- कई परिवार के तो रिश्तेदारों की है लंबी सूची, अवैध कमाई से संपत्ति की खरीद की भी होगी जांच
- बांका मामले से बड़ा मामला माना जा रहा है किशनगंज का ,जनहित याचिका में खुल रही है इसकी एक-एक पोल
- कई वर्षों से इस जिले में पदस्थापित रहे खनन अधिकारी की रिपोर्ट भी जांच के घेरे में
अशोक झा/ कोलकाता: पड़ोसी राज्य बिहार का चिकन नेक इन दिनों सुरक्षा और बालू माफिया को लेकर सुर्खियों में है। बिहार के किशनगंज में बालू माफिया को लेकर अब सरकार सख्त रुख अपना लिया है। बिहार सरकार के गृह विभाग ने एक्टिव 24 से अधिक ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार की है, जो बालू माफिया बताए जाते हैं। इसकी कमाई से लगातार संपत्ति खरीद रहे है। इन सभी बालू माफिया की शामत आने वाली है। यह लिस्ट आर्थिक अपराध शाखा यानि ईओयू को सौंप दी है। कारवाई को रुकवाने के लिए इससे जुड़े लोग पटना से दिल्ली तक भागदौड़ कर रहे है।बिहार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) का अवैध बालू खनन और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट पर शिकंजा कसने कि तैयारी में है। छापामारी से पहले सभी प्रकार के साक्ष्य जुटाने के काम किए जा रहे है। जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार 2023 से अबतक सेटेलाइट पिक्चर के माध्यम से बालू के खनन का आकलन लगाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार इस कार्रवाई के लिए एनजीटी के मापदंड, सरकारी निर्देश, राजस्व की चोरी, अबतक की कार्रवाई, नदियों से बालू की निकासी के बाद गांव और सड़क पर इसका हो रहा प्रभाव आदि की पुख्ता रिपोर्ट तैयार की जा रही है। राजनीतिक संरक्षण के साथ इस धंधे में लिप्त लगे वाहनों की संख्या,परिवारों से जुड़े लोगों के नामों की पुष्टि उनके आपराधिक इतिहास को भी खंगाला जा रहा है। क्या बालू माफिया द्वारा फर्जी तरीके से रसीद काट बालू को राज्य के बाहर भेजा गया है। बालू माफिया से अधिकारियों का कितना सांठ गांठ है यह भी खंगाला जा रहा है।
कैसे आया मामला सुर्खियों में : बिहार के लोगों को 131 करोड़ का बांका बालू घोटाला और ईडी की कार्रवाई ने बिहार के बांका जिले में अवैध बालू खनन को लेकर हुए एक बहुत बड़े वित्तीय घोटाले का भंडाफोड़ किया यह कंपनी महादेव एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड का है। इसी कंपनी के लोगो ने किशनगंज जिला में भी नदियों से बालू निकालने का टेंडर लिया है। देखते ही देखते बिना कागजी कार्रवाई और राशि जमा किए बिना लगभग 800 करोड़ रुपए का बालू नदियों से निकाल लिया। इसी को लेकर भागलपुर निवासी सूर्यकांत कुमार सिंह और अन्य लोगों ने पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका केस नंबर: CWJC-5655/2026 दायर किया। इसमें मांग की गई है कि ED की पटना जोनल यूनिट ने बिहार के बांका जिले में कथित अवैध बालू खनन और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जिस प्रकार बड़ी कार्रवाई की है। उसी प्रकार की जांच और कार्रवाई किशनगंज जिले में भी हो। कहा गया कि ED ने 17 जुलाई 2026को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत देश के अलग-अलग राज्यों में 8 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। ये कार्रवाई महादेव एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ की जा रही है। जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी पर बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से बालू खनन करने का आरोप है। कंपनी का नियंत्रण राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी चांदक परिवार के पास है, जिसमें अशोक चांदक और उनके बेटे राघव चांदक प्रमुख है। जुलाई 2026 में ED ने इस सिंडिकेट से जुड़े राजस्थान, दिल्ली और बिहार के 12 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस बड़ी कार्रवाई में लगभग 2.92 करोड़ कैश समेत भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य और बेनामी संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए गए हैं। यहां से मिले कागजात का तार भी किशनगंज से जुड़ता जा रहा है। इसी कंपनी से जुड़े लोगों ने ही किशनगंज में नदियों की कोख को नियमों को ताक पर रखकर खनन किया है।बताया गया कि ED की जांच के दौरान सामने आया कि कंपनी ने कई सालों तक बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन किया, लेकिन इसकी जानकारी राज्य के खनन विभाग के रिकॉर्ड में नहीं थी. इसके बाद ED ने अक्टूबर 2024 में IIT पटना से बांका जिले की नदियों के बालू घाटों का जियोस्पेशियल एनालिसिस कराया। IIT पटना की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वित्त वर्ष 2015-16 से 2022-23 के बीच कंपनी ने करीब 131 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बालू का अवैध खनन किया। यही मांग किशनगंज जिले के लिए भी कि जा रही है। लगातार कानूनी दबाव और यह मामला मीडिया में चर्चा me आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) का अवैध बालू खनन और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट पर शिकंजा कि तैयारी कर ली है। जांच एजेंसियों ने करोड़ों रुपये के राजस्व घोटाले के मामले में शीर्ष कई परिवार उनके करीबियों और बड़े व्यापारियों को अपने रडार पर लिया है। बिहार के चिकन नेक किशनगंज जिले में बालू माफिया का नेटवर्क महानंदा और डौंक जैसी प्रमुख नदियों के घाटों पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन और परिवहन को अंजाम दे रहा है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और खनन विभाग द्वारा लगातार की जा रही छापेमारी के बावजूद ये माफिया बेखौफ होकर अवैध कारोबार चला रहे हैं और कई मौकों पर पुलिस टीम पर जानलेवा हमले भी कर चुके हैं।
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