- चार लोगों को बचाया गया, दो के शव मिले, सरकार की नजर है पूरे मामले पर
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: बंगाल के पांच दोस्तों के लिए पहाड़ों की सैर सिर्फ घूमने का शौक नहीं, बल्कि जिंदगी का एक खास हिस्सा थी। करीब 20 हजार रुपये महीने की नौकरी करने वाले ये दोस्त पूरे साल पैसे बचाते थे, ताकि साल में एक बार उत्तराखंड के पहाड़ों पर जा सकें।इस घटना के संबंध में एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को जानकारी दी. बांकुरा के लापता ट्रैकर्स की पहचान तापस बाउरी, रतन घोष, रिंटू मंडल, उदय घोष और मनोज खवास के रूप में हुई है। पहले चार सालबानी गांव के निवासी हैं, जबकि मनोज उसी जिले के केशरा गांव के रहने वाले हैं. अन्य तीन लापता सदस्यों में से दो उत्तर प्रदेश के लखनऊ से और एक उत्तराखंड के उत्तरकाशी से हैं। बांकुरा के पांचों ट्रैकर्स 24 अक्टूबर को उत्तराखंड के लिए रवाना हुए थे और उन्हें नवंबर की शुरुआत में घर लौटना था. इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने लापता ट्रैकर्स की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है। अधिकारी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, "उत्तराखंड के केदारताल ट्रैक के दौरान खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण लापता हुए बांकुरा के पांच युवा ट्रैकर्स के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की है." उन्होंने कहा कि उनकी सरकार स्थिति पर नजर रखने के लिए उत्तराखंड सरकार और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के साथ लगातार संपर्क में है. उन्होंने कहा, "नई दिल्ली स्थित हमारे रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय और राज्य आपदा प्रबंधन चैनलों के माध्यम से, हम अपने लड़कों को खोजने और बचाने के लिए चल रहे व्यापक खोज और बचाव अभियान पर नियमित रूप से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन इस बार उनका यही शौक परिवारों के लिए चिंता और इंतजार की वजह बन गया है। उत्तराखंड के केदारताल इलाके में बर्फबारी और हिमस्खलन के बाद ये पांचों दोस्त लापता हो गए हैं। इस हादसे में कुल आठ ट्रेकर्स लापता हुए थे। मंगलवार को इनमें से दो लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि छह की तलाश जारी है। लापता पांच दोस्तों की पहचान रिंटू मंडल (40), उदय घोष (30), रतन घोष (23), तपस बाउरी (30) और मनोज खवास (39) के रूप में हुई है। ये सभी पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के रहने वाले हैं। इनमें से चार दोस्त सालबोनी गांव और मनोज खवास केशरा गांव का रहने वाला है। परिवार के मुताबिक, सभी को पहाड़ों से बेहद लगाव था और वे हर साल घूमने के लिए पैसे बचाते थे। पांच साल से हर साल जा रहे थे उत्तराखंड: रिंटू मंडल के भाई सिंटू मंडल ने बताया कि पांचों दोस्तों का यह उत्तराखंड का पांचवां दौरा था। इससे पहले वे उत्तराखंड के अलग-अलग धामों और पर्यटन स्थलों के अलावा दार्जिलिंग और नेपाल भी जा चुके थे। इस बार वे केदारताल घूमना चाहते थे, जहां वे पहले कभी नहीं गए थे।
सिंटू के मुताबिक, पांचों दोस्त फैक्ट्रियों और दूसरे संस्थानों में काम करते हैं। उनकी महीने की कमाई करीब 20 हजार रुपये है। इतनी कम आमदनी में घर चलाने के साथ घूमने के लिए पैसे बचाना आसान नहीं था, लेकिन पहाड़ों के प्रति उनका प्यार उन्हें हर साल यात्रा के लिए प्रेरित करता था। उन्होंने घूमने के लिए ट्रेकिंग जैकेट और जूते तक अपनी बचत से खरीदे थे।
शादी में नहीं थी दिलचस्पी, हर साल पहाड़ों पर जाने का रहता था इंतजार: 40 साल के रिंटू मंडल को पांचों दोस्तों के ग्रुप का लीडर बताया जा रहा है। वह स्थानीय स्पंज आयरन फैक्ट्री में काम करते थे और करीब 19 हजार रुपये महीने कमाते थे। रिंटू अपने भाई सिंटू, उसकी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे। सिंटू ने बताया कि रिंटू काफी मिलनसार थे और इलाके में लोकप्रिय भी थे। उन्हें शादी करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वह पूरे साल पहाड़ों की यात्रा का इंतजार करते थे और इसके लिए पैसे बचाते रहते थे। वहीं, उदय घोष बांकुरा की एक रबर फैक्ट्री में काम करते थे और करीब 20 हजार रुपये महीने कमाते थे। वह भी अविवाहित थे। उनके भाई मलय घोष ने बताया कि उदय इस बार केदारताल देखना चाहते थे। पिछले चार साल में वे उत्तराखंड के कई धाम और दूसरी जगहें घूम चुके थे, लेकिन केदारताल नहीं जा पाए थे।मलय के मुताबिक, उदय अपनी सारी बचत सालाना यात्रा पर खर्च कर देते थे। उन्होंने परिवार का घर बनाने के बाद शादी करने का फैसला किया था। घर की पहली मंजिल की छत बन चुकी थी और बाकी निर्माण धीरे-धीरे कराने की योजना थी।
