- बंगाल में पहली बार पाठ करने पहुंचे है धीरेंद्र शास्त्री
अशोक झा/ कोलकाता: बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीन दिन की हनुमान कथा और दिव्य दरबार से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने सनातन जागरण, गंगासागर मेला, दक्षिणेश्वर मंदिर की अपनी यात्रा और पत्रकार सुरक्षा पर बात की।
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहली बार पश्चिम बंगाल में पहुंचे हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सामने तीन बड़ी मांगें रखी हैं।
उन्होंने कहा कि पहली मांग है कि गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेला घोषित करवाया जाए। दूसरी गोमाता को राज माता का दर्जा दिया जाए और तीसरी काली पूजा के दौरान गलियों-मोहल्लों में होने वाले छोटे-छोटे दंगे अब बंद होने चाहिए। अब हर-हर गंगे होना चाहिए। उधर, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कथा के दौरान बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की। मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान, सरकार पश्चिम बंगाल और भारत की संस्कृति की रक्षा के लिए काम करेगी।
यहां बागेश्वर धाम का भी एक केंद्र होना चाहिए-अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हमारी सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के लिए एक आयोग बनाया है। यह भी पूरा किया जाएगा। बाबा महाराज जी, कृपया यहां आएं और अपना एक केंद्र बनाएं। यहां बागेश्वर धाम का भी एक केंद्र होना चाहिए। यह संतों की भूमि है। यह आध्यात्मिक जागृति की भूमि है। यह देश की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता है, जिसे पिछली सरकार ने तुष्टिकरण की राजनीति में बर्बाद कर दिया था; मौजूदा सरकार इसकी गरिमा को फिर से बहाल करने का काम करेगी।बंगाल सरकार को बताया सनातनी सरकार: पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार को लेकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सनातनी सरकार है। हम अपनी बात आपके माध्यम से ही पहुंचा सकते हैं। अब आप मुख्यमंत्री बने हैं तो इस प्रदेश की जनता का पूरा ध्यान आप पर है। प्रदेश की भावनाओं की कद्र करना आपके ऊपर है।
क्या बोले पंडित धीरेंद्र शास्त्री?: पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र तो है ही। बस विचारों में घोषित होने की आवश्यकता है। उसके लिए हम बंगाल आए हुए हैं। आप जैसे बुद्धिमान लोग हिंदुत्व विचारधारा का समर्थन करेंगे तो भारत हिंदू राष्ट्र विचारों में भी परिवर्तन होकर रहेगा। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर उन्होंने कहा कि हम साधु हैं, कोई नेता नहीं, हम संदेश क्यों देंगे? उनको भी कहेंगे कि कथा में आप भी पधारो। उस वक्त कथा नहीं हो पाई, आपको सुनने का मौका नहीं मिला, भगवान अब मौका दे रहा है। कथा सबकी है, राम सबके हैं, कृष्ण सबके हैं, काली सबकी हैं। बस यही तो हम बताने आए हैं। हमको आने से रोका था, रही होगी कोई मजबूरी। युवा देश की ताकत:भारत के युवाओं को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि युवा इस देश की ताकत हैं। इनके पास गति है तो निश्चित ही भारत की प्रगति होगी। एक कहानी हम अक्सर सुनाते हैं कि एक हवाई जहाज के पायलट ने घोषणा की कि दो खबर हैं। एक अच्छी और एक खराब। अच्छी खबर यह है कि हवाई जहाज पहले के मुकाबले तेज गति से उड़ रहा है और दुख वाली बात यह है कि कहां जा रहा है, पता नहीं। वर्तमान की युवा पीढ़ी का यही हाल है। वो तेज जा रहे हैं, पर कहां जा रहे हैं, ये पता नहीं। प्रत्येक माता-पिता, अभिभावक, गुरु, मंदिर और मदरसों का ये कर्तव्य है कि आज की पीढ़ी, जेन-जी या आने वाली सभी पीढ़ियों को ऐसे संस्कार दें कि वो राम प्रेमी और राष्ट्र प्रेमी हो सकें ताकि वो सड़कों पर निकलने की बजाय विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जाएं, वहां पर पढ़ें और जीवन को धन्य बनाएं और भारत को भव्य बनाएं।धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पश्चिम बंगाल की पूर्व की ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि पिछली बार उनकी सरकार में उन्हें बंगाल में कथा करने की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके बाद उनके मुंह से निकल गया था कि 'दीदी नहीं बुलाएंगी तो जब दादा आएंगे, तब कथा करने जाएंगे' और भगवान ने उनकी बात पूरी कर दी।ममता पर क्या बोले धीरेंद्र शास्त्री?: धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हम सत्ताओं के कारण कथा नहीं करते, ठाकुर के कारण करते हैं। हमारे कोई निजी कारण नहीं थे। हो सकता है उस समय सत्ता में रही दीदी के कोई निजी कारण रहे हों। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, "हम तो जहां जाते हैं वहीं आश्रम है। तुम्हारा घर हमारा आश्रम ही तो है। हम मठों में बहुत ज्यादा भरोसा इसलिए नहीं करते क्योंकि मठ तो कभी भी गिराए जाते हैं। हम मन में मठ बनाने की चेष्टा ज्यादा रखते हैं। मन में मठ बनाया जाएगा, वो कभी गिराया नहीं जाएगा। कौन झंझट में पड़े? मठ बनाने की सोचेंगे, फिर सीएम से गुहार लगाएंगे, फिर जमीन लेंगे, हम में और आप में क्या अंतर रहा? कोई दे देगा, तो अपना बोर्ड लगा देंगे। हम बहुत झंझटों में फंसने वाले गुरू नहीं, हम लोगों के मन में मठ बनाने की चेष्टा रखते हैं। बंगाल में पहली बार पाठ करने पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री: बंगाल में पहली बार पाठ करने पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सत्ता परिवर्तन तो होता रहता है। ये जनता के हाथ में है, हमारे हाथ में नहीं। हम तो बंगाल का मन परिवर्तन करने आए हैं। मन परिवर्तन नहीं हो पाया। विचार में परिवर्तन हुआ है, पर विकार में परिवर्तन नहीं हो पाया। हम विकार को मिटाने, मन परिवर्तन करने आए हैं। जिनके अंदर बंगाल में रहकर भारत के खिलाफ जहर भरा है, उनके अंदर हम अमृत भरने के लिए आए हैं।कृष्ण जनमाष्टमी की शुभकामना: उन्होंने आगे कहा कि आप सभी को कृष्ण जनमाष्टमी की शुभकामना। बंगाल विचार की, कवियों की, संतों की और भक्तों की भूमि है। हमें भरोसा है कि यहां से हमें प्यार और दुलार सब मिलेगा ही मिलेगा। हम प्यार और दुलार लेने आए भी नहीं हैं। हम तो सिर्फ जगाने आए हैं, जो जागे, वो सिकंदर, जो जागे, वो महान। हमारा उद्देश्य ही है भारत के प्रति जगाना। राम भक्ति और राष्ट्र भक्ति लोगों के अंदर भरी है, इसलिए हम कोने-कोने में जाते हैं। हमें यहां आकर बहुत अद्भुत लगा, पहले भी अच्छा लगता था। मन में एक दुविधा रहती थी। कुछ लोगों को हमारे आने से खुजली बहुत होती थी। अब खुजली थोड़ी कम हुई है।'दीदी नहीं बुलाएंगी तो, जब दादा आएंगे तब हम कथा करने जाएंगे': पूर्व की सरकार में कथा की अनुमति नहीं मिलने पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हो सकता है कि कोई परिस्थिति ऐसी रही हो कि उस समय जो सत्ता में थीं, उन्होंने हमें अनुमति नहीं दी। उनके कोई निजी कारण होंगे, हमारे कोई निजी कारण नहीं थे। हम सत्ताओं के कारण कथा नहीं करते हैं, ठाकुर के कारण कथा करते हैं। हम साधु हैं। हमारे पास हनुमान जी की माला है, हमारे मुंह से भगवान ने निकलवा दिया होगा। हमने कुछ नहीं किया। हमारे मुंह से निकल गया था कि 'दीदी नहीं बुलाएंगी तो, जब दादा आएंगे तब हम कथा करने जाएंगे।' निकल गया था और भगवान ने पूरा कर दिया। इसमें हमारा दोष नहीं है। ना हम किसी को वरदान दे सकते हैं, ना श्राप। यदि ऐसा होता तो हम पाकिस्तान को भस्म करने का श्राप न दे देते। उन्होंने आगे कहा कि वह तो बंगाल के लोगों ने किया है, पर दादा आए, तुम्हें खुश होना चाहिए और तुम खुश हो ना हो, हम तो खुश हैं।
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