- यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है,पूरे इलाके में अफरा तफरी का माहौल
- मरने वालों में एक ही परिवार के पांच लोग, जिलाधिकारी मौके पर
अशोक झा/ पटना: बिहार के सीवान जिले के जामो थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में शुक्रवार शाम पटाखा बनाने के दौरान हुए भीषण विस्फोट में करीब 7 लोगों की मौत हो गई।यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है।ग्रामीणों के अनुसार, मृतकों में एक ही परिवार के पांच लोग शामिल हैं। पटाखा कारोबारी अमीरुद्दीन, इनकी तीन पोतियां, एक पोता के अलावा दो मजदूरों की बात सामने आई है। हालांकि सीवान के डीएम विजय प्रकाश मीणा ने कहा कि अभी तक दो-तीन लोगों के ही शव बरामद किए जा सके हैं। अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका है। बचाव दल घर में प्रवेश कर रहा है। पूरी तरह छानबीन के बाद ही सही संख्या का पता चल पाएगा। धमाका शाम करीब साढ़े 5 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हादसे के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। तेज धमाकों की आवाज से दहशत फैल गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। किसी को यह पता नहीं चल रहा था कि विस्फोट किधर हुआ है। बाद में लोगों को पता चला कि पटाखा कारोबारी अमीरूद्दीन के घर में ही विस्फोट हुआ है।
घर क्षतिग्रस्त, शवों के चीथड़े उड़ गए: बताया गया है कि शुक्रवार को रोजाना की तरह घर के भीतर पटाखे बनाए जा रहे थे। इसी दौरान अचानक आग लग गई और देखते ही देखते पटाखों में विस्फोट होने लगे। लगातार हो रहे धमाकों से मकान का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। विस्फोट इतना भयावह था कि तीन लोगों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत होकर घर के बाहर जा गिरे। घटनास्थल का दृश्य बहुत ही भयावह नजर आया। इस घटना के बाद पूरे गांव में खौफ का माहौल है। पटाखा कारोबारी की बहू की बच गई जान: हादसे के दौरान आग लगने की जानकारी मिलते ही अभिरुद्दीन की बहू किसी तरह घर से बाहर निकलने में सफल रही और अपनी जान बचा ली। वहीं, विस्फोट के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। हादसे की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।धमाके की सूचना मिलते ही सदर एसडीओ आशुतोष गुप्ता, महाराजगंज एसडीपीओ अमन और बड़हरिया, जामो तथा गोरेयाकोठी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। दमकल की गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और हादसे से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटानी शुरू की। एसडीपीओ के मुताबिक, आग बुझाने के बाद घटनास्थल की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि धमाका किस वजह से हुआ और मकान में पटाखा बनाने के लिए किस तरह की सामग्री रखी गई थी। 20 साल पहले लिया था पटाखा बनाने का लाइसेंस
सीवान के एसपी भारत सोनी ने बताया कि संबंधित व्यक्ति ने करीब 20 साल पहले पटाखे बनाने का लाइसेंस लिया था। हालांकि, हादसे के समय लाइसेंस वैध था या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। यह पहलू इसलिए अहम है, क्योंकि पटाखों के निर्माण और भंडारण में विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल होता है। ऐसे काम के लिए निर्धारित नियमों, सुरक्षा मानकों और लाइसेंस की शर्तों का पालन जरूरी है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि पटाखे बनाने की जगह पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं और घनी आबादी वाले क्षेत्र में इस तरह का काम किन शर्तों के तहत किया जा रहा था। घनी आबादी के बीच चल रहा था पटाखा निर्माण : जिस मकान में धमाका हुआ, वह घनी आबादी वाले इलाके में स्थित बताया जा रहा है। ऐसे क्षेत्र में पटाखे बनाने या बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखने से हादसे का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मकान में कितनी मात्रा में बारूद या अन्य ज्वलनशील सामग्री रखी गई थी। विस्फोट का सटीक कारण भी जांच के बाद ही सामने आएगा। दिवाली से पहले हादसे ने बढ़ाई चिंता: दिवाली से पहले पटाखों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री से जुड़े सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी हो जाता है। सीवान की घटना ने पटाखा निर्माण इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था और लाइसेंस की जांच की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। हालांकि, बिहार में इस इकाई से कितने पटाखों की सप्लाई होती थी और इसका कारोबार किन इलाकों तक फैला था, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। प्रशासन की जांच से ही स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे तकनीकी चूक, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
धमाका किस वजह से हुआ और क्या पटाखे बनाने के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था?
पटाखा निर्माण का लाइसेंस हादसे के समय वैध था या नहीं?घनी आबादी वाले इलाके में पटाखे बनाने और सामग्री रखने की अनुमति किन शर्तों पर दी गई थी?
मकान में कितनी विस्फोटक सामग्री रखी गई थी और उसकी निगरानी कैसे हो रही थी? क्या इस इकाई से स्थानीय बाजारों या दूसरे जिलों में पटाखों की सप्लाई होती थी?
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