उदय के पिता दिनेश घोष को अब भी उम्मीद है कि उनका बेटा सुरक्षित घर लौट आएगा। उन्होंने बताया कि प्रशासन के अधिकारी घर आकर उन्हें बर्फ में फंसे होने की जानकारी दे चुके हैं, लेकिन परिवार को भरोसा है कि उदय जिंदा वापस आएंगे।
तपस बाउरी भी स्पंज आयरन फैक्ट्री में काम करते थे और अपने माता-पिता और भाई के साथ रहते थे। वहीं, रतन घोष और मनोज खवास एक लैंड डेवलपर के ऑफिस में काम करते थे। भाई से आखिरी बार 26 अक्टूबर को हुई थी बात
रिंटू के भाई सिंटू ने बताया कि पांचों दोस्त 24 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल से उत्तराखंड के लिए निकले थे। 26 अक्टूबर को उनकी आखिरी बार रिंटू से बात हुई थी। उस दौरान रिंटू ने बताया था कि कुछ दिनों तक नेटवर्क नहीं मिलने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पाएगा।
इसके बाद परिवार को कोई जानकारी नहीं मिली। सोमवार को करीब एक हफ्ते बाद स्थानीय प्रशासन के अधिकारी रिंटू समेत बाकी चार दोस्तों के परिवारों के घर पहुंचे और उन्हें बताया कि उनके बेटे लापता हैं। इस खबर के बाद से सभी परिवार परेशान हैं और अपने लोगों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
लापता ट्रेकर्स में बंगाल के पांच दोस्तों के अलावा, यूपी की दो महिलाएं भी शामिल हैं।
केदारताल में कैसे लापता हुए आठ ट्रेकर्स?:
यह घटना उत्तराखंड के केदारताल इलाके की है, जहां 12 सदस्यों का एक ट्रेकिंग दल भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की चपेट में आ गया। इस दल में सात ट्रेकर्स, एक गाइड, एक कुक और तीन पोर्टर शामिल थे। सभी 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुए थे। अधिकारियों के मुताबिक, दल को 26 अक्टूबर को तीन दिनों के ट्रेक की अनुमति दी गई थी। उन्हें 29 अक्टूबर तक वापस लौटना था। हालांकि, 27 अक्टूबर को सुबह करीब 10:30 से 11 बजे के बीच प्रशासन को खराब मौसम का अलर्ट मिला था। इसमें 29 अक्टूबर को मौसम बिगड़ने की चेतावनी दी गई थी। लेकिन अधिकारियों की टीम ट्रेकिंग दल से संपर्क नहीं कर पाई और उन्हें इस चेतावनी की जानकारी नहीं दी जा सकी।30 अक्टूबर को जब दल वापस नहीं लौटा, तब प्रशासन को जानकारी मिली कि उसके सदस्य भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण रास्ते में फंस गए हैं। इसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया।
चार लोगों को बचाया गया, दो के शव मिले: 31 अक्टूबर को बचाव दल ने केदारताल मार्ग पर कच्ची ढांग के नीचे चार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। इनमें तीन पोर्टर और एक कुक शामिल थे। हालांकि, बाकी आठ लोग लापता थे। इनमें पश्चिम बंगाल के पांच ट्रेकर्स, उत्तर प्रदेश की दो महिलाएं और उत्तरकाशी का 25 वर्षीय स्थानीय गाइड शामिल हैं।
हिमस्खलन के कारण बचाव अभियान में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रेकिंग रूट पर करीब 10 से 12 जगहों पर हिमस्खलन हुआ था। सोमवार को बचाव दल को केदारकड़क इलाके के पास एक टेंट, बैग और अन्य सामान मिला था। इसके बाद टीम ने आसपास बर्फ हटाकर तलाश शुरू की।
पांचवें दिन दो शव बरामद, छह की तलाश जारी
मंगलवार को बचाव अभियान के पांचवें दिन SDRF और नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) की संयुक्त टीम ने दो लोगों के शव बरामद किए। इनमें एक पुरुष और एक महिला का शव शामिल है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक उनकी पहचान नहीं हो पाई थी।
उत्तरकाशी जिला आपातकालीन संचालन केंद्र के मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब 7:30 बजे तलाश अभियान शुरू किया गया था। काफी मशक्कत के बाद टीम को सफलता मिली। दोपहर करीब 3 बजे मौसम और परिस्थितियों को देखते हुए अभियान रोक दिया गया और बचाव दल बेस कैंप लौट आया।
हादसे वाली जगह करीब 4,005 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां हेलीकॉप्टर से बचाव अभियान को आसान बनाने के लिए एक वैकल्पिक हेलीपैड भी तैयार किया गया है। अब बुधवार को फिर से तलाश अभियान शुरू किया जाएगा।
फिलहाल छह लापता लोगों की तलाश जारी है। दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल के इन पांच दोस्तों के परिवारों की नजरें उत्तराखंड से आने वाली हर खबर पर टिकी हैं। जिन पहाड़ों पर जाने के लिए उन्होंने पूरे साल मेहनत और बचत की थी, उन्हीं पहाड़ों में अब उनके सुरक्षित लौटने की दुआएं की जा रही हैं।
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