- सभी नोट 500 के, बैग में 280 बांदलमे रखे हुए थे नोट
- टीएमसी पार्टी ऑफिस से करोड़ो रुपये बरामद होने से शुरू हुई राजनीति
अशोक झा/ कोलकाता: पश्चिम मिदनापुर जिले के खड़गपुर स्टेशन से 1.4 करोड़ रुपए बरामद किए गए। यह रकम झारखंड के टाटानगर से पश्चिम बंगाल के हावड़ा ले जाई जा रही थी। गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने इसे पकड़ लिया। घटना के संबंध में एक यात्री को भी गिरफ्तार किया गया है।
खड़गपुर जीआरपी के एक अधिकारी के अनुसार, घटना सुबह के समय हुई। राहुल सोनी जन शताब्दी एक्सप्रेस से टाटानगर से हावड़ा जा रहा था। जब ट्रेन खड़गपुर स्टेशन पर रुकी, तो ड्यूटी पर तैनात जीआरपी कर्मियों को उसकी हरकतों पर शक हुआ।
वह खड़गपुर के प्लेटफार्म नंबर सात पर एक बैग पीठ पर और दो बैग हाथ में लिए खड़ा था। अधिकारी के अनुसार, जीआरपी कर्मियों के आगे बढ़ने पर राहुल ने भागने की कोशिश की। हालांकि, आखिरकार उसे पकड़ लिया गया। जीआरपी कर्मियों द्वारा पूछताछ शुरू करने पर राहुल अस्पष्ट जवाब देने लगा। इससे उनका संदेह और भी बढ़ गया। अंततः, जैसे ही उन्होंने उसके बैग की तलाशी ली तो ड्यूटी पर तैनात जीआरपी कर्मियों को बैग में 500 रुपए के नोटों के बंडल मिले।उसके पास से नोटों के कुल 280 बंडल बरामद किए गए। राहुल इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं दे सका कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई। इसलिए, खड़गपुर जीआरपी ने उसे हिरासत में लिया और आयकर विभाग को सूचित किया। बाद में, उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार भी कर लिया गया। रेलवे पुलिस अधीक्षक (खड़गपुर) जयंत मुखर्जी ने बताया कि इतनी बड़ी रकम के स्रोत का पता लगाने के लिए यात्री से पूछताछ की जा रही है। जीआरपी अधिकारी के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति का घर हावड़ा में है। पूछताछ के दौरान, उसने स्वीकार किया कि वह टाटानगर से हावड़ा पैसा ला रहा था। हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि वह टाटानगर में किससे और किस उद्देश्य से पैसा ला रहा था।बरामद होने की खबरें आती रहती हैं। कई लोग नकदी के स्रोत का खुलासा न कर पाने के कारण पकड़े भी जाते हैं। इस बार, खड़गपुर स्टेशन से एक करोड़ रुपए से अधिक की नकदी बरामद की गई है।संयोगवश, इस खबर के सामने आने से कुछ ही समय पहले, डायमंड हार्बर पुलिस ने दक्षिण 24 परगना जिले के सरिशा में तृणमूल कांग्रेस पार्टी के एक कार्यालय से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि बरामद की थी।
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी एर किया हमला कहा यह उनकी एक दिन की कमाई : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने इस बरामदगी को बड़े भ्रष्टाचार का छोटा हिस्सा बताया है। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
डायमंड हार्बर में TMC कार्यालय से 1.02 करोड़ रुपये बरामद
पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई दक्षिण 24 परगना जिले के सरिषा इलाके में की गई। यह इलाका डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पुलिस ने यहां टीएमसी कार्यालय की तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान अधिकारियों को 1 करोड़ 2 लाख 79 हजार रुपये नकद मिले। इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने उसके स्रोत की जांच शुरू कर दी है।
इस कार्रवाई की जानकारी डायमंड हार्बर पुलिस जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक मजूमदार ने दी। उन्होंने बताया कि पुलिस को पूछताछ के दौरान कुछ अहम सुराग मिले थे। इन्हीं जानकारियों के आधार पर कार्यालय में तलाशी अभियान चलाया गया। शुरुआती रिपोर्टों में इस कार्यालय को मगराहट पश्चिम के विधायक शमीम अहमद से जुड़ा बताया गया है। हालांकि, पुलिस अधिकारी ने कार्यालय के संचालन और नकदी के मालिकाना हक को लेकर अंतिम पुष्टि नहीं की है। इसलिए इस मामले में जांच पूरी होने का इंतजार करना जरूरी है।
सुमित रॉय से पूछताछ के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
