-सवाल यह कि क्यों कट्टरपंथी ताकतें इस्लाम के दिन इलाही के बताए रास्ते को भूल जाते है
-क्रांतिकारी कवि काजी नजरुल इस्लाम जैसे विचारकों ने मां दुर्गा की तुलना 'भारत माता' से
- क्यों बंगाल में भाजपा के जीत के बाद मौलाना इनायतुल्लाह अब्बासी दे रहे हिंदुओं को धमकी
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: पड़ोसी राष्ट्रबांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान हिंदुओं के उत्पीड़न के मामले बढ़ गए हैं। पिछले कुछ दिनों में मंदिरों पर हमले, मूर्तियों को खंडित करने और हिंसा की अन्य घटनाओं के कुल 34 मामले सामने आए हैं। इससे वहां रहने वाले हिंदुओं में भय का माहौल बढ़ गया है। सवाल उठता है कि ऐसे कट्टरपंथी कैसे इस्लाम में दिन इलाही के सार्थक बातों को भूल जाते है। वे एक बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद और महानगर सर्वजनिन पूजा समिति ने हालात पर चिंता जताते हुए अधिकारियों से हिंदुओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। बांग्लादेश में मंदिरों पर हमले के 34 मामले सामने आए: मिली जानकारी के अनुसार, दोनों संगठनों ने गुरुवार को ढाका स्थित ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर परिसर में प्रेसवार्ता करके अपनी आवाज उठाई। यह प्रेसवार्ता शारदीय दुर्गा पूजा से पहले आयोजित की गई थी। बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद के महासचिव संतोष शर्मा ने कहा, इस साल मूर्तियों को खंडित करने, मंदिरों पर हमले और इस तरह की अन्य घटनाओं के कुल 34 मामले अब तक सामने आए हैं.
संगठनों ने बयान जारी कर कहा कि सिलहट, राजबाड़ी, पंचगढ़ और टांगाइल सहित कई जिलों में त्योहार की तैयारियों के दौरान मूर्तियों को खंडित करने और मंदिरों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। संगठनों के नेताओं ने जोर दिया कि धार्मिक त्योहारों को सभी समुदायों के लोगों को एकजुट करना चाहिए और बांग्लादेश की सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि दुर्गा पूजा शांतिपूर्ण तरीके से और बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न होगी। इसके पहले भी बांग्लादेश के कट्टरपंथी मौलाना इनायतुल्लाह अब्बासी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की जीत के बाद भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला है। इन दिनों बांग्लादेश में दुर्गापूजा को लेकर भी अनाप शनाप बोला जा रहा है। इस मौलाना ने कहा है कि उसने कहा है कि अगर पश्चिम बंगाल में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं, तो बांग्लादेश में हिंदुओं को भी सुरक्षित रहने नहीं दिया जाएगा। इनायतुल्लाह अब्बासी इससे पहले भी भारत को धमकी देता रहा है। उसने 2023 में मदरसों को हथियारों से लैस कर मिलिट्री बेस बनाने की सलाह दी थी। इसके अलावा उसने धमकी दी थी कि बांग्लादेशी मुसलमान नई दिल्ली पर इस्लामिक झंडा फहराएंगे।