- अवैध तरीके से की जा रही थी असम से बंगाल के रास्ते तस्करी, पहले भी पकड़ा गया था सुपारी
कस्टम की पीएनआई सिलीगुड़ी यूनिट ने गुप्त सूचना के आधार पर आज असम से बंगाल के रास्ते हो रहे सुपारी तस्करी का भांडाफोड़ किया है। इसका नेतृत्व कस्टम अधीक्षक शेखर सिंहा कर रहे थे। ट्रक से 450 बोरी में सुपारी पाया गया। जिसका वजन 31500 किलोग्राम है। इसका बाजार मूल्य एक करोड़ 60 लाख आंका गया है। जप्त सुपारी खाने योग्य है या नही इसकी जांच करवाई जाएगी।मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में संलिप्त ट्रक का रजिस्ट्रेशन नंबर RJ-02 EC 8997 पाया गया है, जो राजस्थान के अलवर (RJ-02) क्षेत्र का पंजीकृत वाहन है।
क्या बरामद हुआ: पुलिस या जांच एजेंसियों ने इस ट्रक से करोड़ों रुपये मूल्य की सुपारी की बड़ी खेप पकड़ी है, जिसे तस्करी या बिना वैध टैक्स/दस्तावेजों के ले जाया जा रहा था।कस्टम के सुरक्षा अधिकारियों और संबंधित विभाग द्वारा बिना इनवॉइस या ई-वे बिल के परिवहन किए जाने के आरोप में वाहन सहित पूरी खेप को जब्त कर लिया गया है और मामले में आगे की कानूनी जांच जारी है। आगे की कार्रवाई की जा रही है। इसके पहले भी अगस्त माह में सुपारी जब्त किया था। जिसको लेकर काफी हो हल्ला मचाया गया था जबकि जब्त सुपारी को खाने योग्य नहीं बताया गया था। वहीं बताते चले कि प्रवर्तन निदेशालय ने म्यांमार से विदेशी सुपारी की तस्करी और उससे प्राप्त धन को वैध बनाने के कथित मामले में असम, मिजोरम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में 20 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत की थी। एजेंसी के अनुसार, यह जांच असम में दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर की जा रही है। ये मामले विदेशी सुपारी की अवैध तस्करी और सीमा शुल्क की चोरी से जुड़े थे।प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि जांच राजस्व खुफिया निदेशालय की जांच में सामने आए तथ्यों पर आधारित था।राजस्व खुफिया निदेशालय ने पहले 655 मीट्रिक टन से अधिक विदेशी सुपारी और उसके परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहनों को जब्त किया था। एक अन्य खबर के अनुसार असम राइफल्स ने कस्टम्स प्रिवेंटिव फोर्स, चम्फाई के साथ मिलकर 7 सितंबर, 2026 को मिज़ोरम में ज़ोटे-मुनमेल्था रोड पर एक सर्च ऑपरेशन चलाया। यह सर्च ऑपरेशन तस्करी की खास जानकारी पर आधारित था। इस ऑपरेशन में 150 बैग मिले जिनमें 12,000 kg सुपारी थी, जिसकी कीमत लगभग ₹1.32 करोड़ थी। ज़ब्त किए गए कंसाइनमेंट को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए कस्टम्स प्रिवेंटिव फोर्स, चम्फाई को सौंप दिया गया।जांच से पता चला कि यह सिंडिकेट मिज़ोरम (मुख्य रूप से चम्फाई ज़िला) में मौजूद सप्लायर्स के नेटवर्क के ज़रिए काम करता था, जो भारत-म्यांमार सीमा से सुपारी की तस्करी में शामिल थे। इनमें ह्मिंगथानज़ामी (मालिक, बेकी कुहवा डॉर), लालरिंचानी (मालिक, एलआर स्टोर) और लालेंकावली (मालिक, केएल स्टोर)। इसके अलावा, असम में मौजूद मददगार (फैसिलिटेटर) भी शामिल थे। अबूब अहमद मजूमदार (पूरे सिंडिकेट के मुख्य मददगारों में से एक) और प्रदीप कुमार पॉल (मालिक, शारदा ट्रेडर्स) का नाम भी केस में शामिल है।साथ ही, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में फैले कंसाइनी/फाइनेंसर भी इस मामले में शामिल रहे हैं। इनमें फलाकाटा की जय माताजी एंटरप्राइजेज, नबद्वीप की नबद्वीप अरेकानट प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड, वाराणसी की शुभ ट्रेडिंग कंपनी और चिमेरा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड का नाम एफआईआर में लिखा है। वाराणसी की लिमिटेड कंपनी, सर्कुलर ट्रेडिंग में मदद करने वाले इनवॉइस प्रोवाइडर यानी कोलकाता के एक कारोबारी और लॉजिस्टिक्स सुविधा देने वाली कंपनी बीकानेर असम रोडलाइंस इंडिया लिमिटेड (गुवाहाटी) भी केस में आरोपी हैं।
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