इस पूरे मामले में सुमित रॉय का नाम भी चर्चा में है। वह TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी बताए जाते हैं। पुलिस उनसे कथित जमीन कब्जाने और मिट्टी की अवैध बिक्री से जुड़े मामले में पूछताछ कर रही थी। इसी पूछताछ के दौरान पुलिस को कुछ जानकारियां मिलने की बात सामने आई है।
डायमंड हार्बर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, पूछताछ के बाद पुलिस ने सरिषा स्थित कार्यालय की तलाशी ली। इस दौरान भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम कहां से आई थी। इसके अलावा, इस पैसे का इस्तेमाल किस काम के लिए होना था, इसकी भी जांच की जा रही है।CM शुभेंदु अधिकारी का ममता और अभिषेक बनर्जी पर हमला
नकदी बरामदगी के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विपक्षी खेमे पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह रकम बड़े भ्रष्टाचार का केवल छोटा सा हिस्सा है। उनके मुताबिक, पश्चिम बंगाल में सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का नाम भी लिया। अधिकारी ने दावा किया कि सरकारी खजाने का पैसा पार्टी कार्यालयों तक पहुंचाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पैसे को विदेशों में भेजा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अपनी बात रखी। अधिकारी ने बरामद रकम को कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर पेश किया। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, मुख्यमंत्री के ये बयान राजनीतिक आरोप हैं, जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं। अभी पुलिस को बरामद रकम का स्रोत और मालिकाना हक साबित करना है।
TMC ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल, बताया साजिश
मुख्यमंत्री के आरोपों के बाद तृणमूल कांग्रेस ने भी जवाब दिया। पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। TMC का आरोप है कि सरकार पार्टी को बदनाम करना चाहती है। पार्टी के मुताबिक, कार्यालय में जानबूझकर नकदी रखकर झूठे सबूत तैयार किए गए। उसने पुलिस और राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
TMC पक्ष ने कार्यालय को लेकर एक और दावा किया। पार्टी का कहना है कि संबंधित परिसर को पहले ही खाली कर दिया गया था। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि मई में कार्यालय में तोड़फोड़ हुई थी। उसके वकील ने सुमित रॉय से पूछताछ को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पुलिस हिरासत में दबाव बनाने की बात कही। हालांकि, पुलिस की तरफ से इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए फिलहाल दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। पुलिस की जांच से ही नकदी के स्रोत का पता चलेगा।
अभिषेक बनर्जी और पुराने भ्रष्टाचार मामलों का राजनीतिक संदर्भ
इस नकदी बरामदगी के बाद अभिषेक बनर्जी का नाम फिर चर्चा में आया है। इससे पहले भी उनका नाम कई राजनीतिक और जांच संबंधी विवादों में सामने आया है। इनमें कोयला तस्करी और शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले प्रमुख हैं। हालांकि, किसी मामले में नाम आना अपने आप अपराध साबित नहीं करता। आरोप, जांच और अदालत में दोष साबित होना अलग-अलग बातें हैं।
कोयला तस्करी मामले में क्या सामने आया?
पश्चिम बंगाल में अवैध कोयला खनन और तस्करी को लेकर CBI ने जांच की थी। इस मामले में अनूप माझी उर्फ लाला का नाम प्रमुखता से सामने आया। जांच में ईस्टर्न कोलफील्ड्स के कुछ कर्मचारियों की कथित भूमिका भी सामने आई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच की। सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले में इस जांच का विस्तृत उल्लेख मिलता है। अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी को भी ED ने पूछताछ के लिए समन भेजे थे। हालांकि, इन तथ्यों से उनके खिलाफ आरोप अपने आप साबित नहीं होते। हालांकि अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यह पैसा पुलिस ने रखा है।
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