अजीत मिश्र
पटना।बिहार के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में इन दिनों हलचल तेज है। बिहार कैडर के 1998 बैच के तेजतर्रार और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रत्न संजय की उनके मूल कैडर में वापसी हो रही है। हाल ही में वे सशस्त्र सीमा बल के आईजी के रूप में लखनऊ में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से समय से पूर्व मुक्त (रिलीव) करने के बाद, अब उनके शीघ्र ही पटना लौटने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। पटना पहुंचने के बाद वे पुलिस मुख्यालय में अपना योगदान देंगे। इस अहम फैसले को बिहार में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
शहाबुद्दीन के खिलाफ ऐतिहासिक कार्रवाई
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रत्न संजय को मुख्य रूप से साल 2005 में सिवान के तत्कालीन एसपी के रूप में उनके साहसिक कार्यों के लिए जाना जाता है।उन्होंने सिवान के तत्कालीन डीएम सीके अनिल (आईएएस) के साथ मिलकर बाहुबली आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ मोर्चा खोला था।अप्रैल 2005 में, उनके नेतृत्व में पुलिस बल ने शहाबुद्दीन के प्रतापपुर स्थित पुश्तैनी घर पर एक बड़ी छापेमारी की थी। इस ऐतिहासिक कार्रवाई के बाद बिहार की राजनीति में हड़कंप मच गया था।
करियर और वर्तमान पोस्टिंग
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रत्न संजय बिहार के कई जिलों (जैसे बगहा, सिवान, पूर्णिया प्रक्षेत्र के आईजी) में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान श्री संजय लंबे समय तक सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में आईजी (महानिरीक्षक) के पद पर तैनात रहे।
ताजा अपडेट
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सितंबर 2026 में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से समय पूर्व मुक्त (रिलीव) कर दिया है और अब उनकी बिहार कैडर मूल कैडर में वापसी हो रही है।
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