- कहा,"हमारी सरकार का चार-सूत्री एजेंडा है-राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद, जन कल्याण, केंद्र-राज्य समन्वय
- कहा हम यह सुनिश्चित करना कि सभी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे
अशोक झा/ कोलकाता: बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में "बड़ा बदलाव" लाने के लिए उनकी सरकार का कामकाज चार-सूत्री एजेंडे पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद के मामले में कोई समझौता न करने का रुख भी शामिल है। सिलीगुड़ी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार का चार-सूत्री एजेंडा है-राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद, जन कल्याण, केंद्र-राज्य समन्वय और यह सुनिश्चित करना कि सभी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे।" अधिकारी ने कहा कि कार्यभार संभालने के तुरंत बाद उनकी सरकार ने बांग्लादेश से सटी पश्चिम बंगाल की सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जमीन सौंपी और जनगणना की प्रक्रिया को भी मंजूरी दी।उन्होंने कहा, "जनगणना को लेकर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। पिछली सरकार ने इसके लिए मंजूरी नहीं दी थी। (पदभार संभालने के तुरंत बाद) मैंने मुख्य सचिव को यह काम तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया।"
अधिकारी ने कहा कि राज्य में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू कर दी गई है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के तहत लाया गया एक बड़ा कानूनी सुधार बताया।उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के तहत लाया गया एक बड़ा कानूनी सुधार बताया। अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने पश्चिम बंगाल में नये आपराधिक कानून को लागू करने का काम लटकाए रखा था। उन्होंने कहा कि चार-सूत्री एजेंडा राज्य सरकार के कामकाज का मार्गदर्शन करेगा, क्योंकि वह पश्चिम बंगाल में "बड़ा बदलाव" लाने की दिशा में काम कर रही है।ऐसे चौराहे थे, जिन्हें एक खास समुदाय अपनी बपौती मान बैठा था, वो सड़कें- जहाँ नियमों को ताक पर रखकर नमाज पढ़ना आम बात बन चुकी थी, और वो लाचार व्यवस्था, जहाँ देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए BSF जवानों को भी ज़मीन का एक टुकड़ा पाने के लिए संघर्ष करना पड़।
जनता बेबस थी- चाहकर भी वे न तो केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री आवास योजना' का लाभ ले पा रही थी और न ही 'आयुष्मान भारत' के तहत अस्पतालों में इलाज करा पाती थी। ऐसा लगता था जैसे बंगाल देश की मुख्यधारा से पूरी तरह कट चुका हो, लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि जिस बंगाल में कभी बदलाव असंभव सा लगता था, मात्र 100 दिनों में बदलाव साफ़ और सीधा दिखने लगा है। दरअसल, बदलाव की असली शुरुआत हुई 9 मई 2026 को! कोलकाता का वो ऐतिहासिक 'ब्रिगेड परेड ग्राउंड'… जहाँ शुभेंदु अधिकारी, दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल जैसे दिग्गजों के मंच से एक साथ शपथ ली, तो पूरे बंगाल में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और पश्चिम बंगाल की जनता में वापस से एक उम्मीद सी जगी कि अब शायद नया निजाम हमारे लिए कुछ बेहतर करेगा! यह वही सपना था, जिसे पूर्व की टीएमसी सरकार ने दशकों तक सिर्फ चुनाव जीतने के लिए चूरन की तरह बाँटा… लेकिन जब धरातल पर काम करने की बारी आई, तो वे अपनी तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति में ही उलझे रहे।
पर इस बार माहौल कुछ अलग था! 9 मई के बाद बंगाल के इतिहास में पहली बार लोग बेखौफ होकर भगवा लहरा रहे थे, एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर मानो असली आजादी का जश्न मना रहे थे तो कुछ मंदिरों की घंटियाँ बजाकर अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व महसूस कर रहे थे। मंदिरों से गूँजती घंटियों की आवाज अब किसी को चुभ नहीं रही थी, बल्कि जनता के चेहरों पर बंगाल की बदलती तस्वीर साफ दिख रही थी और इन्हीं कुछ तस्वीरों को देखते 100 दिन बीत गए।
अब जब बंगाल में भाजपा सरकार के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। तो आइए जानते हैं कि इन 100 दिनों के भीतर बंगाल की तस्वीर कितनी बदली है?
बंगाल में BSF को मिली भूमि
आपको याद होगा कि बंगाल में सालों तक बांग्लादेश की सीमा पर तार लगाने के लिए गृह मंत्रालय राज्य सरकार से ज़मीन माँगता रहा, लेकिन ममता सरकार ने अपने तुष्टिकरण के चक्कर में इसे लटकाए रखा और फिर खुली सीमा का फायदा उठाकर बांग्लादेशी घुसपैठिए अपनी मनमर्जी से भारत आते-जाते रहे, लेकिन राज्य में भाजपा सरकार बनने के महज दो हफ्तों के भीतर ही सीएम शुभेंदु अधिकारी ने इस पर सबसे बड़ा फैसला लिया और कहा, "हम सीमा पर बाड़ लगाने के लिए BSF को 27 किलोमीटर ज़मीन सौंपने जा रहे हैं।"
यह सिर्फ एक प्रशासनिक ऐलान नहीं था बल्कि इस आधिकारिक घोषणा का असर कुछ ऐसा हुआ कि आज विभिन्न सीमावर्ती जिलों में प्रक्रिया तेज़ करते हुए 1100 एकड़ से अधिक भूमि BSF को सौंपी जा चुकी है। इसका परिणाम ये है कि देश की सीमाएँ अब सुरक्षित होने वाली हैं। जिन बॉर्डर्स से अपनी मनमर्जी से बांग्लादेशी आते-जाते थे, वो अब सील हो रहे हैं।
आयुष्मान भारत की बंगाल में शुरुआत
इसी तरह केंद्र की क्रांतिकारी 'आयुष्मान भारत योजना', जिसे ममता बनर्जी ने सिर्फ़ राजनीतिक द्वेष के कारण राज्य में लागू नहीं किया था उसे शुभेंदु सरकार ने 16 अगस्त को पूरे राज्य में लागू कर दिया। इसके चलते आज बंगाल के लगभग 1 करोड़ 43 लाख परिवार यानी 6 करोड़ लोगों को हर साल 5 लाख रुपये तक के मुफ़्त कैशलेस इलाज का लाभ मिल सकेगा। यहां तक कि अब बंगाल के 1,240 निजी और 627 सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ, राज्य के नागरिक देशभर के 38 हज़ार से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ़्त इलाज का लाभ उठा सकेंगे।
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