- मुद्गल पुराण में मिलता है गणेश जी के उन आठ प्रमुख अवतारों की कहानी जिनका वर्णन
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: साल 2026 में गणेश चतुर्थी 2026 का पावन पर्व 14 सितंबर से शुरू होने जा रहा है. इस दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस खास मौके पर जानते हैं, गणेश जी के उन आठ प्रमुख अवतारों की कहानी जिनका वर्णन मुद्गल पुराण में मिलता है। वक्रतुंड, एकदंत, महोदर, गजानन, लंबोदर, विकट, विघ्नराज और धूम्रवर्ण के इन रूपों का संबंध अलग-अलग असुरों और मनुष्य के भीतर मौजूद विकारों से जोड़ा गया है।
वक्रतुंड अवतार: गणेश जी के आठ प्रमुख अवतारों में पहला रूप वक्रतुंड माना जाता है. वक्रतुंड का अर्थ टेढ़ी सूंड वाले भगवान गणेश से है. पौराणिक कथा के अनुसार, मत्सरासुर नामक असुर ने कठोर तपस्या करके शक्तियां हासिल कर ली थीं. शक्ति मिलने के बाद उसके भीतर ईर्ष्या और दूसरों को अपने से कम समझने का भाव बढ़ गया. उसने देवताओं और अन्य शक्तियों को परेशान करना शुरू कर दिया. तब भगवान गणेश ने वक्रतुंड रूप धारण किया और मत्सरासुर के अहंकार तथा अत्याचार का अंत किया.
एकदंत अवतार
गणेश जी का दूसरा प्रमुख अवतार एकदंत है. इस रूप में भगवान गणेश का एक ही दांत दिखाई देता है. एकदंत नाम से ही उनके इस स्वरूप की पहचान होती है. धार्मिक कथा के अनुसार, मदासुर ने शक्ति प्राप्त करने के बाद अपने बल और सामर्थ्य पर घमंड करना शुरू कर दिया. उसका अहंकार बढ़ता गया और उसने देवताओं सहित दूसरे लोकों में भी परेशानी पैदा करनी शुरू कर दी. भगवान गणेश ने एकदंत रूप में उसका सामना किया और उसके मद यानी घमंड को समाप्त किया।
महोदर अवतार
गणेश जी का तीसरा रूप महोदर कहलाता है. महोदर का अर्थ बड़े उदर वाले भगवान गणेश से है. मुद्गल पुराण की कथा में मोहासुर का संबंध मोह और भ्रम से बताया गया है. मोहासुर के प्रभाव से व्यक्ति सही और गलत के बीच का अंतर भूलने लगता है. जब उसका प्रभाव बढ़ा तो देवताओं और दूसरे प्राणियों के सामने संकट खड़ा हो गया. तब भगवान गणेश ने महोदर रूप धारण किया और मोहासुर को पराजित किया.
गजानन अवतार
भगवान गणेश का चौथा प्रमुख अवतार गजानन माना जाता है. गजानन यानी हाथी के मुख वाले भगवान गणेश.इस अवतार की कथा में लोभासुर का वर्णन मिलता है. नाम से ही पता चलता है कि लोभासुर का संबंध लालच से जोड़ा जाता है. अधिक से अधिक पाने की इच्छा जब जरूरत से आगे बढ़ जाती है, तो वह व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बन सकती है. भगवान गणेश ने गजानन रूप में लोभासुर का सामना किया और उसके प्रभाव को समाप्त किया.
लंबोदर अवतार:
गणेश जी के सबसे लोकप्रिय नामों में लंबोदर भी शामिल है. लंबोदर यानी बड़े उदर वाले भगवान गणेश. इस स्वरूप को क्रोधासुर से जुड़ी कथा के साथ बताया गया है. क्रोधासुर के भीतर क्रोध की शक्ति बढ़ती गई और वह इसी के प्रभाव में दूसरों को परेशान करने लगा. उसके अत्याचार से देवताओं के सामने भी संकट पैदा हो गया. तब भगवान गणेश ने लंबोदर रूप धारण कर क्रोधासुर को पराजित किया।विकट अवतार
भगवान गणेश का छठा प्रमुख अवतार विकट बताया गया है. इस रूप का संबंध कामासुर से जोड़ा जाता है. कामासुर को अनियंत्रित इच्छाओं और कामना का प्रतीक माना गया है. जब इच्छाएं व्यक्ति के विवेक पर हावी हो जाती हैं, तो वह सही-गलत का विचार किए बिना फैसले लेने लगता है. इसलिए भगवान गणेश ने विकट रूप धारण करके कामासुर का सामना किया.
विघ्नराज अवतार
गणेश जी का सातवां प्रमुख अवतार विघ्नराज कहलाता है. विघ्नों को दूर करने वाले भगवान गणेश के इस रूप का संबंध ममासुर से बताया गया है. ममासुर के नाम को ममता, आसक्ति और अपनेपन के अतिरेक से जोड़कर देखा जाता है. जब व्यक्ति किसी वस्तु, व्यक्ति या पद के प्रति जरूरत से ज्यादा आसक्त हो जाता है, तो उसके लिए उससे अलग होना मुश्किल हो जाता है.
विघ्नराज रूप में भगवान गणेश ने ममासुर का सामना किया और उसे नियंत्रित किया.
धूम्रवर्ण अवतार
भगवान गणेश का आठवां प्रमुख अवतार धूम्रवर्ण माना जाता है. धूम्रवर्ण का अर्थ धुएं के समान वर्ण वाले भगवान गणेश से जुड़ा है. इस रूप की कथा में अहंकारासुर के बारे में बताया गया है . अहंकारासुर को अहंकार और अपने आपको सबसे बड़ा समझने की भावना का प्रतीक माना जाता है. अहंकार बढ़ने पर व्यक्ति दूसरों की सलाह और सही बात को भी नजरअंदाज करने लगता है. भगवान गणेश ने धूम्रवर्ण रूप धारण करके अहंकारासुर का सामना किया।
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