वाराणसी। वरुण संध्या के सांस्कृतिक आयोजन में शास्त्रीय संगीत की विविध प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में कोलकोता से पधारे वायलिन वादन और तबला वादन के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा की सुंदर झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम की प्रमुख प्रस्तुतियों में सौपर्णो घोष का वायलिन वादन रहा। सौपर्णो घोष, पं साकेत साहू एवं उस्ताद वसीम अहमद खान के शिष्य हैं। उन्होंने वायलिन एकल प्रस्तुति के दौरान राग यमन में द्रुत एकताल की छोटी गत से शुरुआत की। इस दौरान ‘आदि देव महादेव’ बंदिश की प्रस्तुति ने श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
इसके बाद उन्होंने ‘मोहे पनघट पे नंदलाला’, ‘गंगा के किनारे’ और ‘एक राधा एक मीरा’ जैसी लोकप्रिय रचनाओं को वायलिन के सुरों में प्रस्तुत किया। भावपूर्ण धुनों और शास्त्रीय संगीत की बारीकियों से सजी इन प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया।
कार्यक्रम में सुमन सरकार ने तबला एकल वादन प्रस्तुत किया। सुमन सरकार, पं उज्ज्वल भारती के शिष्य हैं। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
तबला एकल प्रस्तुति के दौरान सुमन सरकार ने तीनताल में बनारस घराने की शैली में अपनी प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति में तबले की विभिन्न तकनीकों, लयकारी और ताल की बारीकियों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। बनारस घराने की विशिष्ट वादन शैली ने प्रस्तुति को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
वरुण संध्या के मंच पर वायलिन के मधुर सुरों और तबले की सधी हुई ताल ने श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की विविधता और गहराई से रूबरू कराया। कार्यक्रम में प्रस्तुत रचनाओं ने पारंपरिक संगीत की विरासत को आधुनिक मंच पर प्रभावी ढंग से सामने रखा। संगीत प्रेमियों ने दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और उनकी कला की सराहना की।
कलाकारों को प्रमाण पत्र एवं अंगवस्त्रम दीपिका कल्चरल सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने प्रदान किया धन्यवाद ज्ञापन परिषद के अभियंता सचिन कुमार श्रीवास्तव ने ज्ञापित किया आयोजन में युवा कथक नृत्यांगना श्रीजा विश्वास,बासुरी वादक योगेंद्र कुमार , पं दुर्गा प्रसन्ना धीरज पटेल, यज्ञदत्त सहित काफी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे
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