अशोक झा/ सिलीगुड़ी:हिंदू पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि का शुभारंभ 16 अगस्त की शाम 4:51 बजे हुई और इसका समापन 17 अगस्त की शाम 5 बजे होगा। ऐसे में नाग पंचमी की पूजा के लिए सबसे शुभ समय 17 अगस्त को सुबह 5:51 बजे से सुबह 8:29 बजे तक बताया गया है। इसी को ध्यान में रखकर शिवभक्त बाबा मंदिर में शिव और नागो के राजा बासुकीनाथ को मनाने के लिए मंदिर पहुंच रहे है। सावन महीने के तीसरे सोमवार को लेकर भोला भक्तों में बेहद उत्साह है। शिवालयों की सफाई और सजावट का कार्य देखते ही बनता है। ठाकुरगंज हर गौरी मंदिर, जंगली बाबा मंदिर, जलपेश मंदिर समेत छोटे बड़े सभी शिवालयों में शिवालयों में रूद्राभिषेक समेत अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष इंतजाम है। रविवार की शाम से कांवरियों का जत्था पहुंचना शुरू हो गया है। चहुंओर भोलेनाथ के भजन, हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा शहर शिवमय हो गया है। शिवालयों पर पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम किया गया है। बाबा हर गौरी मंदिर में भोला भक्त महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की गई है। चौक बाजार की दुकानें केशरिया वस्त्रों से पट पडी है। भोला भक्तों को सोमवार को व्रत रखकर जल, दूध, गन्ने का रस, शहद और इत्र से शिवलिंग पर अभिषेक करने की सहाल दी है। बताया कि इससे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। कहा कि भक्तों को शिवलिंग पर भगवान शिवलिंग पर नैवेद्य, फल, भांग, धतूरा, बिल्वपत्र, शमीपत्र चढ़ाकर जलाभिषेक करना लाभकारी होता है। खास बात यह है कि इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार भी पड़ रहा है. ऐसे में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है. इस दिन श्रद्धालु नाग देवता की पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करने का विधान है. मान्यता है कि नाग पंचमी पर विधि-विधान से पूजा करने से नाग दोष, राहु-केतु से जुड़ी परेशानियों और सर्प भय से राहत मिल सकती है। नाग पंचमी 2026 का शुभ मुहूर्त: हिंदू पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि की शुरुआत 16 अगस्त की शाम 4:51 बजे होगी और इसका समापन 17 अगस्त की शाम 5 बजे होगा. ऐसे में नाग पंचमी की पूजा के लिए सबसे शुभ समय 17 अगस्त को सुबह 5:51 बजे से सुबह 8:29 बजे तक बताया गया है।इस दिन रवि योग और शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है, जिससे पूजा-पाठ के लिए दिन को विशेष माना जा रहा है।
नाग देवता की पूजा क्यों की जाती है?: सनातन परंपरा में नागों का संबंध भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों से जुड़ा माना गया है. भगवान शिव के गले में नाग सुशोभित होते हैं।जबकि शेषनाग भगवान विष्णु की शैया हैं। भगवान कृष्ण के जन्म के समय भी शेषनाग ने वासुदेव की यमुना पार करने में सहायता की थी।समुद्र मंथन में वासुकी नाग की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। इसी वजह से नाग पंचमी को नाग देवताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व माना जाता है। नाग पंचमी की पूजन विधि:
पूजा की शुरुआत भगवान शिव के स्मरण से करें। सबसे पहले शिवलिंग का जल से अभिषेक करें और बेलपत्र अर्पित करें। इसके बाद नाग देवता की पूजा आरंभ करें। नाग प्रतिमा या चित्र पर हल्दी, रोली, अक्षत और फूल चढ़ाए जा सकते हैं। इसके बाद चने, खील-बताशे और कच्चे दूध का भोग लगाएं। घर के मुख्य द्वार पर गोबर, गेरू या मिट्टी से नाग की आकृति बनाकर भी पूजा करने की परंपरा बताई गई है. अंत में धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
सपने में सांप दिखे तो करें ये उपाय:
यदि किसी व्यक्ति को बार-बार सांपों से जुड़े सपने आते हैं या सर्प भय बना रहता है तो दिए गए उपाय के अनुसार चांदी के दो सर्प और एक स्वस्तिक बनवाएं। इन्हें एक थाली में रखकर नाग देवता और स्वस्तिक की पूजा करें. नागों को कच्चा दूध और स्वस्तिक को बेलपत्र अर्पित करें।इसके बाद “ॐ नागेन्द्रहाराय नमः” मंत्र का जाप करें. नागों को शिवलिंग पर अर्पित करने और स्वस्तिक को धारण करने की बात भी इस उपाय में बताई गई है।
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