- भक्तों की लगी है भीड़, पण्डाल भी बना है सोने जैसा सुनहरा
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: मां दुर्गा देवी को कभी मां, कभी योद्धा, कभी सृजनकर्ता और कभी ज्ञान एवं सिद्धि की शक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह विविधता बताती है कि नारी की भूमिका किसी एक सीमा में बांधकर नहीं देखी जा सकती। दुर्गा पूजा के दौरान घरों और मंदिरों में देवी की आराधना करने के साथ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर सम्मान देने की परंपरा भी इसी विचार को मजबूत करती है। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सेंट्रल कॉलोनी दुर्गा पूजा समिति ने अपने 64वें वर्ष के उत्सव में मां दुर्गा और उनके पूरे परिवार को 100 किलोग्राम से अधिक असली सोने के आभूषणों से सजाया है। इस दिव्य रूप और सोने के भव्य पंडाल की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं। भव्य स्वर्ण श्रृंगार: मां दुर्गा को पहनाए गए आभूषणों में सोने का मुकुट, हार, झुमके, चूड़ियाँ और पायल शामिल हैं। माता के साथ-साथ उनके बच्चों (लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश) की प्रतिमाओं को भी पूरी तरह सोने के गहनों से सजाया गया है। गहनों की कीमत: इन सोने के आभूषणों की अनुमानित कीमत लगभग 120 करोड़ से 140 करोड़ के बीच आंकी गई है। पंडाल की थीम: इस साल पंडाल की थीम मूर्तियों की एक परियों की कहानी रखी गई है। पंडाल का मुख्य प्रवेश द्वार भी बाहर से देखने पर किसी विशाल सोने के महल जैसा प्रतीत होता है।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था: इतनी भारी मात्रा में कीमती सोने की सुरक्षा के लिए पंडाल परिसर में बहु-स्तरीय सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पूरे परिसर में 32 से अधिक सीसीटीवी कैमरे, सशस्त्र बल, राज्य पुलिस के जवान और भारी संख्या में निजी सुरक्षा गार्ड एवं वॉलंटियर्स तैनात किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड्स भी लगाए गए हैं।इस भव्य और अलौकिक दृश्य को देखने के लिए उत्तर बंगाल और आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु सिलीगुड़ी के इस पंडाल में पहुंच रहे हैं।
हालांकि इस आध्यात्मिक भावना को वास्तविक जीवन में भी महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और अधिकारों के रूप में अपनाना आवश्यक है। देवी की पूजा तभी सार्थक मानी जा सकती है, जब समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता का भाव व्यवहार में भी दिखाई दे। भक्ति के साथ सामाजिक एकता का उत्सव: दुर्गा पूजा सामाजिक मेलजोल का भी बड़ा माध्यम है। सार्वजनिक पंडालों में अलग-अलग वर्गों और समुदायों के लोग एक साथ जुटते हैं। पूजा समितियां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करती हैं और स्थानीय स्तर पर सामूहिक भागीदारी देखने को मिलती है। कई स्थानों पर जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन, चिकित्सा शिविर और अन्य सामाजिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं। इस तरह दुर्गा पूजा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करती है। यह पर्व लोगों को एक-दूसरे से जोड़ता है और सामूहिक उत्सव के माध्यम से समाज में सहयोग और सद्भाव का संदेश देता है। बदलते दौर में भी कायम है परंपरा: समय के साथ दुर्गा पूजा के आयोजन का स्वरूप जरूर बदला है, लेकिन मां दुर्गा के प्रति आस्था कम नहीं हुई। आज आधुनिक तकनीक, डिजिटल माध्यम और सोशल मीडिया ने दुर्गा पूजा को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा दिया है। बड़े शहरों के साथ विदेशों में बसे भारतीय समुदाय भी दुर्गा पूजा का आयोजन करते हैं। इसके बावजूद पूजा की मूल भावना वही है- शक्ति की आराधना, बुराई पर अच्छाई की विजय, परिवार और समाज की खुशहाली तथा मानव जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार। आधुनिकता और परंपरा का यह मेल दुर्गा पूजा को आज भी प्रासंगिक बनाए हुए है।
मां दुर्गा की आराधना का व्यापक अर्थ: मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा दरअसल मनुष्य की आंतरिक यात्रा का प्रतीक भी मानी जा सकती है। शैलपुत्री से शुरू होकर सिद्धिदात्री तक पहुंचने वाली यह यात्रा बताती है कि शक्ति बाहर से मिलने वाली कोई वस्तु नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर भी मौजूद एक चेतना है। जरूरत केवल उसे पहचानने और सही दिशा में इस्तेमाल करने की है। नवरात्र का संदेश यही है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, धैर्य, तप, साहस, सकारात्मकता, करुणा, न्याय, निर्भयता और शांति के सहारे उनका सामना किया जा सकता है। मां दुर्गा के नौ स्वरूप इसी जीवन दर्शन को अलग-अलग रूपों में सामने रखते हैं। दुर्गा पूजा इसलिए केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस सोच का उत्सव है, जिसमें शक्ति को सृजन और संरक्षण से जोड़ा गया है। मां दुर्गा की आराधना हमें याद दिलाती है कि शक्ति का सर्वोच्च उद्देश्य केवल विजय नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना, कमजोरों की रक्षा, अन्याय का अंत और समाज में संतुलन कायम करना है। यही कारण है कि हर वर्ष नवरात्र और दुर्गा पूजा के अवसर पर करोड़ों श्रद्धालु पूरे विश्वास और भक्ति के साथ मां के चरणों में शीश झुकाते हैं और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और शक्ति की कामना करते हैं।
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