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की धमकी दी: मौलाना इनायतुल्लाह अब्बासी ने कहा, "भारत में हिंदुओं के लिए—यहूदी मॉडल की तरह—एक हिंदू-केंद्रित व्यवस्था बनाना नामुमकिन हो जाएगा। बीजेपी, जिसने अब पश्चिम बंगाल में सत्ता संभाल ली है, पहले से ही इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। बीफ बेचने वाली दुकानों को तोड़ा जा रहा है और मुसलमानों पर जुल्म और अत्याचार किए जा रहे हैं। इसका हर हाल में विरोध किया जाना चाहिए। जबकि दुर्गापुजाको राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रवाद का मंच: ऐतिहासिक रूप से, क्रांतिकारी कवि काजी नजरुल इस्लाम जैसे विचारकों ने मां दुर्गा की तुलना 'भारत माता' से करते हुए औपनिवेशिक काल में इस त्योहार का उपयोग सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय चेतना जगाने के लिए किया था। जैसा कि भारत के राष्ट्रपतियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने संदेशों में बार-बार दोहराया है, दुर्गा पूजा का मूल संदेश 'अधर्म पर धर्म' और 'बुराई पर अच्छाई' की जीत है। यह बुनियादी संदेश हमें सिखाता है कि हम भेदभाव को निष्पक्षता से और नफरत को करुणा से हराएं। आखिर क्यों भूल जाते है दीन-ए-इस्लाम (इस्लाम धर्म): इसमें वैश्विक बंधुत्व की अवधारणा अत्यंत व्यापक और स्पष्ट है। इस्लाम के अनुसार, पूरी मानवता एक ही माता-पिता (आदम और हव्वा) की संतान है, इसलिए रंग, नस्ल, भाषा या भूगोल के आधार पर किसी भी मनुष्य के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार वैश्विक बंधुत्व के मुख्य स्तंभ निम्नलिखित हैं। मानवता की एकता (एक ही मूल)इस्लाम की पवित्र पुस्तक क़ुरआन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी मनुष्यों की उत्पत्ति एक ही स्रोत से हुई है।क़ुरआन में स्पष्ट है "हे लोगों! हमने तुम्हें एक पुरुष और एक स्त्री से पैदा किया और तुम्हें जातियों और कबीलों में बदल दिया ताकि तुम एक-दूसरे को पहचान सको। अल्लाह के नज़दीक तुममें सबसे सम्मानित वह है जो सबसे अधिक सदाचारी (परहेजगार) है।
नस्लीय श्रेष्ठता का खंडन: इस्लाम किसी भी प्रकार के जातिवाद या नस्लवाद को पूरी तरह खारिज करता है। अंतिम उपदेश (ख़ुत्बा हज्जतुल विदा): पैगंबर मुहम्मद (स.) ने अपने अंतिम ऐतिहासिक भाषण में वैश्विक बंधुत्व की घोषणा करते हुए कहा था:"किसी अरबी को किसी गैर-अरबी पर और किसी गैर-अरबी को किसी अरबी पर कोई श्रेष्ठता प्राप्त नहीं है।"
"न तो किसी गोरे को काले पर और न ही किसी काले को गोरे पर कोई प्रधानता है, सिवाय उसके अच्छे कर्मों के।" धार्मिक सहिष्णुता और स्वतंत्रता: वैश्विक बंधुत्व के लिए समाज में शांति और दूसरों के विचारों का सम्मान ज़रूरी है। इस्लाम धर्म को थोपने की मनाही करता है। क़ुरआन में "धर्म के मामले में कोई ज़बरदस्ती नहीं है।"इस्लाम अन्य धर्मों के मानने वालों के साथ न्याय, दया और अच्छे व्यवहार की ताकीद करता है, जब तक कि वे उत्पीड़न या युद्ध न करें। सामाजिक न्याय और मानवाधिकार दीन-ए-इस्लाम में वैश्विक बंधुत्व को व्यावहारिक रूप देने के लिए कुछ सामाजिक और आर्थिक प्रणालियाँ बनाई गई हैं। ज़कात (अनिवार्य दान): यह अमीर और गरीब के बीच की खाई को पाटकर समाज में भाईचारा बढ़ाता है।।हज यात्रा: हर साल दुनिया भर के हर देश, रंग और भाषा के लाखों मुसलमान एक ही जैसे सफेद कपड़े (इहराम) पहनकर मक्का में इकट्ठा होते हैं। यह वैश्विक बंधुत्व और समानता का सबसे बड़ा जीवंत उदाहरण है। यह कहना गलत नहीं होगा कि दीन-ए-इस्लाम के अनुसार, वैश्विक बंधुत्व केवल एक आदर्श विचार नहीं है, बल्कि एक व्यावहारिक जीवन शैली है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया से अन्याय, रंगभेद और नफरत को खत्म करके एक ऐसे वैश्विक समाज का निर्माण करना है जहाँ हर इंसान को बराबरी और सम्मान का अधिकार मिले।
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