बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आज माहौल अचानक गरमा गया. भारतीय हाई कमीशन के पास कट्टरपंथियों ने जोरदार प्रदर्शन किया. 'जुलाई ओइक्या' नाम के संगठन ने भारत विरोधी मार्च निकाला। हजारों की भीड़ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस लाने की जिद पर अड़ी है। प्रदर्शनकारियों के नारे लगाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं उन्हें 'वह भारत जो हत्यारों को पनाह देता है, इसे तोड़ दो' और 'वह भारत जो हसीना को पनाह देता है, उसे तोड़ दो' के नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। ये लोग हाई कमीशन का घेराव करने निकले थे। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली और ढाका को लेकर जमकर नारेबाजी की। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। भारी पुलिस बल ने गुलशन इलाके में ही जुलूस को रोक दिया। क्या है कट्टरपंथियों की मांग? पुलिस ने कैसे रोका रास्ता? यह प्रदर्शन जुलाई विद्रोह से जुड़े युवा कट्टरपंथी कर रहे हैं। उनकी मांग है कि शेख हसीना और पिछले साल आंदोलन के दौरान भारत गए लोगों को तुरंत वापस भेजा जाए। पुलिस ने हाई कमीशन के बाहर सुरक्षा का कड़ा पहरा लगा दिया है। बैरिकेडिंग कर दी गई है ताकि कोई भी प्रदर्शनकारी हाई कमीशन के करीब न पहुंच सके।पुलिस ने साफ कर दिया है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। फिलहाल इलाके में तनाव बना हुआ है। भारत सरकार ने बांग्लादेश में भारतीय मिशन की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने बुधवार को भारत में तैनात बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह को तलब किया और ढाका में सुरक्षा हालात पर गहरी चिंता जताई।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कुछ चरमपंथी तत्वों की गतिविधियों पर भारत की कड़ी नजर है, जिन्होंने ढाका में भारतीय मिशन के आसपास सुरक्षा स्थिति पैदा करने की घोषणा की है।मंत्रालय ने उच्चायुक्त को बताया कि बांग्लादेश में सुरक्षा माहौल लगातार बिगड़ रहा है और यह भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
भारत ने हाल की घटनाओं को लेकर फैलाए जा रहे कथित झूठे नैरेटिव को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने न तो निष्पक्ष जांच कराई है और न ही भारत के साथ ठोस सबूत साझा किए हैं।
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत और बांग्लादेश के लोगों के बीच ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दायित्वों के तहत भारतीय मिशन और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बांग्लादेश सरकार की जिम्मेदारी है।
भारत ने उम्मीद जताई है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इस दिशा में तत्काल और प्रभावी कदम उठाएगी।प्रदर्शनकारी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को दिल्ली से वापस ढाका लाने की मांग कर रहे हैं और भारत तथा बांग्लादेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए बांग्लादेश सरकार ने भारतीय उच्चायोग के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की हिंसा या अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्क नजर आ रही हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। हालात को देखते हुए ढाका स्थित भारतीय वीजा केंद्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। वीजा केंद्र की ओर से इसकी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर साझा की गई है। बताया गया है कि सुरक्षा कारणों से अगली सूचना तक सभी सेवाएं स्थगित रहेंगी।इस बीच, हिंसक प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के राजदूत को तलब किया। भारत सरकार ने ढाका में चल रहे भारत विरोधी अभियानों पर नाराजगी जाहिर की और भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने बांग्लादेश से कहा है कि वह राजनयिक परिसरों की सुरक्षा से कोई समझौता न करे। यूनुस के भाषण बाद बढ़ा बवाल: दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि मंगलवार को दिए गए बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के भाषण से जुड़ी मानी जा रही है। मंगलवार (16 दिसंबर) को देश के नाम संबोधन में यूनुस ने आरोप लगाया था कि शेख हसीना चुनाव के दौरान ढाका लौटने की योजना बना रही हैं और इसके लिए एक साजिश रची जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बांग्लादेश को जानबूझकर अस्थिर करने की कोशिश हो रही है।
यूनुस ने हाल ही में ढाका में उस्मान हादी पर हुए हमले का जिक्र करते हुए उसे भी शेख हसीना से जोड़ दिया था। उनके इस बयान के बाद जुलाई आंदोलन से जुड़े कुछ विद्रोही गुटों ने भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन करने का ऐलान किया, जो अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा की रिपोर्ट )
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