- जिन्होंने सिंघल की अगुवाई की वजह से ही मंदिर आंदोलन न सिर्फ साकार हुआ है, बल्कि हिन्दू समाज अपने आपसी मतभेद भुलाकर हुआ एकजुट
अशोक झा/ सिलीगुड़ी: विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के महानायक रहे दिवंगत अशोक सिंघल को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने की मांग विभिन्न संगठनों और राजनेताओं द्वारा समय-समय पर प्रमुखता से उठाई जाती रही है। एक बार फिर उनके जन्मशताब्दी वर्ष पर विहिप के प्रवक्ता सुशील रामपुरिया ने श्रद्धेय अशोक सिंघल को भारत रत्न देने की मांग उठाई है। कल के सफल कार्यक्रम के बाद उन्होंने सिक्किम के राज्यपाल( ओम प्रकाश माथुर ) जो पीएम मोदी के गहरे मित्र भी है को इस मांग को भारत सरकार तक पहुंचाने की मांग की है।अशोक सिंघल की अगुवाई की वजह से ही मंदिर आंदोलन न सिर्फ साकार हुआ है, बल्कि हिन्दू समाज अपने आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट भी हो रहा है।वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर। परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर॥ अयोध्या में प्रभु श्रीराम लला के मंदिर निर्माण के लिए आजीवन संघर्षरत, धर्मनिष्ठ विभूति एवं विहिप के वरिष्ठ नेता श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के विराट व्यक्तित्व के पुण्य स्मरण में, उनकी जन्मशताब्दी पर संपूर्ण जीवन में राष्ट्र, समाज, संस्कृति एवं धर्म की पुनर्स्थापना के लिए किए गए कार्यों का अद्भुत संस्मरण है। समाजसेवी और कई धार्मिक संगठनों से जुड़े सीताराम डालमिया के मुताबिक अशोक सिंघल ने एक अरब से ज्यादा देशवासियों में उनकी सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का बेहद अहम काम किया है, इसलिए उन्हें भारत रत्न मिलना ही चाहिए। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के सूत्रधार: अशोक सिंघल को अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन का मुख्य चेहरा और 'अगुवा' माना जाता है। उन्होंने इस विवाद को एक स्थानीय जमीन विवाद से अलग हटाकर एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया था। उन्होंने देशवासियों में सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने और हिंदू समाज को एकजुट करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान: समर्थकों का तर्क है कि सिंघल ने अपना पूरा जीवन देश, धर्म और समाज की एकता के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने 1980 के दशक से लेकर अपने अंतिम समय तक राम मंदिर आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप देकर शीर्ष पर पहुंचाया।
सामाजिक समरसता के कार्य: विहिप में रहते हुए उन्होंने मीनाक्षीपुरम धर्मांतरण घटना के बाद दलित समुदायों के लिए विशेष रूप से सैकड़ों मंदिरों का निर्माण करवाया था ताकि समाज में भेदभाव कम हो सके। उन्हें मरणोपरांत कानपुर की एक संस्था द्वारा 'सनातन धर्म रत्न पुरस्कार' ज़रूर दिया गया था, लेकिन देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न उन्हें अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। हाल ही में उनकी जन्म शताब्दी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके संगठनात्मक कौशल और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है लेकिन भारत रत्न कब ? । इसके पहले विशेष रूप से साधु-संतों की शीर्ष संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर यह मांग पुरजोर तरीके से उठाई थी। अखाड़ा परिषद का कहना था कि देश की आजादी में महात्मा गांधी के योगदान की तरह ही राम मंदिर आंदोलन को मुकाम तक पहुंचाने में अशोक सिंघल की ऐतिहासिक भूमिका रही है। इसलिए उन्हें भारत रत्न मिलने के साथ-साथ उनके कद के अनुरूप विशेष सम्मान भी दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद पूर्व भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत कई अन्य हिंदूवादी संगठनों जैसे किन्नर अखाड़ा और बजरंग दल ने भी केंद्र सरकार से उन्हें तत्काल मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने की अपील की है अशोक सिंघल को 'भारत रत्न' देने की मांग की। अखाड़ा परिषद का रुख: अखाड़ा परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने बयान जारी कर कहा था कि अशोक सिंघल राम मंदिर आंदोलन के सच्चे महानायक थे। सभी 13 अखाड़ों के संत उनके इस योगदान के लिए उन्हें देश के सबसे बड़े सम्मान का हकदार मानते हैं। अयोध्या फैसले के तुरंत बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर कहा था कि "जीत की इस घड़ी में हमें अशोक सिंघल को याद करना चाहिए और नमो सरकार को उनके लिए तत्काल भारत रत्न की घोषणा करनी चाहिए"।
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