पंडित अशोक झा
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर हजारों कन्याओं को उसकी कैद से मुक्त कराया था. जानें इस पर्व की पौराणिक कथा और मुहूर्त कुछ इस प्रकार है। दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली का पर्व मनाया जाता है. इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में छोटी दीवाली आज यानी 7 नवंबर, शनिवार को मनाई जा रही है. हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का अंत करके हजारों कन्याओं को उसकी कैद से आजाद कराया था. इसी खुशी में छोटी दिवाली मनाने की परंपरा शुरू हुई. इस दिन सुबह स्नान करने और शाम को दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है. आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा और पूजा के शुभ समय के बारे में।
छोटी दिवाली की पौराणिक कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में नरकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर था. उसे भौमासुर के नाम से भी जाना जाता था. उसके अत्याचारों से धरती और स्वर्ग के लोग परेशान थे. उसने कई राजाओं और देवताओं को भी संकट में डाल दिया था. इतना ही नहीं, उसने करीब 16 हजार कन्याओं को बंदी बना लिया था. कहा जाता है कि नरकासुर को वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु किसी स्त्री के हाथों ही होगी। उसके बढ़ते अत्याचारों से परेशान होकर देवराज इंद्र भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंचे और उनसे मदद मांगी। इंद्र की बात सुनकर श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत करने का फैसला किया।
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