- उत्तरबंग मारवाड़ी पैलेस में सुबह 10. 30 बजे बहेंगी धर्म गंगा: वीरेंद्र अग्रवाल
- जो अनाथों के नाथ बनकर बन गई दीदी मां, प्रवचन में राष्ट्र के लिए उगलती है ज्वाला , सेवा में लोगों को देती है चंदन सी शीतलता : नरेश अग्रवाल
- राम मंदिर आंदोलन की धुरी कहलाती थी साध्वी ऋतंभरा : स्वामी सत्य प्रकाशानन्द
अशोक झा/ सिलीगुड़ी : दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा रविवार 9 अगस्त को सिलीगुड़ी उत्तर बंगाल मारवाड़ी पैलेस में गुरु दीक्षा और दिव्य आशीर्वचन एवं प्रवचन देने पहुंच रही है। यह सिलीगुड़ी वासियों के लिए परम सौभाग्य है। परम शक्ति पीठ सेवा प्रकल्प और वात्सल्य सेवा केन्द्र, सिलीगुड़ी के द्वारा इसकी तैयारी तेज कर दी गई है। आज भवन में कार्यक्रम को लेकर पत्रकार वार्ता की गई। इसमें कार्यक्रम संयोजक वीरेंद्र अग्रवाल,
अध्यक्ष माधव बिहारी हरलालका, सचिव नरेश कुमार अग्रवाल,स्वामी सत्य प्रकाशानन्द, विहिप के प्रदेश मंत्री लक्ष्मण वंसल, सुनीता देवी, पायल अग्रवाली , प्रियंका तिवारी हनुमान डालमिया, अनिल अग्रवाल, सुलेखा अग्रवाल आदि ने कहा कि दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा के संबंध में एक लाइन में कहा जा सकता वह आप संध्या की सावित्री हैं, आप देवी हैं, आप माता हैं। आयोजकों ने बताया कि उनके धर्म उपदेश उस समय हो रहा जब बंगाल में धर्म ध्वजा के वाहक के रूप में भाजपा बंगाल में सत्ता संभाल रही है। दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा को पिछले वर्ष पद्मभूषण सम्मान मिला था। इस पुरस्कार को साध्वी ऋतंभरा ने इस पुरस्कार को अपने गुरु स्वामी परमानंद गिरि के चरणों में समर्पित किया था। उन्होंने कहा कि इस सम्मान से उनके गुरु के सानिध्य और वात्सल्य की अवधारणा को सार्थक रूप मिला है।कौन हैं साध्वी ऋतंभरा?: स्वामी सत्य प्रकाशानन्द ने बताया कि दीदी मां साध्वी ऋतंभरा का जन्म पंजाब के लुधियाना जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनका असली नाम निशा किशोरी था। 16 वर्ष की आयु में उन्होंने हरिद्वार के संत स्वामी परमानंद गिरी से दीक्षा लेकर साध्वी बनने का निर्णय लिया। इसके बाद, उन्होंने समाज सेवा और धार्मिक प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई।
1990 के दशक में, जब राम मंदिर आंदोलन ने जोर पकड़ा,साध्वी ऋतंभरा इसके प्रमुख चेहरों में से एक बन गईं। उनके जोशीले और ओजस्वी भाषणों ने लाखों लोगों को प्रेरित किया। उनकी आवाज़ ने न केवल पुरुषों को,बल्कि महिलाओं को भी इस आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उनके भाषणों के कैसेट्स बाजार में बिकते थे और मंदिरों में बजाए जाते थे। उनकी प्रसिद्धि इतनी बढ़ी कि उन्हें 'दीदी मां' के नाम से भी देशभर में जाना जाने लगा। परम शक्ति पीठ सेवा प्रकल्प से जुड़ी सुनीता अग्रवाल ने कहा कि इस पावन भूमि पर धर्म गंगा प्रवाहित करने आ रही है आप सभी लोग इस गंगा में स्नान करने का मौका मत चुके। पिछले चार वर्षों से परम शक्ति पीठ को ग्रामीण क्षेत्रो में उनकी 10 बेटियों का प्रवास हो रहा है। दीदी मां
साध्वी ऋतंभरा के अनुसार वर्तमान दौर में केवल भारत की सनातन महिलाएं ही देश की संस्कृति और अस्मिता की सच्ची गारंटी बन सकती हैं।उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज के समाज में मर्यादा और महिलाओं की महिमा के जो पुराने प्रतिमान टूट रहे हैं। उन्हें समझना बेहद जरूरी है। आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करने के लिए संतानों के हृदय में बचपन से ही भारतीय संस्कृति के अनुरूप संस्कारों का बीजारोपण होना चाहिए।
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