी तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में पुष्पांजलि डेकोरेटर्स के मालिक गंगाधर दास भी शामिल हैं और 4 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। वाउ मोमो के दो कर्मचारी राजा चक्रवर्ती और मनोरंजन शीट को गुरुवार शाम को गिरफ्तार किया गया और हिरासत में भेज दिया गया। सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि आग लगने के समय वे कहां थे।
लापता लोगों के परिवार लगातार स्थानीय पुलिस स्टेशन और घटनास्थल के बीच चक्कर लगा रहे हैं। हरे कृष्णा मैती ने बताया कि उनके भाई श्री कृष्णा और भतीजे बापन लगभग एक दशक से गोदाम में काम कर रहे थे। ज्यादातर पीड़ित पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हैं।
कोई नहीं बता रहा हमें शव कब मिलेगा- हरे कृष्णा मैती
हरे कृष्णा मैती ने कहा, "कोई नहीं बता रहा कि हमें शव कब मिलेगा। वे बस इतना कहते हैं, ‘पुलिस स्टेशन जाओ और गुमशुदा व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज कराओ।’ हमने ऐसा ही किया और अब इंतजार कर रहे हैं। मुझे पता है कि मेरा भाई और भतीजा अब इस दुनिया में नहीं हैं। मुझे पता है कि हमारे परिवार को उनके अंतिम संस्कार के लिए कुछ भी नहीं मिलेगा।"
जले हुए गोदाम के बाहर बरनाली डोलोई अपने पति तपन के साथ हुई आखिरी बातचीत को बार-बार याद कर रही हैं। तपन एक फूल सजाने का काम करते थे और परिवार के इकलौते कमाने वाले थे। तपन अपने पीछे पत्नी, पांच साल का बेटा और बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ गए हैं। उसने कहा, "उसने कहा कि वह थक गया है और सोने जा रहा है। उसे अगले दिन घर आना था।"
बसुदेब हलदर ने अपनी बेटी को आखिरी बार सुबह करीब 3 बजे फोन किया था, जब आग पहले से ही भयंकर रूप से फैल रही थी। उनके रिश्तेदार प्रशांत हलदर ने बताया, “उन्होंने कहा कि वे अंदर फंस गए हैं, दरवाजा बाहर से बंद है और अब समय नहीं बचा है।” बचे हुए लोगों ने दहशत और अफरा-तफरी से भरी उस रात का ब्योरा दिया। सुसंता जाना ने बताया कि लंबी शिफ्ट के बाद मजदूर सोने की तैयारी कर रहे थे तभी आग लग गई।
उन्होंने कहा, "अचानक, मैंने लोगों को आग आग चिल्लाते सुना। हम मेन गेट के पास थे और मुझे आग की लपटों की गर्मी करीब आती महसूस हो रही थी। चारों तरफ अंधेरा छा गया था। हम गेट की ओर भागे, किसी तरह उसे खोलकर मदद के लिए दौड़े।" बिमल भौमिक ने धुएं के बढ़ते जाने का मंजर याद करते हुए बताया, "हम एक-दूसरे को पुकार रहे थे। भागते समय मैं गिर गया, लेकिन उठने में कामयाब रहा। लेकिन धुआं घना होता जा रहा था। अगली बात जो मुझे याद है, वह यह है कि मैं एक एम्बुलेंस में जागा।"
राजनीतिक विवाद का मुद्दा बना अग्निकांड
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मृतकों के परिजनों के लिए पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50000 रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की। तृणमूल कांग्रेस ने 10 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही यह घटना राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गई। भारतीय जनता पार्टी के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने धलाई ब्रिज से नरेंद्रपुर पुलिस स्टेशन तक विरोध मार्च का नेतृत्व किया और लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, वहीं सीपीआई (एम) ने सवाल उठाया कि वाव मोमो के संस्थापकों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।
सीपीआई (एम) नेता सुजान चक्रवर्ती ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया , "हम पूरे राज्य में जो हो रहा है उसे देख रहे हैं।" सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया के एक प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने घटनास्थल का दौरा करने से रोक दिया। गुरुवार को जारी एक बयान में वाव मोमो ने कहा कि आग पड़ोसी परिसर से शुरू हुई। इसमें कहा गया है, "इस आग ने न केवल हमारे लोगों को, बल्कि हमारी आत्मा को भी अपनी चपेट में ले लिया है। इस पूरी त्रासदी में हमने अपने दो सम्मानित कर्मचारियों और एनआईएस के सिक्योरिटी गार्ड को खो दिया है, जिससे हमारा हृदय गहरे शोक और पीड़ा से भरा हुआ है।" कंपनी ने अपने दिवंगत कर्मचारियों के लिए मुआवजे की घोषणा की। इसमें 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि शामिल है। ( बंगाल से अशोक झा की रिपोर्ट )
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