काशी की विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला से देश प्रेमियों को राम-राम, देशद्रोहियों को लट्ठ करेगा सलाम
वाराणसी के रामनगर की रामलीला 31 दिनों तक चलने वाला विश्व-प्रसिद्ध पारंपरिक आयोजन है, जिसकी शुरुआत 18वीं शताब्दी (लगभग 1783) में काशी नरेश महाराजा उदित नारायण सिंह के शासनकाल में हुई थी। यूनेस्को के विश्व धरोहरों की सूची में वाराणसी के रामनगर की रामलीला शामिल है।
इसमें किसी भी प्रकार के माइक्रोफोन, डीजे, लाउडस्पीकर या आधुनिक कृत्रिम रोशनी का उपयोग नहीं होता है। मशाल और पारंपरिक प्रकाश का उपयोग होता है।
मंचन किसी एक स्थान पर नहीं, बल्कि कई किलोमीटर (लगभग 4 से 10 किमी) के दायरे में फैले विभिन्न स्थायी/अस्थायी स्थानों (जैसे अयोध्या, जनकपुर, लंका, चित्रकूट) में होता है।
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